: justice for मां : आपके साथ, मां के साथ, हम सभी खड़े हैं। हां, यह विडंबना ही है कि आजादी के ६० साल बाद भी पुलिस और प्रशासन आम आदमी के साथ सामंत की तरह व्यवहार कर रहा है। ब्रिटिश लोगों ने इस पुलिस को भारतीय लोगों के दमन के लिए ट्रेनिंग दी थी। पुलिस रक्षा करने के बजाय दमन करने लगी। जबकि ब्रिटेन में पुलिस आम लोगों के साथ सभ्यता के साथ पेश आती है।
हमारे यहां गिरफ्तार करने का अधिकार दमन का हथियार बन गया। जिसका सम्मान किया जाना चाहिए, उसे ले जाकर घंटों थाने में बिठा दिया गया। इससे वहां के प्रशासन की दमनकारी प्रवृत्ति का पता चलता है। इस घटना की जांच होने वाली है। जो लोग दोषी हों, उन्हें कड़ी सजा मिलनी चाहिए। एक सम्मानजनक महिला को कैसे ले जाकर थाने में बिठा दिया गया? इसकी जांच हो। उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री महिला हैं। तब ऐसी घटना हो तो यह शर्मनाक है।
लेखक विनय बिहारी सिंह कोलकाता के वरिष्ठ पत्रकार हैं और हिंदी ब्लाग दिव्य प्रकाश के माडरेटर भी। पत्रकारिता के साथ-साथ अध्यात्म में रुचि रखने और रमने वाले विनय बिहारी से संपर्क करने के लिए [email protected] का सहारा ले सकते हैं।











