Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

कहिन

आलोक ने देखा था हिमालय की वादियों में सृजनपीठ का सपना

उत्तराखंड के नैसर्गिक वातावरण ने पंत को प्रकृति का सुकुमार कवि बनाया, वहीं आलोक जी के अंतर्मन में हिमालय के प्रति अटूट लगाव व सानिध्य ने उनके व्यक्तित्व को दृढ़ता प्रदान की. रामगढ़ की चर्चा मात्र से उन्हें सकून मिल जाता था. उन्हें वहां माधवराव सिंधिया, सिंघानिया या बिरला परिवार की रियासत ने आकर्षित नहीं किया न ही अकबर अहमद डम्पी या अम्बिका सोनी के काटेज ने उन्हें अपनी ओर खींचा.

उत्तराखंड के नैसर्गिक वातावरण ने पंत को प्रकृति का सुकुमार कवि बनाया, वहीं आलोक जी के अंतर्मन में हिमालय के प्रति अटूट लगाव व सानिध्य ने उनके व्यक्तित्व को दृढ़ता प्रदान की. रामगढ़ की चर्चा मात्र से उन्हें सकून मिल जाता था. उन्हें वहां माधवराव सिंधिया, सिंघानिया या बिरला परिवार की रियासत ने आकर्षित नहीं किया न ही अकबर अहमद डम्पी या अम्बिका सोनी के काटेज ने उन्हें अपनी ओर खींचा.

वहां मौजूद वातावरण और फूलों,फलों की उस घाटी ने, जिसकी आध्यात्मिक उर्जा को महसूसकर कभी गुरु रविंद्रनाथ टैगोर और कवियित्री महादेवी वर्मा ने वहां ठिकाने बनाये, उन्हें अपनी ओर खींचा था. जैसे कोई बच्चा अपने खिलौने को बहुत सहेज कर रखता हो, वही स्थिति आलोकजी की थी. कुछ माह पहले उन्होंने मुझसे कहा, “विजय, जिस पेड़ को तिवारीजी अपना कहते हैं वह मेरे प्लाट में है”. पेड़ों की एक-एक टहनी उनके जेहन में थी. दिल्ली में जब वे महाप्रयाण की तैयारी में थे, सुप्रियाजी ने रुंधे गले से अम्बरीशजी से कहा, “अब हमलोग रामगढ़ नहीं जा पाएंगे. निश्चितरूप से एक सपना देखा था आलोक जी ने इस गाँव को लेकर, वे इसे सृजनपीठ बनाना चाहते थे.

होली के रंगों के बीच सुप्रिया जी के एक एसएमएस ने मानो सभी रंगों को सफ़ेद कर दिया. यह सभी जानते हैं कि कैंसर एक जानलेवा रोग है और अंतिम दम तक इस बीमारी से डटकर मुकाबला करते आलोक जी मानो जीवन की एक सीख दे गए. मौत दस्तक दे चुकी हो उसके बावजूद भी दूसरों की चिंता, जल्दी कोई दूसरा उदहारण नहीं मिलेगा.

नैनीताल से मात्र 20 किमी दूर हरजेंडिया और सेब के पेड़ों से घिरे रामगढ़ में गृहनिर्माण के लिए आलोकजी ने भूमिपूजन भी कराया था. वे वहां की आबोहवा में इस तरह रच बस गए थे कि किसी परिचित के पहुँचते ही गांववाले यह जरूर बता देते थे कि आलोकजी कब आये थे और कब आनेवाले हैं. आलोक जी के कहने पर जब अर्जुन सिंह रामगढ में अपनी आत्मकथा लिख रहे थे, अम्बरीश जी के साथ एक दिन मैं भी चाय पीने गया. अर्जुन सिंह बोले, “रामगढ़ के बारे में आलोक ने मुझे पहले क्यों नहीं बताया”. मध्य प्रदेश के दोनों दिग्गज आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन बिना दोनों का नाम लिए भारतीय राजनीति और पत्रकारिता के अध्याय को पूरा नहीं किया जा सकता.

आलोकजी के प्लाट पर उनसे ज्यादा हम और अम्बरीशजी गए होंगे और एक वास्तुशिल्पी की तरह उनके निवास की अभिकल्पनायें की होंगी, पर आज जब आलोकजी नहीं हैं, कितना मुश्किल होगा उनकी यादों के साथ रामगढ़ में रहना.

लेखक विजय शंकर चतुर्वेदी कैमूर टाइम्‍स के संपादक तथा आईएफडब्‍ल्‍यूजे के राष्‍ट्रीय पार्षद हैं.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

0 Comments

  1. pradeep rai

    March 23, 2011 at 8:22 am

    alokji ko shat shat naman,unka himalay ke prati etna anurag jankar achha laga. pradeep, lucknow

  2. pradeep rai

    March 23, 2011 at 9:18 am

    alok ji ko naman

  3. BIJAY SINGH, JAMSHEDPUR

    March 23, 2011 at 11:06 am

    Ramgarh me Alok ji ka smarak ya yadgar ka nirman to kiya hi ja sakta hai.
    hum samajhte hain ki unki atma ko shanti bhi milegi aur ek yadgar ,ek shradhanjali hum apne priya Alok ji ko to de hi sakte hai.

  4. sagar singh

    March 23, 2011 at 3:09 pm

    Ambrarishji aur chaturvedi ji ko Ramgarh me Alok ji ke liye kuch jarur karana chahiye. sagar

  5. ramesh

    March 24, 2011 at 2:01 pm

    vijay ji, alok ji ke nam par ak seminar bulaye, ham sab bhi shirkat karege. ramesh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास तक खबर सूचनाएं जानकारियां मेल करें : [email protected]

भड़ास के वाट्सअप चैनल से जुड़ें और नवीनतम खबरें पाएं : Bhadas Whatsapp

भड़ास लीगल टीम : किसी किस्म की लीगल हेल्प के लिए संपर्क करें- Bhadas Legal Team

You May Also Like

Uncategorized

भड़ास4मीडिया डॉट कॉम तक अगर मीडिया जगत की कोई हलचल, सूचना, जानकारी पहुंचाना चाहते हैं तो आपका स्वागत है. इस पोर्टल के लिए भेजी...

Uncategorized

भड़ास4मीडिया का मकसद किसी भी मीडियाकर्मी या मीडिया संस्थान को नुकसान पहुंचाना कतई नहीं है। हम मीडिया के अंदर की गतिविधियों और हलचल-हालचाल को...

हलचल

[caption id="attachment_15260" align="alignleft"]बी4एम की मोबाइल सेवा की शुरुआत करते पत्रकार जरनैल सिंह.[/caption]मीडिया की खबरों का पर्याय बन चुका भड़ास4मीडिया (बी4एम) अब नए चरण में...

Uncategorized

मीडिया से जुड़ी सूचनाओं, खबरों, विश्लेषण, बहस के लिए मीडिया जगत में सबसे विश्वसनीय और चर्चित नाम है भड़ास4मीडिया. कम अवधि में इस पोर्टल...