पिछले ढाई सालों से इंक्रीमेंट और प्रमोशन में निराशा लगने के बाद कई सहयोगी इंडिया न्यूज को छोड़ दूसरे ठिकानों की ओर निकल गए थे. यहां भगदड़ जैसी स्थिति हो गई थी. जिसको भी दूसरे चैनलों में मौका मिला यहां से निकल लिया. पर ज्यादातर कर्मचारी प्रबंधन से प्रमोशन और इंक्रीमेंट की उम्मीद लगाए बैठे थे. प्रबंधन भी भगदड़ को देखते हुए इन लोगों को निराश नहीं किया. पिछले दिनों यहां लगभग सभी कर्मचारियों का इंक्रीमेंट हुआ है, जिसके बाद अब और ज्यादा कर्मचारी यहां से भागने का मूड बना चुके हैं.
इस इंक्रीमेंट ने उनके सपनों पर तुषारापात कर दिया है. प्रबंधन ने नए लोगों को तो इंक्रीमेंट नहीं दिया है, लेकिन जो लांचिंग और उसके आसपास के टाइम से इंडिया न्यूज को अपनी सेवाएं दे रहे थे, उनको इंक्रीमेंट का लाभ मिला है. सूत्रों का कहना है लगभग तीस से चालीस लोगों को पांच से दस प्रतिशत का इंक्रीमेंट दिया गया है. जूनियर स्तर पर प्रमोशन भी दिया गया है. सभी इस इंक्रीमेंट से भौचक्क और हतप्रभ हैं. यह इंक्रीमेंट उन्हें मजाक लगने लगा है.
जिन लोगों का इंक्रीमेंट हुआ है, उनमें ज्यादातर लोग ट्रेनी और असिस्टेंट प्रोड्यूसर स्तर के हैं. जिनकी सेलरी चार हजार से शुरू होकर कुछ ऊपर तक जाती है. ऐसे लोगों को पांच से दस प्रतिशत का इंक्रीमेंट मिला है. जिसका फायदा इन लोगों को दो सौ से लेकर एक हजार तक हुआ है. प्रमोशन के नाम पर ट्रेनियों को असिस्टेंट प्रोड्यूसर बना दिया गया है. असिस्टेंट को एसोसिएट बना दिया गया है. ज्यादातर एसोसिएट और प्रोड्यूसर तो पहले ही इंडिया न्यूज को बॉय कर चुके हैं.
प्रत्येक संस्थान की तरह यहां भी खास लोगों का खास ख्याल रखा गया है. ऐसे लोगों की सेलरी में जरूर थोड़ी अच्छी बढ़ोत्तरी हुई है. ऐसे लोगों का सेलरी इंक्रीमेंट जूनियरों से छिपाकर रखा गया है. हालांकि इस इंक्रीमेंट से आहत जूनियर भी चापलूस टाइप के लोगों की सेलरी का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं परन्तु इक्जैक्ट आंकड़ा नहीं मिल पा रहा है. चैनल में असंतोष का माहौल बना हुआ है. इस इंक्रीमेंट के बाद पिछले तीन सालों से अपना खून-पसीना चैनल को देने वाले कर्मचारी अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं.
इंडिया न्यूज से जुड़े एक पत्रकार ने बताया कि इस इंक्रीमेंट से अच्छा था कि हमलोगों को इंक्रीमेंट दिया ही नहीं जाता. तीन साल की मेहनत के बाद मुझे चार सौ रुपये का लाभ मिला है. मैं तो किस्मत वाला हूं कुछ लोग तो मेरे जैसे किस्मत वाले भी नहीं निकले. उसने बताया कि इस इंक्रीमेंट के बाद ज्यादातर कर्मचारी गुस्से में हैं. अब वे लोग अपने-अपने जुगाड़ तलाशना शुरू कर चुके हैं. अगर मौका मिला तो सब भाग लेंगे.
अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि इंक्रीमेंट नहीं हुआ था तो कुछ लोग बढि़या वेतन होने की उम्मीद लगाए थे. भगदड़ थी परन्तु कम थी. लेकिन अब जिस तरीके से इंक्रीमेंट किया गया है इसके बाद तो नाराज लोगों की संख्या बढ़ गई है. अब इस स्थिति में यहां और भगदड़ मचेगी. सभी ने अपने संपर्क सूत्रों को तलाशना शुरू कर दिया है. एक कर्मी ने कहा कि दूसरे संस्थानों में इंक्रीमेंट के बाद खुशी आती है यहां से इंक्रीमेंट ने लोगों को निराश कर दिया है.












सुरेश
April 30, 2011 at 7:03 am
इंडिया न्यूज वालों का ये खेल तो पिछले डेढ़ साल से चल रहा है। जब लोगों में गुस्सा होता है तब इंक्रीमेंट का लॉलीपॉप देकर लोगों को बहला देते हैं। अगर इंक्रीमेट होगा तो पहले रविन ठकराल के चेला लोगों का होगा।
ala
April 30, 2011 at 1:16 pm
all lies – nothing is true in this, whatever management can do they have done their best
spsinha
April 30, 2011 at 1:36 pm
INDIA NEWS SE BHI KOI LOOTERA HO SAKTA HAI KYA? YAH EK ALAG TARAH KA SOSAK VARG HAI.JISKA HISTORY HI GOLDEN HO PAISA DABANE AUR PATRAKARON KA SOSHAN KARANE ME USASE PAYMENT BADHANE KI UMMID KARANA HIN MURKHTAPURN HAI.
Deepak
June 12, 2011 at 6:20 am
भैया हमने तो ढाई साल बिताये है इंडिया न्यूज़ में पर इन्क्रीमेंट किस चिड़िया का नाम है हमे तो पता नहीं आप में से कोई जाने तो हमे भी इतला कर दीजियेगा फ़िलहाल हम इंडिया न्यूज़ में नहीं है.
दीपक जैन 🙂
jam
July 17, 2011 at 8:28 am
increament kya hota hai ye india news ke seniors ko nai pata unko sirf jouniors ka shoshar karna aata hai or increament wo sirf apna karwate hai unka mai jo bechare 12-12 ghante lag kar sirf 5,000-12,000 ke liye kam kar rahe hai …. ye badhi hui salary un logo ko hazam nai hogi…