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इमोशनल टार्चर पर पुलिस अधिकारी खामोश!

‘justice for मां’ अभियान को समर्थन देते हुए देहरादून, मुजफ्फरनगर और नोएडा से प्रकाशित ‘रॉयल बुलेटिन’ हिंदी दैनिक ने खबर को प्रमुखता के साथ पेज एक पर प्रकाशित किया है. खबर के साथ थाने में बंधक बनाकर रखी गई महिलाओं की तस्वीर भी है जिस पर कैप्शन दिया गया है-  ”बिना अपराध की सजा”.  संबंधित खबर को नीचे प्रकाशित कर रहे हैं, जिसे आप आराम से पढ़ सकते हैं.

‘justice for मां’ अभियान को समर्थन देते हुए देहरादून, मुजफ्फरनगर और नोएडा से प्रकाशित ‘रॉयल बुलेटिन’ हिंदी दैनिक ने खबर को प्रमुखता के साथ पेज एक पर प्रकाशित किया है. खबर के साथ थाने में बंधक बनाकर रखी गई महिलाओं की तस्वीर भी है जिस पर कैप्शन दिया गया है-  ”बिना अपराध की सजा”.  संबंधित खबर को नीचे प्रकाशित कर रहे हैं, जिसे आप आराम से पढ़ सकते हैं.

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0 Comments

  1. umesh shukla

    October 26, 2010 at 8:12 pm

    Yashwantji, Maa ke prati gazipur police ka rawaiya atyant nindniya raha hai. uski jitani ninda ki jay voh kam hi hai. aisha nahi ki kewal gazippur police balki poore sube ki police atyant samvedanshoonya ho gayi hai is bindu par charcha ke liye lamba jan abhiyaan chalaye jane ki jaroorat hai. yeh vichar kiya jana chahiye ki akhir aisha kyon ho raha hai. kaishe in halat se mukti mil payegi.

  2. डॉ. भानु प्रताप सिंह

    October 26, 2010 at 11:03 pm

    यशवतं भाई, यूं तो हर सरकार पुलिस को निजी प्रयोग करती है। लेकिन जैसा अब हो रहा है, वैसा कभी नहीं हुआ। जिनकी पहुँच नहीं है, उनकी कोई सुनने वाला नहीं है। पुलिस वाले तो इस तरह से बात करते हैं जैसे ये िकसी मां की कोख से पैदा नहीं हुए हैं.. वे भूल गए हैं कि कभी रिटायर होंगे और सामान्य आदमी की तरह अपनों के ही डंडे खा रहे होंगे। आगरा में ही रिटायर्ड दरोगा के अपह्त पुत्र को खोजने के लिए इसी पुलिस ने कुछ नहीं किया.. रिटायर होने के बाद दरोगाजी को उनके अपने पुलिस वालों ने ही भुला दिया।

  3. aapkiawaz.com

    October 27, 2010 at 4:53 pm

    यशवंत जी, अभी बहुत सारे रास्ते बाकी है। हम लोग आये दिन इस तरह की घटना देखते रहते है। आप तो पत्रकार है, तो इतनी भी सुनवायी हो गई। वरना गरीबों व अन्य लोगो की कोई सुनने वाला है ही नही। कृपया धैर्य से काम लीजियें। आपकी मायूसी से दोषियों को बल मिलेगा। आगे की सोचियें, पीछे हटना वीर का काम नहीं है। ये कायरता है। मेरी राय है किसी दिन केन्द्रीय महिला आयोग, चुनाव आयोग व अन्य संबंधित विभागों के मंत्रियों व राजपाल आदि से मिलकर ज्ञापन आदि देते है। सभी विभागों का अनुभव है कि कुछ भी कर लो, कुछ दिन लोग कोशिश करके चुप बैठ जाते है, जिसका उनको फायदा उन्हे मिलता है। मां ने आपके लिए कितनी राते-वर्ष आपको पालने में बिताये है और आप उनके लिए थोड़ी सी कोशिश करके ही थक गये, अपने लिए न सही देशहित में इस जंग को जारी रखियें। हम लोग आपके साथ है। संपादक- आपकी आवाज़.कांम।

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