एक दुखद खबर हैदराबाद से मिली है. ईटीवी में यूपी डेस्क पर सीनियर कापी एडिटर के पद पर कार्यरत प्रणय मोहन सिन्हा की आज हार्ट अटैक से निधन हो गया. पहले उन्हें हैदराबाद के एक स्थानीय हास्पिटल में ले जाया गया जहां डाक्टरों ने बताया कि हार्ट अटैक के कारण प्रणय का प्राणांत हो चुका है. प्रणय ईटीवी में करीब सात वर्षों से थे. उनकी उम्र अभी 42 साल की थी.
परिवार में एक बिटिया जो कक्षा दो में पढ़ती है और पत्नी हैं. प्रणय लखनऊ के रहने वाले थे. उनके पिता के यूपी में वरिष्ठ आईएएस थे और ऑल इंडिया रेडियो दिल्ली में डिप्टी डाइरेक्टर जनरल के पद से रिटायर हो चुके हैं. प्रणय करीब पंद्रह वर्षों से पत्रकारिता में थे और बताया जाता है कि वे राष्ट्रीय सहारा, लखनऊ में भी काम कर चुके हैं. सूत्रों के मुताबिक प्रणय का आज वीकली आफ था. निधन की सूचना मिलते ही ईटीवी में मातम छा गया है.
प्रणय के करीबियों का कहना है कि उनका दैनिक भास्कर, बिहार के लिए चयन हो गया था लेकिन वे लखनऊ लौटना चाहते थे. उनकी योजना लखनऊ से एक मैग्जीन प्रकाशित करने की थी. आफिस में प्रणय मोहन की सभी लोग इज्जत करते थे क्योंकि वे बेहद हंसमुख व मुंहफट इंसान थे. सभी के सुख-दुख में भागीदारी करते थे. उनकी पत्नी बीएड करने के बाद शिक्षिका के रूप में काम कर रहीं हैं और इन दिनों बिटिया के साथ हैदराबाद में प्रणय के साथ थीं. बताया जाता है कि शाम की फ्लाइट से प्रणय का शव हैदराबाद से लखनऊ ले जाया जाएगा.












amit.
April 24, 2011 at 9:22 am
प्रणय जी फोन पर हाय हैलो करने की बजाय जय माता दी से शुरूआत करते थे। बार बार बस वही याद आ रहा है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति और उनके परिजनों को इस असीम दुख सहने की ताकत दे।
mohd arif siddiqui
April 24, 2011 at 10:15 am
may god give peace to the departed soul…pranay ji aap bhut yaad ayenge…the most rememberable thing about you, was your down to earth behaviour….you were amicable like fish in the water….a person of high esteem but low attitude. your works, deed and laughters shall always remain alive
pankaj
April 24, 2011 at 10:28 am
hamari gahari samvedan shok santapt pariwar ke sath hai.
वनइंडिया से अजय मोहन
April 24, 2011 at 10:41 am
आज सुबह जब मुझे खबर मिली की प्रणय भाई साहब का निधन हो गया है, मैं सन्न रह गया। मैंने आंख बंद की और उनका हंसता हुआ चेहरा मेरे सामने आ गया, मुझे लगता है जीवन में कभी भी उनके बारे में सोचूंगा या उनका स्मरण करूंगा, उनका हंसता चेहरा ही सामने आयेगा, क्योंकि मैंने हमेशा उन्हें हंसते हुए ही देखा। मैने जनसत्ता एक्सप्रेस, लखनऊ में पत्रकारिता की शुरुआत जिन वरिष्ठ पत्रकारों के सानिध्य में की थी, उनमें से एक प्रणय सर भी थे। विषम से विषम परिस्थितियों का हंसते हुए सामना करना मैने उन्हीं से सीखा। कठिन परिस्थितियों में मैने कई बार प्रणय सर की तरह काम करने की सोची, लेकिन मैं उनकी तरह नहीं बन पाया और शायद बन भी नहीं पाउंगा…. प्रणय भाई साहब को मेरा शत शत नमन।
kiran rai
April 24, 2011 at 11:20 am
yeh vakai behad dhukad hai, vishwash karna mushkil hai, ki itna zindadil aur dil ke saaf vyakti ki maut kaise ho sakti hai, hum log sabhi unhe PRANAY BHaiYA hi khte thay,yaad hai ki senior hone ke bavzood bhi unhe kaye baar apne juniors se kafi sunna pdta tha, phir bhi hanste rhte thay, unhe seniors khte thay ki bachon ke saath na rhen, apni gravity maintain karen, lekin unke bal man ne kabhi ise tajeeh nhi d, aaj woh har pal yad aa rhe hain, aur man abhi vishwas nhi krna chaah rha ki HAMARE PRANAY BHAIYA nhi rhe…
Anupam Trivedi
April 24, 2011 at 11:51 am
Bahut Dukhad.
Bahut zindadil insan thee Pranayji. Sayad bahut kam logo ko pata ho voh UP mein jailer bhi rahe aur vaha se naukri chorkar he journalism mein aye. Yakin karna muskil hai voh ab nahi hai.
Om Shanti
amitvirat
April 24, 2011 at 1:34 pm
PRANAY SIR KE BAREIN MEIN LIKHNE SE PEHLE EK BAAT DIL MEIN AA RAHI HAI KI AAKHIR BHAGWAN HAR ACHCHHE INSAN KO ITNI JALDI IS DUNIYA SE KYUN BULA LETA HAI. VO CHEHRA JO HUMESHA HANTA REHTA THA KISI KI TAKLEEF MEIN SABKE SAATH KHADA HOTA THA. UNKE SHABD KOSH MEIN JUNIOR NAAM KA KOI SHABD HI NAHIN THA. JAB KABHI GUSSA HOTE TO TODI DER BAAD JUNIOR KO SAMJHANE KHUD HI CHALE JATE AISE LOG MEDIA KYA DUNIYA MEIN BHI SHAYAD VIRLE HI HOTE HAIN. BHAGVAN UNKI AATMA KO SHANTI DEIN
ravish ranjan shukla
April 24, 2011 at 2:15 pm
pranay da..visyaas karna kathin hai..we nek dil aur mehnati sathi the hamare…hamesh muskurate hua baat karna unki aadat thi..bhagwan unki aatma ko shanti de…
umendra singh
April 24, 2011 at 3:21 pm
pranay sir mushkil me bhi hasna sikha gaye.meri shradhanjali
Zafar Irshad
April 24, 2011 at 3:36 pm
Pranay ke saath mujhe kuch month kaam karne ka mauka mila tha…Bahut hi Jolly aur Lovable insaan tha…Aaj Amar Ujala LKO ke Rakesh Verma ne SMS kar yeh khabar di sun kar vishwas nahi hua…turant Rakesh ko ph milaya to khabar sahi nikli…Bahut dukh hua…ek dost kho kar…Bhagwan Pranay ki aatma ko shanti de aur uski wife & bati ko teh dukh sahan karne ke Shakti…AAMEEN…
प्रमोद प्रवीण
April 24, 2011 at 5:39 pm
हंसमुख चेहरा..सावला रंग,,,बेवाक प्रणय भाई…हमसे हमेशा-हमेशा के लिए जुदा हो गए.. यकीन नहीं होता..लेकिन, ये प्रभु की ये कैसी लीला है..समझ से परे है…कैसे भुला पाएंगे उन्हें…ईश्वर शोक संतप्त परिवार को साहस दें..और प्रणय भाई की आत्मा को चिरशांति…………..
Mithilesh
April 24, 2011 at 5:58 pm
Jab tak rahe.. Sabko Hansate rahe..
Bina Batae hi Sai Ki Saran me Chale Gaye..
Aur Hame Gamo ke sath chhod gaye..
hamari samvedna aur sahanubhuti aapke pariwar ke sath hai
Mithilesh
April 24, 2011 at 6:03 pm
Bhagwan Apki aatma ko shanti de…Hamari samvedna aur sahanubhuti aapke pariwar ke sath hai.
SHIVAMM TRIPATHI
April 24, 2011 at 7:47 pm
दादा तुम चले गए….और हमारी DEFEAT हो गई….दादा के बारे में जितना लिखा जाए…जितनी तारीफ की जाए..शायद कम हो..पूरा का पूरा ईटीवी परिवार शोक में डूबा हुआ है…हर किसी के लिए बेहद खास थे हीरा सर….हिंदी और अंग्रेजी दोनों पर दादा की पकड़ मजबूत थी….काफी कुछ सीखा हमने दादा से…..उनका स्वभाव ही उनकी शख्सियत की पहचान थी…..हर तरह दादा लोकप्रिय थे….
गब्बर तुम्हारे जाने से हमारी DEFEAT हुई है….
Sujeet
April 25, 2011 at 4:14 am
रो पड़ा ईटीवी….प्रणय मोहन चले गए…छोड़ गए यादें….
pawan mishra
April 25, 2011 at 12:50 pm
Bhaiya bhaut yad aawoge aap.
Peeyush Tripathi
April 25, 2011 at 1:08 pm
Pranay ji doosron ko heera kahte then.lekin vastav me wo khud heera the.Unka Hansta hua chehra aur baat baat par chutki bajana bhoolta nahi hai
ARUNESH KUMAR
April 25, 2011 at 4:52 pm
चिट्ठी न कोई संदेश, जाने कौन सा देश…प्रणय दा तुम चले गए…आपके समय में . ईटीवी ज्वाइन करने वाले हर नए व्यक्ति को आपकी ज़िदादिली से जुड़ी बातें याद आती रहेंगी…आप हमेशा मुस्कराते हुए सभी का स्वागत करते थे…लेकिन न जाने आपके मुस्कराते चेहरे के पीछे कौन सा ग़म था…जिसकी वजह से ज़िंदगी ने आपको डिफीट कर दिया….पर आप ज़िंदगी की जीत में यकीन करने वाले ऐसे महान विद्वान थे जिन्होंने हम जैसों को पत्रकारिता का रास्ता दिखाया….दुख की इस घड़ी में हम सब आपके परिजनों के साथ हैं…हे पारब्रम्ह परमेश्वर….. प्रणय दादा की आत्मा को शांति दे….और उनके परिजनों को इतने बड़े दुख को सहन करने की शक्ति दे
ashutosh jha
April 26, 2011 at 9:06 am
major mohan……we love you. and we miss you
Ishwar apke aatma ko shanti de……aur apke pariwar ko is dukh ke ghadi main unka sath de.
ashutosh jha, india news