सेवा में, संपादक भडास 4 मीडिया, महोदय, अमर उजाला, बरेली के लोग अपने एजेंटों का खून चूस रहे हैं। हालत यह है कि कुछ अभिकर्ताओं को उधार लेकर प्रेस की रकम चुकानी पड़ रही है। मामला कुछ इस प्रकार है कि एजेंटों को बिना किसी पूर्व सूचना के 07 जुलाई से अमर उजाला, बरेली ने मानसून आफर शुरू कर दिया। सुबह जब एजेंट सप्लाई उठाने पहुंचे तो किसी की सप्लाई में 10 तो किसी में 20 प्रतियां तक बढ़ी हुई मिलीं।
बारिश के मौसम में पहले से ही सप्लाई घट जाने से बची प्रतियों को खपाना मुश्किल हो रहा था। और प्रतियां बढ़ने से एजेंट परेशान हो उठे। सर्कुलेशन विभाग के अधिकारियों को फोन कर सप्लाई बढ़ाने की वजह पूछी गई तो बताया गया कि स्कीम शुरू होने के कारण बढ़ाई गई है। पहले से सूचना दिए बिना सप्लाई बढ़ाने का विरोध करते हुए एजेंटों ने कापी कम करने को कहा लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई और कुछ ही दिनों बाद दूसरी बार फिर से प्रतियों की बढ़ोत्तरी कर दी गई। इस बार भी पहले से कोई सूचना नहीं दी गई।
हालत यह है कि एजेंटों के पास 20 से लेकर 50 प्रतियां तक बच रही हैं। सप्लाई कम करने के बारे में कोई सुनवाई नहीं हो रही है जिससे एजेंट परेशान हैं। उनका कहना है कि अमर उजाला उनका खून चूस रहा है। एजेंटों का तर्क है कि दैनिक जागरण ने पहले स्कीम शुरू की थी तब किसी एजेंट ने अमर उजाला को प्रतियां कम नहीं की थीं तो स्कीम शुरू होने पर प्रतियां क्यों बढ़ाई जा रही हैं। वैसे भी स्कीम से अखबार पर अब कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है। इसकी बजाय खबरों पर ध्यान दिया जाना चाहिए, लेकिन हालत यह है कि लगभग दो माह से बरेली का अमर उजाला पाठकों को खबरों के बजाय विज्ञापन पढ़ा रहा है। 16 पेज के अखबार में 10 पेज विज्ञापन में ही निकल जाते हैं।
बरेली से आई एक चिट्ठी पर आधारित.












prem singh dhami
July 28, 2011 at 1:39 pm
uttrakhand mai Hindustan akhbar wale reporteo ko khoon chus rahe hai. Hindustan launching main jeen logo ne mahtwpuran bhumika nibhaye baaad mai aunke hi kar de dhoke se vidai. PREM SINGH DHAMI, TANAKPUR, CHAMPAWAT