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ओरिएंटेशन प्रोग्राम में सम्मिलित हुए हिंदी के विदेशी शिक्षक

हिंदीहिंदी भाषा और साहित्‍य की अभिवृद्धि तथा विकास, हिंदी में आधुनिक विमर्शों व अंतरानुशासनिक विषयों का अध्‍ययन तथा शोध, हिंदी को अधिक प्रकार्यात्‍मक दक्षता और प्रमुख अंतरराष्‍ट्रीय भाषा के रूप में मान्‍यता दिलाने के उद्देश्‍य से स्‍थापित महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय, वर्धा में पहली बार विदेशी हिंदी अध्‍यापकों के लिए 13 दिनों का अभिविन्‍यास (ओरिएंटेशन) कार्यक्रम सम्‍पन्‍न्‍ा हुआ। हिंदी भाषा की शिक्षण प्रविधि पर आयोजित अभिविन्‍यास कार्यक्रम में क्रोएशिया, जर्मनी, थाईलैण्‍ड, मॉरीशस तथा चीन के हिंदी अध्‍यापकों ने सहभागिता की।

हिंदीहिंदी भाषा और साहित्‍य की अभिवृद्धि तथा विकास, हिंदी में आधुनिक विमर्शों व अंतरानुशासनिक विषयों का अध्‍ययन तथा शोध, हिंदी को अधिक प्रकार्यात्‍मक दक्षता और प्रमुख अंतरराष्‍ट्रीय भाषा के रूप में मान्‍यता दिलाने के उद्देश्‍य से स्‍थापित महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय, वर्धा में पहली बार विदेशी हिंदी अध्‍यापकों के लिए 13 दिनों का अभिविन्‍यास (ओरिएंटेशन) कार्यक्रम सम्‍पन्‍न्‍ा हुआ। हिंदी भाषा की शिक्षण प्रविधि पर आयोजित अभिविन्‍यास कार्यक्रम में क्रोएशिया, जर्मनी, थाईलैण्‍ड, मॉरीशस तथा चीन के हिंदी अध्‍यापकों ने सहभागिता की।

गौरतलब है कि महात्‍मा गांधी संस्‍थान, मोका (मॉरीशस) के डॉ. जयचंद लालबिहारी, विदेशी अध्‍ययन विश्‍वविद्यालय, बीजिंग (चीन) की हिंदी की शिक्षिका यालान ली, मॉरीशस की रश्मि लालबिहारी, रामखमहेयंग विश्‍वविद्यालय, बैंकाक (थाईलैण्‍ड) के डॉ. सथित चैपुनिया, हैम्‍बर्ग विश्‍वविद्यालय, जर्मनी के डॉ. राम प्रसाद भट्ट, शिल्‍पाकॉर्न विश्‍वविद्यालय, बैंकाक के प्रो. बुमरूंग खामइक, जागरेब विश्‍वविद्यालय, क्रोएशिया की डॉ. बिलजाना अभिविन्‍यास कार्यक्रम में शामिल हुए।

अभिविन्‍यास कार्यक्रम में देशभर के नामचीन भाषाविदों व साहित्‍यकारों ने विदेशी हिंदी प्राध्‍यापकों के लिए हिंदी के विभिन्‍न पक्षों पर प्रकाश डाला। हिंदी विश्‍वविद्यालय के भाषा विद्यापीठ के अधिष्‍ठाता प्रो. उमाशंकर उपाध्‍याय ने हिंदी के ऐतिहासिक व वर्तमान परिप्रेक्ष्‍य पर, भाषाविद प्रो.रामप्रकाश सक्‍सेना ने हिंदी का वर्णविन्‍यास पर, आगरा के प्रो. अरूण चतुर्वेदी ने हिंदीध्‍वनि व्‍यवस्‍था पर, दिल्‍ली के प्रो. ठाकुर दास ने हिंदी शब्‍द भंडार-तत्‍सम, तद्भव, देशज, विदेशी तथा हिंदी के प्रयोजनमूलक रूप, शब्‍द रचना : धातु, उपसर्ग, प्रत्‍यय, शब्‍दनिर्माण के सिद्धांत, संधि और समास पर, दिल्‍ली के प्रो. गंगाप्रसाद विमल ने हिंदी की साहित्यिक बोलियां : ब्रज और अवधी-व्‍याकरणिक रूपरेखा व शैली : हिंदी, हिंदुस्‍तानी, हिंग्लिश पर, दिल्‍ली के प्रो. रविप्रकाश गुप्‍त ने हिंदी के क्रिया रूप-रचना काल, पक्ष और वृति व वाच्‍य और प्रयोग पर, दिल्‍ली के प्रो. वीआर जगन्‍नाथन ने हिंदी वाक्‍य रचना में निजवाचीकरण, नामिकीकरण, संबंधवाचीकरण, नवप्रवर्तन, दिल्‍ली के प्रो. केके गोस्‍वामी ने हिंदी रूप-रचना और अन्विति में संज्ञा, सर्वनाम और विशेषण, वचन, लिंग, पुरूष, कारक, क्रिया: वचन, लिंग, पुरूष से अन्विति पर, सी-डेक पूणे के करीमुल्‍ला शेख ने हिंदी भाषा प्रौद्योगिकी और शिक्षणसामग्री के निर्माण पर, उदयपुर के प्रो. केके शर्मा ने साहित्यिक विधाओं की शिक्षण-विधि पर, हिंदी विश्‍वविद्यालय के नाट्य एवं फिल्‍म अध्‍ययन विभाग के प्रो. रवि चतुर्वेदी ने विदेशी छात्रों के हिंदी-शिक्षण में नाटक, फिल्‍म तथा टेलीविजन की भूमिका पर, आगरा की प्रो. वशिनी शर्मा ने हिंदी भाषा प्रौद्योगिकी और शिक्षण सामग्री निर्माण पर प्रकाश डाला।

उद्घाटन वक्‍तव्‍य में केंद्रीय हिंदी संस्‍थान, आगरा के उपाध्‍यक्ष साहित्‍यकार अशोक चक्रधर ने हिंदी को भारतीय लोकसंपर्क की भाषा बताते हुए इसे रूढियों से मुक्‍त कर सूचना प्रौद्योगिकी से जोड़ने पर बल दिया। कुलपति विभूति नारायण राय ने समापन समारोह की अध्‍यक्षता करते हुए कहा कि हम विश्‍वविद्यालय की मूल संकल्‍पना के तहत ज्ञान, शांति और मैत्री को विश्‍वपटल पर स्‍थापित करने में अग्रसर हो रहे हैं। विदेशी हिंदी अध्‍यापकों के लिए आयोजित किए गए अभिविन्‍यास कार्यक्रम के द्वारा एक मैत्री का प्रयास होगा साथ ही विदेशों से प्रगाढ संबंध भी होंगे। उन्‍होंने भारत को शांतिप्रिय देश बताते हुए कहा कि हिंदी शांति की भाषा रही है। भाईचारा बढ़ाने में इस भाषा के अमूल्‍य अवदानों को रेखांकित करते हुए उन्‍होंने कहा कि यह सभी संस्‍कृतियों का सम्‍मान करती है। उन्‍होंने कहा कि दुनियाभर में हिंदी जाननेवालों के लिए यह विश्‍वविद्यालय हिंदी के पठन-पाठन में आ रही दिक्‍कतों से रू-ब-रू होने के लिए वर्ष में दो बार विदेशियों के लिए अभिविन्‍यास कार्यक्रम चलाएंगे, हमारा यह भी प्रयास होगा कि हम हिंदी को सरल ढंग से सिखाने के लिए जल्‍द ही पाठ्य सामग्री भी उपलब्‍ध कराएं।

प्रतिकुलपति प्रो. ए अरविंदाक्षन ने विदेशी हिंदी शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि विश्‍वविद्यालय में जल्‍द ही विदेशी हिंदी प्रकोष्‍ठ बनेगा। उन्‍होंने विदेश से आए प्राध्‍यापकों का आह्वान करते हुए कहा कि आप अपना पाठ्यक्रम भेजें ताकि हम उसी के अनुरूप पाठ्यसामग्री बना सकें। हिंदी शिक्षण के लिए अभिविन्‍यास कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु विश्‍वविद्यालय को धन्‍यवाद देते हुए विदेशी शिक्षकों ने यहां की सांस्‍कृतिक परंपरा को सराहा। जर्मनी के डॉ. भट्ट ने कहा कि विश्‍वविद्यालय ने भारत में एक नई तरह की शुरुआत की है। अमेरिका में गौतम गंभीर भी इस तरह का कार्यक्रम चलाते हैं पर यहां का कार्यक्रम अधिक उपयोगी है। मॉरीशस के डॉ. लालबिहारी ने इस विश्‍वविद्यालय के पत्रकारिता व नाट्य अध्‍ययन विभाग में मॉरीशस के विद्यार्थियों को प्रवेश दिलाए जाने की मंशा जताई। उन्‍होंने कहा कि वहां हिंदी जानने वाले सर्वाधिक है फिर भी कोई दैनिक हिंदी समाचार पत्र न‍हीं निकल रहा है। दोनों संस्‍थानों के साथ एक संयुक्‍त प्रशिक्षण कार्यक्रम बने ताकि वहां के छात्र भी पत्रकारिता में कुछ नया कर सकें। कुलपति विभूति नारायण राय ने विदेशी हिंदी प्राध्‍यापकों को प्रमाणपत्र, स्‍मृति चिन्‍ह के रूप में गांधीजी की प्रतिमा तथा विश्‍वविद्यालय पर बनी फिल्‍म ‘नए गगन में नया सूर्य’ की सीडी प्रदान की। भाषा विद्यापीठ के अधिष्‍ठाता प्रो. उमाशंकर उपाध्‍याय ने अभिविन्‍यास कार्यक्रम का संचालन किया।

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