: कलम नई है सो कुछ गलतियाँ भी हो सकती हैं…. मज़ा ना आए तो पैसा तो वापस नही…लेकिन सॉरी… : आज किस्सा न्यूज़ रूम का… जी हां बंद गली का आखिरी मकान… पूरी गली की ख़बर यहाँ तो आ जाती है लेकिन यहाँ की खबरें कहीं नही जाती…. तो आज आपको सुनते हैं यहाँ की खबरें…. लेकिन पहले एक चेतावनी…. ये न्यूज़ रूम है मियां… अगर कलेजे में हिम्मत या फ़िर दिलेरी की कमी हो तो प्लीज ये पोस्ट आगे मत पढिये… या फ़िर पढ़ते समय याद रखियेगा इस जुमले को कि “कमजोर दिल वाले इस पोस्ट को ना पढ़ें… ये पोस्ट आपको विचलित कर सकती है…..
आप शायद यकीं ना करें कि इस तीस बाई चालीस के न्यूज़ रूम का विस्तार कई हजार किलोमीटर तक है… इसमे कई बस्तियां हैं… संकरी गलियां हैं…. टेढ़े-मेढ़े रास्ते हैं…. पहाड़ जितनी जिम्मेदारियां हैं… टूटे फूटे घर हैं तो आलिशान बंगले भी… जेब में पारकर कि पेन रखने वाले कई समझदार हैं जो सोचते हैं अच्छा लिखने कि लिए पारकर पेन कि तो बहोत ज़रूरत है…. लेकिन इन सबका अर्थ बूझना तभी मुमकिन है जब आप इसके हिस्सेहों या फ़िर न्यूज़ रूम के किसी साथी कि सोहबत में हों…..
खैर अन्दर घुसते हुए आपकी नज़र एक व्यक्ति से टकराएगी जो ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला रहा होगा…. “काटो-काटो-काटो” चौंकियेगा मत… दरअसल हम न्यूज़ वाले इस एक शब्द का इस्तेमाल कई-कई अर्थों में करते हैं…और काटना तो न्यूज़ रूम वालों कि फितरत में है… एक-दुसरे को काटना… उनकी भावनाओं को काटना…. उनकी प्रगति हो काटना…..उनके विश्वास को काटना….. तो उस शख्स के बगल वाली डेस्क यानि पहली डेस्क का नाम है असाइंमेंट डेस्क…. इस डेस्क का नाम लेते ही एक लड़की याद आती है जो अक्सर मेरे कान में आकर बोलती है ” ऊपर चल, तेरे लिए चिकेन लेके आयीं हूँ…” या फ़िर फोन पर पूछती हुई की “अभी तक शूट से लौटा नही…. तेरे लिए खीर ले के आई थी…”
ग़लत मत समझियेगा….. मैं चटोरा नही हूँ और वो भी शादी-शुदा है… लेकिन घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर उसके बनाये खाने के स्वाद में अक्सर उसकी शक्ल कभी मम्मी तो कभी बहन जैसी हो जाती है….. खैर बात असाइंमेंट डेस्क की हो रही थी …. दरअसल ये डेस्क एक भूल-भुलैया है…. टेलीफोन की तारों की….बातों की…. कागजों की….चलती-फिरती-बोलती तस्वीरों की…..और जिम्मेदारियों की भूल-भुलैया……इस डेस्क के बाशिंदे कैसे इन सब चीज़ों से आठ घंटे का वास्ता रख पते हैं ये दुनिया का नौवां आश्चर्य है…..
इस डेस्क को महज़ काल-सेंटर मत समझ लीजियेगा क्यों यहाँ सेल्स गर्ल वाली विनती या रिक्वेस्ट नही है… यहाँ से raham की गुंजाईश रखना बेकार है…. सालों-साल की पढ़ाई, टैलेंट और सारा ज्ञान किसी जुमा-जुमा आठ दिन की आई हुई लड़की के फ़ोन आते ही धरा रह जाएगा आपका….. इस डेस्क से जुडा एक किस्सा याद आ रहा है मुलाहिजा फरमाएं….
हुआ यूँ की चुनावों के मौसम में लुधियाना शहर के एक रिपोर्टर ने असाइंमेंट डेस्क को फोन कर के दरियाफ्त किया की “मैंने नरेन्द्र मोदी की रैली की फीड भेजी थी उसे चलवाई क्यों नही…. उधर बैठी एक लड़की ने पूछा की कौन नरेन्द्र मोदी…. रिपोर्टर इस जवाब से हैरान रह गया खैर उसने मजे में बोला अरे कांग्रेस के लीडर हैं नरेद्र मोदी… उधर से hadkaya गया की लिखनी चाहिए थी ना ये बात लिखा होता तो चला देते ना अब तक…
खैर वो लड़की आज-कल हमारे चैनल के एक प्रोमो में नज़र आती हैं… और बुरा मत मानियेगा अगर कल को वो हमारी बॉस बन जायें या फ़िर एंकर बन ऑन एयर पूछें की…….. ” बताइए पुलिस ने क्या-क्या ब्रा-मद किया है वहां से….”
खैर आज का किस्सा यहीं तक… कल आपको न्यूज़ रूम में आगे ले चलूँगा….. तो इन्तजार करिए और अगर आप इस न्यूज़-रूम का हिस्सा हैं तो थोड़ा डरें क्योंकि हो सकता है की अगला नंबर आपका हो….
जर्नलिस्ट जयंत चड्ढा के ब्लाग नई कलम से साभार











