25 मई 2007 में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शिकायत दर्ज करवाई थी कि मुंबई पुलिस की अपराध शाखा के दो इंस्पेक्टर जबरन वसूली और धोखाधड़ी के एक मामले की जाँच में सहयोग नही कर रहे हैं, जबकि उक्त मामले में कुख्यात अंडर वर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम कासकर की बहन हसीना पारकर मुख्य अभियुक्त थी.
इसके साथ ही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अधिकारियों ने मुंबई पुलिस की अपराध शाखा – यूनिट (1) के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक अनिल महाबोले को उनका मोबाइल जमा करने को कहा और अनिल महाबोले ने अपना दोनों मोबाइल भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अधिकारियों के सुपुर्द कर दिया लेकिन भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अधिकारियों को शक था कि इंस्पेक्टर अनिल महाबोले ने जिस मोबाइल के माध्यम से अपराधियों से सांठ गांठ की थी, वह मोबाइल उन्होंने नहीं जमा किया. इसके अलावा साल 2007 में मुंबई के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर डी.एन.जाधव को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के एक अधिकारी ने बाकायदा पत्र लिख कर अपराध शाखा यूनिट-1 के इंस्पेक्टर अनिल महाबोले और असिस्टेंस पुलिस इंस्पेक्टर राजेन्द्र निकम की जाँच कराने का अनुरोध किया था और मामला था मुंबई के अंटॉप हिल इलाके में स्थित एक संपत्ति का, जहाँ झोपड़पट्टी पुनर्वसन योजना के तहत रिडेवलपमेंट होना था और इसमें इंस्पेक्टर अनिल महाबोले और राजेन्द्र निकम की भूमिका संदिग्ध थी.
गौरतलब हो कि कुछ साल पहले मुंबई के एक बिल्डर कृष्ण मिलन शुक्ला ने एक फायनांसर विनोद प्राणलाल अवलानी को अपने एक प्रोजेक्ट में बराबरी का हिस्सेदार बनाने के लिये महज एक करोड़ रुपये लगाने का न्योता दिया. जिसके बाद फायनांसर विनोद प्राणलाल अवलानी ने डील ओके कर एक करोड़ रुपये बिल्डर कृष्ण मिलन शुक्ला को दे दिया, लेकिन बाद में कुख्यात अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम कासकर की बहन हसीना की वजह से डील रद्द हो गई और उसके बाद फायनांसर विनोद अवलानी ने अपने एक करोड़ रुपये बिल्डर कृष्ण मिलन शुक्ला से वापस मांगे. लिहाजा बिल्डर कृष्ण मिलन शुक्ला ने फायनांसर विनोद अवलानी को पैसे तो वापस किये, लेकिन एक करोड़ रुपये के बजाय महज सत्तर लाख़ रुपये. जब विनोद अवलानी को उसके पूरे पैसे वापस नहीं मिले तो उसने मुंबई पुलिस की अपराध शाखा यूनिट – 1 में लिखित शिकायत दर्ज करवाई.
दिलचस्प बात यह है कि उस समय मुंबई पुलिस की अपराध शाखा यूनिट -1 के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक थे अनिल महाबोले जिन्होंने इस केस की पड़ताल की थी. एक तरफ तो इस मामले की पुलिसिया जाँच चल रही थी तो दूसरी तरफ चंद्रेश शाह और राजू नामक दो दलाल बिल्डर कृष्ण मिलन शुक्ला से मिलते हैं और पुलिसिया मामले को निपटने के लिये दस लाख़ की मांग करते हैं और वादा भी करते हैं कि आपको इंस्पेक्टर अनिल महाबोले से कभी कोई शिकायत नही होगी, सिर्फ इंस्पेक्टर अनिल महाबोले से मोबाइल पर संपर्क में रहने की बात उन्होंने बिल्डर कृष्ण मिलन शुक्ला से की. बिल्डर कृष्ण मिलन शुक्ला ने ऊपर पैसे देने के बजाय चंद्रेश शाह और राजू को पैसे देने का मन बनाया, साथ ही उन्होंने इसकी शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से भी की. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा दर्ज प्राथमिकी रिपोर्ट में कुख्यात अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम की बहन हसीना पारकर का नाम मुख्य अभियुक्त के रूप में था. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को शक था कि कहीं हसीना पारकर और इंस्पेक्टर अनिल महाबोले की मिलीभगत से तो कृष्ण मिलन शुक्ला से पैसे नहीं मांगे जा रहे.
यही कारण था कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने इंस्पेक्टर अनिल महाबोले की शिकायत मुंबई के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर डी.एन जाधव से की. यही नही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने इंस्पेक्टर अनिल महाबोले से उनका दोनों मोबाइल फ़ोन जब्त कर लिया और उसे भी उन्होंने जाँच का हिस्सा बनाया…. (no s – 9833190851 and 9322171857) बहरहाल भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने अन्तोगत्वा इंस्पेक्टर अनिल महाबोले को उक्त मामले में क्लीन चिट दे दी थी, लेकिन आज उसी इंस्पेक्टर पर वरिष्ठ पत्रकार ज्योतिर्मय डे की हत्या में लिप्त होने का आरोप है…और अनिल महाबोले हैं कि सफाई पर सफाई दिए जा रहे हैं, खैर अब तो जो भी दूध का दूध है और पानी का पानी, वो अब सामने आ ही जायेगा, चूँकि जे डे हत्या कांड में इस्तेमाल की गयी मोटर बाइक और कार मुंबई पुलिस ने बरामद कर ली है, इसके साथ ही दो संदिग्ध मुंबई से और एक पुणे से हिरासत में लिए जा चुके हैं. महत्वपूर्ण व गौर करने वाली बात ये है कि ये तीन के तीनों आरोपी कुख्यात अंडर वर्ल्ड सरगना छोटा शकील के शूटर्स हैं…ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि क्या वरिष्ठ क्राईम जर्नलिस्ट जे डे की हत्या से बच पाएंगे इंस्पेक्टर अनिल महाबोले?
लेखक संजय मिश्रा चैनल वन में क्राइम रिपोर्टर हैं.












अमित मिश्रा
June 16, 2011 at 9:07 am
वक्त आ गया है कि हम पत्रकार बंधु पेशेवर तौर पर भले ही प्रतिस्पर्धारत रहें पर आपस में एकजुटता बना कर रहें. आज से कोई पत्रकार किसी दूसरे की निंदा नहीं करे, मिल जुलकर काम करें एक दूसरे की मदद करे. किसी की कोई क्या मज़ाल कि कोई पत्रकारों को धौंसा भी सके. कल जेडी के साथ हुआ परसो आईआईएमसी के कपिल शर्मा के साथ हुआ..आप क्या समझते हो? ठीक से रहो. आखिर हमारा भी तो कोई विशेषाधिकार है.
भारतीय नागरिक
June 16, 2011 at 4:28 pm
पुलिस ही पुलिस की जांच कैसे कर पायेगी.