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गिरफ्तारी से बचने के लिए पत्रकार अरविंद उपाध्‍याय हाई कोर्ट पहुंचे

: अरेस्‍ट स्‍टे के लिए याचिका दायर की :  वाराणसी के अमरा खैरा के जमीन घोटाले के मामले में आरोपी अमर उजाला के क्राइम रिपोर्टर अरविंद उपाध्याय और उनके साथी मिथिलेश सिंह ने गिरफ्तारी पर रोक के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है. इस अरेस्‍ट स्‍टे पर बुधवार को सुनवायी हुई.  सुनवायी के दौरान रमदेई की ओर से तीन अधिवक्ताओं ने नि:शुल्क पैरवी की. याची को रीज्वाइंडर दाखिल करने के लिए गुरुवार तक समय दिया गया. मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी.

: अरेस्‍ट स्‍टे के लिए याचिका दायर की :  वाराणसी के अमरा खैरा के जमीन घोटाले के मामले में आरोपी अमर उजाला के क्राइम रिपोर्टर अरविंद उपाध्याय और उनके साथी मिथिलेश सिंह ने गिरफ्तारी पर रोक के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है. इस अरेस्‍ट स्‍टे पर बुधवार को सुनवायी हुई.  सुनवायी के दौरान रमदेई की ओर से तीन अधिवक्ताओं ने नि:शुल्क पैरवी की. याची को रीज्वाइंडर दाखिल करने के लिए गुरुवार तक समय दिया गया. मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी.

आरोप है कि फर्जी तरीके से वाराणसी के रोहनिया थाना क्षेत्र के अमरा खैरा स्थित जमीन गाटा संख्‍या 321 को उसकी मालकिन सहदेई उर्फ समदेई की जगह मिर्जामुराद के करधना की 70 साल की दलित महिला रमदेई को खड़ा कराके और उसकी फोटो लगाकर अरविंद उपाध्‍याय और मिथिलेश सिंह ने अपने पक्ष में रजिस्‍ट्री करा ली थी. इस मामले का खुलासा होने के बाद रमदेई की शिकायत पर बीते 8 जून को दोनों खरीदारों समेत कुछ अन्‍य लोगों पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया था.

इस मामले में सीजेएम कोर्ट वाराणसी से अरविंद उपाध्‍याय और मिथिलेश सिंह के गैर जमानती वारंट जारी हो चुका है, परन्‍तु पुलिस अब तक दोनों को गिरफ्तार नहीं कर सकी है. गिरफ्तारी से बचने के लिए ही दोनों आरोपियों ने हाई कोर्ट में अरेस्‍ट स्‍टे के लिए याचिका लगाया है. इन दोनों लोगों की तरफ से अधिवक्‍ता रवि सिन्‍हा ने हाईकोर्ट के 42 नम्‍बर कोर्ट में जज विनीत शरण और सुरेंद्र सिंह की अदालत में याचिका दायर किया. इसमें कहा गया कि याचियों की तरफ से कोई धांधली या कूटरचना नहीं की गई है. यही नहीं जमीन खरीद में गड़बड़ी की जानकारी होने के बाद ही याची अरविंद उपाध्‍याय की तरफ से 26 अगस्‍त 2010 को डीआईजी के यहां प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई का निवेदन किया गया था.

कोर्ट को जानकारी देते हुए याची के अधिवक्‍ता ने बताया कि इसके बाद पुलिस ने सहदेई उर्फ समदेई व अन्य लोगों के खिलाफ भादंवि. की धारा 419, 420, मुकदमा (428/ 2010) दर्ज किया. जिसकी जांच अभी चल रही है.  इस घटना से हतप्रभ याचियों ने रजिस्ट्री रद करने के लिए सहदेई की ओर से सिविल जज (जूनियर डिविजन) की अदालत में दाखिल वाद में अपनी ओर से लिखित अनापत्ति भी दाखिल कर दिया है.  इसके बावजूद पत्रकार धर्म निभाकर कुछ लोगों की पोल खोलने की वजह से नाराज तथा चिढ़े हुए माफिया टाइप लोग उन्‍हें साजिशन फंसा रहे हैं.

अरविंद उपाध्‍याय के अधिवक्‍ता रवि सिन्‍हा के इस दलील पर रमदेई की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं राकेश धर दुबे, पारितोष शुक्ला, राजेश कुमार ओझा ने काउंटर एफिडेविट दाखिल कर एतराज दर्ज कराया. तीनों अधिवक्‍तओं ने कहा कि अपनी जमीन धोखे से लिखा लिये जाने की जानकारी मिलने पर सहदेई ने 6 अगस्त को डीआईजी को प्रार्थनापत्र देकर कार्रवाई का आग्रह किया था. इसके बाद आरोपी सक्रिय हो गए.  जिससे याचियों के प्रभाव में आकर तत्कालीन चौकी प्रभारी ने फर्जी रिपोर्ट दे दी.  प्रार्थनापत्र सहदेई का था लेकिन इस पर अरविंद उपाध्याय की ओर से दर्ज करायी गयी रिपोर्ट का ब्योरा दे दिया गया.

अधिवक्‍ताओं ने कहा कि इस जमीन की कीमत लाखों में है परन्‍तु इसे बिना एक पैसे का भुगतान किए ले लिया गया. इसकी जानकारी रमदेई के पासबुक से भी की जा सकती है. पासबुक से स्‍पष्‍ट हो जाएगा कि इस जमीन के लिए रमदेई को एक पैसा नहीं मिला है. रजिस्‍ट्री में भी गड़बड़ी की गई है, जिसका खुलासा प्रशासनिक जांच में भी हो चुका है. एसडीएम की रिपोर्ट पर ही अरविंद उपाध्‍याय तथा मिथिलेश सिंह का नाम खतौनी से काट दिया गया है. इस मामले में स्‍टाम्‍प चोरी भी पकड़ी गई है.

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0 Comments

  1. prashant tripathi rashtriya sahara

    July 9, 2011 at 4:01 am

    arvind uphadhya ke eak pre plan way me fasaya ga raha hai jisme sehar ke kuch safedposh/mafiya ka hath hai. mai media ke logo se ye reqest karunga ke ye samay apsi matbhed niptane ka nahi hai . ye samay eakjut hoker unki madad karne ka hai..mera yeh manana hai ke virodh ka star itna niche n aa jaye ke hum aane wale kal me eak dusre ka samna karne me sarm mehsus kare.prashant tripathi …rashtriya sahara .varanasi

  2. Nitesh Mishra

    July 9, 2011 at 1:18 pm

    वैसे अरविन्द भाई का जितना इतिहास मैं जानता हूं… उससे ऐसा तो नहीं लगता कि वो इस प्रकार का कोई काम कर सकते हैं.. बाकी तो परिवर्तन से इनकार भी नहीं किया जा सकता.

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