: अजब-गजब लखनवी पत्रकार : प्रेस-कांफ्रेंस में पहले से ही तय हो जाते हैं पूछे जाने वाले सवाल : बाद में जुटती है अफसरों से अपना काम साधने की कवायद : ज्यादातर अफसर वहां मीठे बनते हैं, बाद में दिखाते हैं ठेंगा : कई पत्रकार तो ऐसे जुटते हैं, जिनका धंधा ही होता है दीगर : गुटों में बंटे पत्रकार एक-दूसरे की मां-बहन तक पर उतारू : लखनऊ: यूपी में बसपा सरकार की मुखिया मायावती की प्रेस कांफ्रेंस में पत्रकारों के पैंट-खोलू रवैये का जायजा लेना हो तो पेश हैं कुछ नजीरें।
यहां पत्रकारों द्वारा पूछे जाने वाले सवालों से आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि आखिर यहां पहुंचने वाले दिग्गज पत्रकारों का असली धंधा क्या है। कहने की जरूरत नहीं कि मायावती की प्रेस-कांफ्रेंस में ऐसे सवालों को पूछने से पहले ऐसे पत्रकार मायावती के चरण-चाटू अफसरों के कमरे में बैठकी लगाकर लम्बा होमवर्क करते हैं। ऐसे में जाहिर है कि असल सवाल तो दम तोड़ देता है, क्योंकि मायावती की प्रेस कांफ्रेंस में सवालों का जवाब ही पूछा जाता है। तो आइये, देखिये कि ऐसे सवाल पूछले वाले इन पत्रकारों की करतूतें।
सवाल: बहन जी। आपकी सरकार पर विपक्ष लगातार हावी होता जा रहा है। क्या कारण है।
जवाब: मीडिया बंधुओं। आपने बहुत सही बात कही है। देखिये, हमारी सरकार आम आदमी यानी सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय की नीति पर विश्वास करती है। इसमें हमारी सरकार किसी भी तरह की कोताही नहीं करती है, जबकि पूर्ववती सरकारें लगातार इस प्रदेश का सौहार्द बिगाड़ने में लगी थीं। हमारी बसपा सरकार की नीतियों के चलते प्रदेश में एक सुनहरा माहौल बना है जहां हर एक को न्याय मिल रहा है, हर व्यक्ति खुश और प्रसन्न है। हम दलितों और वंचितों की सुरक्षा के लिए हर जरूरी प्रयास कर रहे हैं। लेकिन हमारी इन कोशिशों को सपा, कांग्रेस और भाजपा के लोग सहन नहीं कर पा रहे हैं, इसीलिए इस तरह हमारी सरकार को घेरने की ओछी हरकतें हो रही हैं।
सवाल: मैडम, इंजीनियरों की सुरक्षा के लिए गनवाले पुलिसवालों की मांग बहुत पहले से चली आ रही है। आप क्या इस बारे में कोई फैसला करेंगी।
जवाब: मीडिया बंधुओं। आपने बहुत अच्छा सवाल पूछा है। हां, यह सही है कि इंजीनियरों पर आपराधिक हमले बहुजन समाज पार्टी की सरकार से पहले की सरकारों के कार्यकाल में सर्वाधिक हुए हैं और इसीलिए इंजीनियर समुदाय अपनी सुरक्षा के लिए तब की सरकारों से अपनी सुरक्षा के लिए सुरक्षाकर्मियों की मांग लगातार करता रहा है। हां, बसपा की सरकार ने इंजीनियरों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाये हैं और अफसरों को कड़े निर्देश दिये गये हैं कि इंजीनियरों की सुरक्षा में किसी भी तरह की लापरवाही सहन नहीं की जाएगी। इसी का परिणाम है कि हमारी सरकार में इंजीनियर पहले के मुकाबले बहुत सुरक्षित हैं। लेकिन इसके बावजूद अगर किसी को जरूरत होगी तो इस पर ध्यान दिया जाएगा।
सवाल: मैडम, प्रदेश सरकार की सफलताओं पर भी कुछ कहना चाहेंगी आप।
जवाब: जी हां, मीडिया बंधुओं। हमारी सरकार अब तक की सबसे लोकप्रिय सरकार है, लेकिन विरोधी पार्टियां लगातार……
सवाल: मैडम। कुछ चंद इलाकों में हो रहे किसानों के आंदोलन की आड़ में कौन-कौन लोग हैं आपकी सरकार के खिलाफ।
जवाब: बहुत अच्छा सवाल किया है आपने। किसानों के आंदोलन के नाम पर सरकार को बदनाम करने की साजिशें विपक्षी पार्टियों के लोग कुछ भूमि माफियाओं के साथ मिल कर रची जा रही हैं……
सवाल: प्रदेश में हो रही बलात्कार की घटनाओं के पीछे कौन लोग हैं।
जवाब: मीडिया बंधुओं। जैसा कि आप सब लोगों को विदित है कि हमारी सरकार कानून-व्यवस्था को लेकर बहुत सतर्क है और खासकर दलितों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए सारी कोशिशें की जा रही हैं। लेकिन इसके बावजूद विरोधी दलों के लोग गुंडों और माफियाओं के साथ मिल कर सरकार के खिलाफ षडयंत्र रच रहे हैं। ज्यादातर मामलों में सचाई को अनदेखा करके विपक्षी दलों ने सरकार पर धावा बोलने की साजिशें की, लेकिन सचाई सामने आने पर भी वे चुप बैठने के बजाय अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं।
सवाल: मैडम, क्या आप अपने अधिकारियों से कहेंगी कि वे पत्रकारों के साथ बातचीत करते रहें।
जवाब: मीडिया बंधुओं। आपने बहुत सही कहा है। मैं अपने अधिकारियों से कहूंगी कि वे पत्रकारों से मिलते रहें।
वगैरह-वगैरह
वगैरह-वगैरह!
मगर इस वगैरह-वगैरह के बाद से ही तो शुरू होती हैं कुछ पत्रकारनुमा दलालों की दुकानदारी।
तो सवाल यह है कि ऐसे पत्रकार अपनी कलई खुलने को कैसे सहन कर लें। कहने की जरूरत नहीं कि जब एक बार मुख्यमंत्री मायावती की प्रेस कांफ्रेंस पर ऐसे ही सवालों पर एक पत्रकार पर कुछ लोगों ने टिप्पणी कर दी तो वह पत्रकार खुलेआम पत्रकारों की मां-बहन तक करने पर आमादा हो गये। बोले कि जो साला मादर…. दलाल होता है, वह ही दूसरों को दलाल समझता है।













najeeb khan
June 28, 2011 at 6:05 am
seeing above if is true and must be written by such a senior journalist.if it will happen it will create understanding among readers and viewers that such press conferences are of no use.only people believe in media thinking as neutral.but then also understands that the particular paper or channel is favoring to whom.is there no control on journalists like bar councils who can take action.
Krishna Murari Pandey, Siwan. 09431448840
June 28, 2011 at 6:36 pm
Sabhi Jagah yahi hal hai, 70:30 ka anupat hai… chaplooso ko Bhinga-Bhinga Ke Latiyaaye. we Aukat me rahenge