दरभंगा के ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार वीसी आवास के बाहर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को कवर करने वाले पत्रकारों से भिड़ गए. उन्हें वहां से भाग जाने को कहा, असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया और एक कैमरामैन पर हमला कर दिया. उन्होंने पुलिस से भी पत्रकारों को भगाने के लिए कह डाला. लेकिन मीडियाकर्मी कवरेज करने के बाद ही गए.
पिछले एक सप्ताह से दरभंगा विश्वविद्यालय के हास्टल में पीने के पानी की समस्या चल रही थी. छात्र कई बार विश्वविद्यालय के संबंधित अधिकारियों से शिकायत कर चुके थे लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. इससे नाराज छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर वीसी आवास के सामने पहुंच गए और प्रदर्शन करने लगे. इसकी सूचना मिलने पर कई मीडियाकर्मी मौके पर पहुंच गए. प्रदर्शन की सूचना पर पुलिस भी वहां पहुंच गई.

इधर, जब प्रदर्शन की जानकारी मिली तो विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार भी मौके पर पहुंच गए. वहां मीडियाकर्मियों को देखते ही भड़क गए. सभी से तत्काल कैमरा बंद करके तत्काल वहां से निकल जाने को कहा. मीडियाकर्मियों ने जब उनसे कहा कि वे अपना काम कर रहे हैं तो उन्होंने अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया तथा एक कैमरामैन पर हमला बोल दिया. इसके बावजूद मीडियाकर्मी कवरेज करते रहे.












ABHISHEK
April 23, 2011 at 6:51 pm
[b]चोर-डकैतों के चंगुल में है …………….”ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय”| [/b] 😮
prahalad kumar [kilu], darbhanga
April 25, 2011 at 5:43 am
कहते है तस्वीरे झूठ नहीं बोलती और जो तस्वीर यहाँ बोल रही है उससे साफ़ लगता है की रजिस्टार बनाने से पहले ये जनाब किसी छुट भैये गैंग में रहे होगे और हफ्ता वसूली का काम किया करते होंगे | खामियों को बताना और दिखाना पत्रकार का फ़र्ज़ और कर्तव्य है तो इन जैसे अधिकारिओ का काम है उन खामियों को छिपाना है | जब पत्रकार इनका असली चेहरा दिखाते है तो ऐसे लोग यू ही झल्लाते है | उन्हें पत्रकार किसी आतंकवादी से कम नहीं लगता तभी तो वे प्रेस के लोगो से ऐसा वर्ताव करते है | हमारी नजरो में ऐसे अधिकारी तो आतंकवाद से भी ज्यादा खतरनाक है जो छोटी – मोटी खामियों को समय रहते दूर करने के बजाय उसे छिपाने में विस्वाश करते है अन्दर ही अन्दर ये खामिया एक दिन बहुत बड़ी हो कर विषाक्त हो जाती है जिसे बाद में संभालना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन हो जाता है जो हमारे सामाज और देश के लिए खतरे की घंटी है | ऐसे अधिकारिओ को तुरंत ही पदमुक्त कर किसी अस्पताल में उनके दिमाग के इलाज़ के लिए भेज देना चाहिए | या फिर इनके भी आवास के पानी की सप्लाई को बंद कर देना चाहिए ताकि आन्दोलन पर विवस हुए छात्रो की पीड़ा को नजदीक से समझ सके |