यशवंत जी, मैं आगरा का एक जागरूक पाठक हूं. दैनिक जागरण के आगरा एडिशन में एक खबर छपी है जिसका शीर्षक है ‘हनीमून पर जा रहे थे ट्रेन से फेंके दंपती!‘ इस खबर को देखा तो सुबह से ही उद्वेलित था कि सही शब्द क्या है दंपति या दंपती, जागरण को फोन किया तो वहां समाचार संपादक जी से बात कराई गई. उनसे जब सही शब्द जानना चाहा तो उन्होंने ढंग से बात नहीं की.
अखबार बच्चों तथा तमाम लोगों को सही और शुद्ध हिंदी सिखाते हैं, पर जागरण जैसे नम्बर एक अखबार में इतनी भीषण भाषात्मक त्रुटि। जब समाचार संपादक महोदय ने ढंग से बात नहीं की तो मन मसोस कर रहा गया. तभी एक मित्र ने बताया कि आपसे चर्चा करूं. तब इस गलती की तरफ लोगों का ध्यान आकृष्ट होगा. सही समझें तो इस गलती को अपनी वेबसाइट पर इंगित करें.
डा. देवेंद्र शर्मा
प्रवक्ता, देव एजूकेशनल इंस्टीट्यूट
बरहन, आगरा













Anil Pande
July 19, 2011 at 9:47 am
“दम्पति” सही और शुद्ध है.
ek patrkar
July 19, 2011 at 10:56 am
3,000 me etana hi milega
mintu swami
July 19, 2011 at 11:50 am
baat 3000 ya 30,000 wali nhi hoti bat to galti wali h or sahi sabd दम्पत्ति hai
raj bharat
July 19, 2011 at 12:14 pm
श्रीमान जी उद्वेलित होने की बात भी नहीं है और इस बात के लिए अखबार के संपादक को परेद्गाान की जरूरत भी नहीं है। जागरण का लिखा शब्द सही है, हिंदी की मानक डिक्द्गानरी उठाकर देखी जा सकती थी। संस्कृत में दंपती को द्विवचन मानकर व्यवहार किया जाता है इसलिए मात्रा बड़ी आएगी। कई हिंदी वाले इसे बहुवचन मानकर दम्पति का प्रयोग करते हैं।
धीरज
July 19, 2011 at 12:16 pm
न दंपती सही है और न दंपति.. दरअसल सही शब्द है दम्पत्ति। आजकल अनुश्वार के प्रयोग का प्रचलन बढ़ जाने से इसे दंपत्ति भी लिखा जा सकता है, लेकिन यह तर्क बिल्कुल बेकार है कि जागरण जैसे अखबार बच्चों को शुद्ध हिंदी लिखना सिखाएंगे। मेरी मानें तो ऐसे अखबार बच्चों को न पढ़ने दें शर्मा जी, नहीं तो बच्चे दलाली के अलावा कुछ नहीं सीख पाएंगे।
धीरज भारद्वाज
July 19, 2011 at 1:54 pm
न दंपती सही है और न दंपति.. दरअसल सही शब्द है दम्पति। आजकल अनुश्वार के प्रयोग का प्रचलन बढ़ जाने से इसे दंपति भी लिखा जा सकता है, लेकिन यह तर्क बिल्कुल बेकार है कि जागरण जैसे अखबार बच्चों को शुद्ध हिंदी लिखना सिखाएंगे। मेरी मानें तो ऐसे अखबार बच्चों को न पढ़ने दें शर्मा जी, नहीं तो बच्चे दलाली के अलावा कुछ नहीं सीख पाएंगे।
dhiraj kumar gupta. varanasi
July 19, 2011 at 5:30 pm
dhiraj ji. sharma ji ne bhasa ke bare me baat kar rahe the aur aapne unhe dalaali ke baare me bata rahe hai. midia me dalaali ki baat kar ke aap ya to rajnetaao ki tarah is mudde se hatna chah rahe hai. ya aap khud hi is tarah ke dallali me samil hai jo midia ko gumrah karte hai. apne samaajik sarokar ko samjhiye kyoki bhasa hi kisi samaaj ka aaina hota hai.
KUMAR KALPIT
July 19, 2011 at 10:19 pm
devendra ji aapko wishvash hai jagran wale batayenge. ye uchch koti ke chotte hai. beshrmee ki itne moti khal odhi hai. inpar koi ashr nahee padne wala hai. CBI me ye bdi “E” ki matra lagatee hai to helo ko hailoo likhte hai. yi akele nahee sab akhbar ki maima niralee hai. koi kuch likh raha hai to koi kuch.inhee ka ek sanskarn kuch likhta hai to koi kuch.
niranjan thakur
July 29, 2011 at 10:46 am
बिल्कुल. “दम्पति” सही और शुद्ध है.