दैनिक जागरण की हिमाचल प्रदेश में लांचिंग टीम का हिस्सा रहे अरुण डोगरा को दैनिक जागरण ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है। अरुण डोगरा दैनिक जागरण के जिला बिलासपुर ब्यूरो प्रभारी के तौर पर लंबे अर्से से अपनी सेवाएं दे रहे थे और उन्हें मुख्य संवाददाता पदनाम दिया गया था। हिमाचल संस्करण के संपादकीय प्रभारी नवनीत शर्मा की सिफारिश पर दैनिक जागरण के मुख्य महाप्रबंधक निशिकांत ठाकुर ने अरूण डोगरा की संस्थान से विदाई पर मुहर लगा दी है।
उनकी जगह राजेश्वर ठाकुर को बिलासपुर जिला प्रभारी की जिम्मेवारी सौंपी गई है। राजेश्वर ठाकुर की गिनती भी जागरण के प्रताडि़तों में होती आई है। अमर उजाला बिलासुपर से अपनी पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले राजेश्वर ठाकुर को करीब चार साल पहले चंबा जिला का ब्यूरो प्रभारी बनाया गया था, लेकिन विवादों में घिरने के बाद उन्हें जिला प्रभारी के कार्यभार से मुक्त कर उपमंडल स्तर पर पालमपुर में स्टाफ रिपोर्टर तैनात किया गया था। कुछ ही समय पहले अरूण डोगरा के पर काटने के मकसद से ही राजेश्वर ठाकुर को बिलासुपर के घुमारवीं उपमंडल की कमान सौंपी गई थी। अरुण डोगरा की विदाई के बाद पूरे बिलासपुर जिला की कमान राजेश्वर ठाकुर के हाथ आ गई है।
संभावनाएं जताई जा रही हैं कि अरुण डोगरा हाल कांगड़ा से शुरू हुए एक दैनिक समाचार पत्र दिव्य टुडे का हिस्सा बन सकते हैं या फिर अपने संपादन में ही किसी पत्रिका का संचालन शुरू कर सकते हैं। उनकी विदाई का कारण भी एक पत्रिका ही बताई जा रही है, जिसका वह संपादन करते हैं। इस संदर्भ में जानकारी के लिए जब अरुण से बात करने की कोशिश की गई तो उनका मोबाइल स्वीच ऑफ बताता रहा।












Vinay Kumar
June 21, 2011 at 4:03 am
Himachal Mey Jagran mey “NIKKAMO” Ki fouj hai. Kuch too wo be hai jo bina kaamk Pay ley rahey hai. In mey jayadaa too asey hai jinkoo ager Transfer kiya jayey too woo bilkul he fail ho jayey gey. asey logo ney Himachal mey Jagran ki halt patli kar di hai.
Sharma
June 25, 2011 at 1:57 pm
Jagran ho ya Amar Ujala Patarkaron ka hall yahi hai fuck and forget
dev
June 29, 2011 at 2:19 pm
Vinay Ji ap ki baat mey 100 % dum hai.
aditya
June 30, 2011 at 2:45 pm
samachar ptron ko sirf paisa chahiye. patarkaar kaise kaam karte hain, kaise sasthan k liye paisa ikthha karte hain isse unka koi saokaar nahi hai. unhe to sirf paisa chahiye patarkaaron ki chahe fati rahe aur unhe usi fati hui halat main kaam pura hone par bahar ka rasta bhi dikha diya jata hai. Arun dogra k sath bhi yahi huaa hai.