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जी न्‍यूज ने होली पर भी नहीं किया स्ट्रिंगरों का भुगतान

जी न्यूज़ यूपी-उत्तराखंड के लोगों को एक सलाह कि क्या जरूरत है यूपी के अलग चैनल की? जब जी नेशनल की ही खबर चलानी है.  दुनिया का शौर्य अवार्ड बाँट रहे हो, जरा अपने स्ट्रिंगरों से पूछो होली में 2 साल के भुगतान का इंतजार निराशा के साथ खत्म हुआ तो उन पर क्या बीती? उनके परिवार पर क्या बीती? तुम्हारे चैनल से लाख गुना ईटीवी बेहतर है, कम से कम प्रतिमाह भुगतान तो कर रहा है. ठेठ यूपी की खबरें चला तो रहा है. उसकी खबरों का असर तो हो रहा है. कम से कम पत्रकारिता के मकसद में कामयाब तो है. आप का तो वही हाल है नाम बड़े और दर्शन छोटे.

जी न्यूज़ यूपी-उत्तराखंड के लोगों को एक सलाह कि क्या जरूरत है यूपी के अलग चैनल की? जब जी नेशनल की ही खबर चलानी है.  दुनिया का शौर्य अवार्ड बाँट रहे हो, जरा अपने स्ट्रिंगरों से पूछो होली में 2 साल के भुगतान का इंतजार निराशा के साथ खत्म हुआ तो उन पर क्या बीती? उनके परिवार पर क्या बीती? तुम्हारे चैनल से लाख गुना ईटीवी बेहतर है, कम से कम प्रतिमाह भुगतान तो कर रहा है. ठेठ यूपी की खबरें चला तो रहा है. उसकी खबरों का असर तो हो रहा है. कम से कम पत्रकारिता के मकसद में कामयाब तो है. आप का तो वही हाल है नाम बड़े और दर्शन छोटे.

देश की सरकार से लेकर दुनिया को ज़रा सोचिये की नसीहत देकर दंभ का डंका पीटने वाले जी न्यूज़ के दुकानदारों, आप खुद जरा सोचिये कि आप के लिए काम करने वाले लोगों का क्या हश्र आप कर रहे हैं? अगर आप एक चैनल के पत्रकारों का भुगतान नहीं कर पा रहे तो आप से किसी ने धड़ाधड़ चैनल खोलने के लिए तो कहा नहीं हैं. अब खबर है कि आप का बेईमान प्रबंधतंत्र जी सलाम उर्दू  को पूरी तरीके से बाजार में ला रहा है. शोषण के प्रतीक बन चुके जी के मालिकों रोज सौ-दो सौ करोड़ में नया चैनल खोल कर पत्रकारों का पैसा मारते हुए तुम्‍हें जरा भी हिचक नहीं होती. सारी फिलासफी सिर्फ अपने फायदे के लिए है. जहाँ मौका लगा गरीब स्ट्रिंगरों का पैसा मरने में बाज नहीं आते. अच्छा होता जी के मालिक कोई और धंधा कर लेते तो कम से कम उन को सैकड़ों पत्रकारों और उन के बाल बच्चों और माँ-पिता के हाथ से रोटी छीनने के अपयश और आरोप तो न लगता.

यूपी के लिए क्या कहूं, बासिंद मिश्र जी को सब पता है लेकिन क्या करना जब अपनी फंसेगी तब देखी जाएगी. सच कहूं बासिंद जी आप स्वार्थी और अहंकार में डूबे हुए हैं, लेकिन एक बात याद रखियेगा मीडिया बहुत छोटी जगह है और कभी न कभी ऊंट पहाड़ के नीचे जरूर आएगा. अगर आज आप को दर्द नहीं है तो (जाहिर सी बात है कि आप के अन्दर का पत्रकार अब दम तोड़ चुका है) अब मैनेजरी करिए और मलाई काटिए. खूब जल्दी तरक्की करिए लेकिन याद रखिएगा हर उगे हुए सूरज को अस्तांचल की ओर जाना ही पड़ता है. और आप जैसे जान-बूझ कर गरीब पत्रकारों का पेट काटने वालों का अस्त कैसा होगा इसका अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है. ये उन संवाददाताओं की आत्मा से निकली आवाज है, जिनको आप लोगों ने अंधेरे में रखा है.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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0 Comments

  1. santosh

    March 29, 2011 at 5:49 pm

    zee NEWS AKELA AISA NAHI KIYA ==NEWS24 NE TO PICHHLE EK SAAL SE KISI KO BIHAR ME PAISA NAHI DIYA .SIRF BILL MANGAYA JATA HAI.OR BHUGTAAN NAHI.SANJEET SANTOSH,BIHAR

  2. zee up employee

    March 31, 2011 at 6:59 pm

    zee jaise network me agar employee ka shoshan hoga to andaza lagya ja skta hai chhote channels me kya hota hoga…zee news national ke halat desk aur field level me to kuch had tak thik bhi hai but zee up ke to bhut bure halat hai…zee up ke zanzal me fanskar desk aur field ke log bhut pareshan hai …zee up ke big boss ke bare me jitna kha jaye utna kam hai…vo to sirf kam krne walo ko nishana bnate hai aur chaplusi krne valo ka increment karvate hai…shayad isiliye unlogo ne zee up ka sath chhon diya jo zee up ke launching time se jude the….umesh chaturvedi, abhay upadhyay, tanuj khanna, Harkesh, Arunesh, Rohit, Digvijay, Vikas awana, Brajesh Chaturvedi…jaise aneko nam hai jinho zee up me zyadti bardasht nhi ki aur ye log bahar ho gye ya kar diye gye vahi Ranjna, Pragti, Niharika jaisi kai kanyaye kaun se kam ke balbute shandar pramotion aur increment pa rhi hai…ye zee up ke kisi bhi employee se off the record pata kiya ja skta hai…keval nyi ladkiya join kar rhi hai aur purane ladke nikale ja rhe hai…ye sab zee mgmt ko nhi dikhta…aakhir zee mgmt kab zee up ke halat sudharega….

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