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दुख-दर्द

जुझारू पत्रकार केडी पाण्‍डेय का निधन, पत्रकारों ने शोक सभा तक आयोजित नहीं की

गोरखपुर : जुझारु पत्रकार एवं रेलकर्मी केडी पाण्‍डेय का 28 सितम्‍बर को वाराणसी में कैंसर से निधन हो गया. श्री पाण्‍डेय अपने इलाज के लिए सपरिवार कैंसर रिसर्च इंस्‍टीट्यूट वाराणसी गए थे. 48 वर्षीय श्री पाण्‍डेय अपने पीछे पत्‍नी दो पुत्र और दो पुत्रियों को छोड़ गए हैं. वे सच्ची कहानियां, मनोहर कहानियां व नूतन कहानियों में पिछले तीस वर्षों से लगातार शिवम-शनि के नाम से लिखते रहे.

गोरखपुर : जुझारु पत्रकार एवं रेलकर्मी केडी पाण्‍डेय का 28 सितम्‍बर को वाराणसी में कैंसर से निधन हो गया. श्री पाण्‍डेय अपने इलाज के लिए सपरिवार कैंसर रिसर्च इंस्‍टीट्यूट वाराणसी गए थे. 48 वर्षीय श्री पाण्‍डेय अपने पीछे पत्‍नी दो पुत्र और दो पुत्रियों को छोड़ गए हैं. वे सच्ची कहानियां, मनोहर कहानियां व नूतन कहानियों में पिछले तीस वर्षों से लगातार शिवम-शनि के नाम से लिखते रहे.

दुखद यह कि गोरखपुर प्रेस क्‍लब जो तथाकथित पत्रकारों के हितों का संरक्षण होने का दावा करता है, उसने भी कोई शोक सभा तक आयोजित नहीं की और न तो प्रेस क्‍लब के अध्‍यक्ष व महामंत्री ने इस विषय में कोई जानकारी लेने का प्रयास किया. अपने जुझारू तेवर के कारण ही श्री पाण्‍डेय गोरखपुर के माफिया व ठेकेदार पत्रकारों के खिलाफ कई बार कलम चलाई थी. इसका परिणाम यह रहा कि गोरखपुर के माफिया पत्रकारों के भय से कोई भी पत्रकार श्री पाण्‍डेय के दाह-संस्‍कार में नहीं गया. पूर्वांचल का सबसे लोकप्रिय अखबार दैनिक जागरण ने तो श्री पाण्‍डेय के निधन तक की खबर नहीं छापी. इसका कारण श्री पाण्‍डेय ने अभी एक वर्ष पूर्व ही ‘गोरखपुर के पत्रकारों में कहां है एक’ शीर्षक से सच्‍ची कहानियां में चार पेज की एक स्‍टोरी लिखी थी.

उस स्‍टोरी में दैनिक जागरण के गोरखपुर के संपादक एवं प्रबंधक शैलेन्‍द्र मणि त्रिपाठी के खिलाफ उन्‍होंने बताया था कि मात्र कुछ ही वर्षों में उन्‍होंने कैस करोड़ों रुपये की सम्‍पत्ति इकट्ठा कर ली. इस स्‍टोरी से जागरण ग्रुप बुरी तरह क्षुब्‍ध चल रहा था. यही नहीं इस स्‍टोरी में उन्‍होंने राष्‍ट्रीय सहारा, गोरखपुर के प्रबंधक पीयूष बंका के खिलाफ भी कलम चलाई थी, जिससे गोरखपुर के कई पत्रकारों ने श्री पाण्‍डेय को जान से मारने की धमकी भी दी थी. बावजूद इसके श्री पाण्‍डेय ने कहा था कि वह शीघ्र ही दूसरी किस्‍त लिखने वाले हैं. इसके लिए कई पत्रकारों के बिजनेस व व्‍यवसाय के फोटो आदि इकट्ठा किया था, लेकिन होनी को कौन टाल सकता है.

गोरखपुर में रेलवे के खिलाफ कोई भी अखबार आज निगेटिव खबर नहीं प्रकाशित करता है, लेकिन श्री पाण्‍डेय जब तक रेलवे की सेवा में नहीं रहे रेलवे के खिलाफ लिखते रहे. श्री पाण्‍डेय को अपने पिता के मौत के बाद रेलवे में नौकरी मिल गई थी, लेकिन उन्‍होंने लिखना नहीं छोड़ा. भारतीय रेलवे जब देश भर में मात्र सात जोनों में विभक्‍त था, उस समय पूर्वोत्‍तर रेलवे, गोरखपुर के महाप्रबंधक, कार्मिक प्रबंधक, मुख्‍य जनसम्‍पर्क अधिकारी समेत रेलवे के पांच वरिष्‍ठतम अधिकारियों के खिलाफ गोरखपुर के कैंट थाने में नामजद एफआईआर दर्ज कराया था. इससे पूरे रेलवे में हड़कम्‍प मच गया था. लगभग तीस वर्ष को होने को हैं, उसके बाद कोई दूसरा व्‍यक्ति पूर्वांचल में नहीं पैदा हुआ, जो रेलवे के इतने बड़े अधिकारियों के खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज करा सका हो. श्री पाण्‍डेय के निधन से गोरखपुर के कई माफिया और व्‍यवसायिक पत्रकारों में दुख के बजाय हर्ष है, क्‍योंकि उन्‍हें भय था कि केडी फिर कुछ लिखेगा.

गोरखपुर के एक पत्रकार का दावा है कि जब वह प्रेस क्‍लब में केडी पाण्‍डेय के निधन की खबर देने पहुंचे तो वहां कई पत्रकार मतदाता सूची ठीक‍ कराने में जुटे थे. उन्‍होंने पाण्‍डेय के निधन का तो संज्ञान ही नहीं लिया. हद तो तब हो गई जब केडी पाण्‍डेय के सबसे नजदीकी रहे वरिष्‍ठ पत्रकार हर्षवर्धन शाही, दीप्‍त भानु डे, प्रेस क्‍लब के पूर्व अध्‍यक्ष अरविन्‍द शुक्‍ल, अशोक अज्ञात और रत्‍नाकर सिंह जैसे लोग हाल चाल लेने नहीं गए.

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0 Comments

  1. Shuresh singh

    October 1, 2011 at 5:33 pm

    01 oct 11
    Shuresh shingh.
    Lucknow.
    Shame,shame……………………………………………………………………

  2. fazal imam mallick

    October 2, 2011 at 6:26 pm

    yashwant bhai
    ab sanwednayein kahin khoti ja rahi hai. Pandey Ji agar kahin ke sampadak hote ya koyee giroh chalate to zarur unhe yaad kiya jata lekin Pandey Ji dusron se alag the isliye log unse alag hi rahe. yeh aaj ki patrkarita ki hi nahi jeevan ki bhi vidambna hai. Unhe mera naman.

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