धरने पर बैठे लोगों ने महाराष्ट्र के पत्रकारों का पूरी तरह से समर्थन किया है। धरनारत पत्रकारों ने कहा कि जेडे की जघन्य हत्या से पत्रकारों का मनोबल टूटा है। ज्ञात रहे कि उत्तराखण्ड के पौड़ी में ऐसी ही हालात में 25 मार्च 1988 को पत्रकार उमेश डोभाल की हत्या कर दी गई थी। इस पर देश भर के पत्रकारों ने आवाज उठाई व कई स्थानों पर प्रदर्शन किये। निष्पक्ष जांच के लिये एक लम्बा आन्दोलन चला और अन्त में सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका के बाद सरकार ने इसमें सीबीआई जांच की अनुशंसा की।
दूसरी तरफ देहरादून के पत्रकार भी जेडे की हत्या का विरोध किया। यहां भी इलेक्ट्रानिक तथा प्रिंट मीडिया के पत्रकारों का एक एक दल जिलाधिकारी से मिलकर राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में जेडे की हत्या की सीबीआई जांच एवं पत्रकारों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा नीति तैयार करने की मांग की गई। पत्रकारों ने शाम को कैंडल मार्च भी किया। इस दौरान पत्रकार अनिल सिंह राणा, रॉबिन सिंह चौहान, चंद्रबल्लभ, चंदन झा, आरिफ, मोहम्मद रजा, राकेश खण्डूडी सहित कई पत्रकार मौजूद रहे।











Pt Chanderballabh
June 16, 2011 at 3:50 am
कलम के वजूद पर कातिलों का पहरा है
लोकतंत्र है मगर शिनाख्त नही होती
सोचिये कितनी दमदार है कलम
मुकाबला करती है तो संगीनो से करती है
बहरहाल सुरक्षा नीति बननी चाहिये । ताकि सच बेखौंफ जिंदा रहे