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दुख-दर्द

जेडे के हत्‍यारों की गिरफ्तारी के लिए पूरे देश में प्रदर्शन

गोरखपुर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के सभागार में मिड डे के पत्रकार ज्योतिर्मय डे की नृशंस हत्या के विरोध में दो मिनट का मौन रख कर पत्रकारों ने श्री डे को श्रद्धांजलि दी। बाद में एसोसिएशन ने भारत सरकार के गृह मंत्री को एक पत्र भेज कर इस घटना को अत्यन्त निंदनीय बताते हुए इसकी सीबीआई जांच की मांग की।

गोरखपुर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के सभागार में मिड डे के पत्रकार ज्योतिर्मय डे की नृशंस हत्या के विरोध में दो मिनट का मौन रख कर पत्रकारों ने श्री डे को श्रद्धांजलि दी। बाद में एसोसिएशन ने भारत सरकार के गृह मंत्री को एक पत्र भेज कर इस घटना को अत्यन्त निंदनीय बताते हुए इसकी सीबीआई जांच की मांग की।

इसके साथ ही देश में एक ऐसे कानून की आवश्‍यकता बतायी, जिसके तहत पत्रकारिता का कार्य निर्भीकता के साथ किये जाने का माहौल बन सके। ज्ञापन में स्व. डे के परिजनों को सुरक्षा दिये जाने के साथ ही उन्हें कम से कम 10 लाख के आर्थिक सहयोग दिये जाने की मांग भी की गई। उपस्थित पत्रकारों को संबोधित करते हुए एसोसिएशन के अध्यक्ष रत्नाकर सिंह ने कहा कि आजादी की लड़ाई में पत्रकारों के योगदान को देखते हुए आजादी के बाद अंग्रेजों के काले वारिसों ने साजिशन पत्रकारिता को संविधान में कोई लिखित अधिकार ना देकर अपनी ओछी मानसिकता का प्रदर्शन किया था।

उन्‍होंने कहा कि बाद में पत्रकारों के दबाव पर यह कह कर उन्हें संतुष्‍ट करने का प्रयास किया गया कि पत्रकारिता लोकतंत्र का चतुर्थ और सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्तंभ है। लेकिन भ्रष्‍टाचार के इस दलदल में नेता से लगायत कार्यपालिका, ठेकेदार, कारपोरेट जगत, सभी ने पत्रकारिता को एक इस्तेमाल की वस्तु बना दिया, और जब भी किसी तेज तर्रार पत्रकार ने इनके काले कारनामों पर प्रहार करने का प्रयास किया, तो पत्रकारिता को आइईना दिखाते हुए उसे सदा के लिये खामोश कर दिया गया। श्री सिंह ने कहा कि श्री डे की हत्या भी इसी मानसिकता की एक कड़ी है, और यह क्रम तब तक नहीं थमेगा, जब तक पत्रकारिता को संरक्षण देने के लिये सख्त कानून नही बनेगा।

जेडे

उन्‍होंने कहा कि गोरखपुर जर्नलिस्ट एसोसिएशन और प्रेस क्लब गोरखपुर साझा रूप में पत्रकारिता के कार्य को संविधान के अंन्तर्गत कानूनी मान्यता दिलाये जाने के लिए शीघ्र ही एक देशव्यापी अभियान छेड़ेंगे, जिसके तहत देश के पत्रकारों की सर्वोच्च संस्था प्रेस क्लब आफ इंडिया के साथ ही देश के प्रत्येक राज्यों की राजधानी स्थित प्रेस क्लबों को पत्र लिख कर उनसे इस अभियान को गति देने की मांग की जायेगी, साथ ही देश के सभी सांसदों को भी पत्र लिख कर उनसे इस कार्य में मदद मांगी जायेगी। श्री सिंह ने कहा कि डे ने अपने प्राण पत्रकारिता के मानदण्डों की रक्षा में न्यौछावर किया है, उनका यह बलिदान व्यर्थ नहीं जायेगा।

शोकसभा में गोजए महामंत्री डा. मुमताज खान, उपाध्यक्ष मनोज श्रीवास्तव (गणेश जी), प्रेस क्लब अध्यक्ष सत्येन्द्र पाल, महामंत्री मो. अनीस खान, संयुक्त मंत्री हनुमान सिंह बघेल, एस.के.सिंह, इन्द्रमणि त्यागी, कार्यालय प्रभारी विनय कुमार गुप्ता, धर्मन्द्र दुबे टाटा, धीरज श्रीवास्वत, मनोज नवल, शिवम सिंह, अस्मित श्रीवास्तव, राजेश सहाय, फहाद अली, वहाब खान, आशीष भट्ट, चन्द्र प्रकाश मणि, सगुण श्रीवास्तव, अनुरजंन ठाकुर, तनवीर आजाद, कर्मेन्द्र मिश्रा, गोपाल राय, मृत्युजंय शंकर सिन्हा, राजू लुहारुका, भोला समेत बड़ी संख्‍या में पत्रकारों ने दो मिनट का मौन रख कर श्री डे को श्रद्धांजलि अर्पित की।

राजस्‍थान के हनुमानगढ़ में भी मुंबई के वरिष्ठ पत्रकार ज्योतिर्मय डे उर्फ जेडे की दिनदहाड़े हत्या के खिलाफ व हत्यारों को गिरफ्तार करने की मांग को लेकर पत्रकारों ने कलेक्ट्रेट पर सांकेतिक प्रदर्शन किया। इस दौरान पत्रकारों ने डे की हत्या पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे राज्य सरकार की नाकामी बताया और हत्या की तीव्र भर्त्‍सना की। पत्रकारों ने डे के हत्या के मामले की सीबीआई जांच और हत्यारों को जल्द गिरफ्तार करने की मांग की। इसके अलावा दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार कपिल शर्मा की थाने में रातभर की पिटाई की निंदा करते हुए आरोपी पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज करने की मांग भी गई।

पत्रकारों ने कहा कि मुंबई के पत्रकार ज्योतिर्मय डे की हत्या और कपिल शर्मा के साथ मारपीट कलम की स्वतंत्रता तथा सच को दबाने का प्रयास है। उन्होंने पत्रकारों पर हमले जैसी घटनाओं पर नियंत्रण के लिए कानून बनाने की बात भी कही। वक्ताओं ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा करार देते हुए कहा कि मीडिया को लोकतंत्र का चतुर्थ स्तंभ कहा जाता है और मीडियाकर्मियों पर आघात का अर्थ लोकतंत्र पर हमला है।

वक्ताओं ने कहा कि देश के पत्रकार अपराध, भ्रष्टाचार, घोटाले, सामाजिक बुराई, आतंकवाद और असामाजिक तत्वों के विरुद्ध खबरों का प्रकाशन कर जनता को अवगत कराते हैं, जिससे वह ऐसे अपराधियों के शत्रु बनते हैं। देश के प्रशासन को पत्रकारों व बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाने वाले संगठनों के कार्यकर्ताओं की सुरक्षा के लिए उपाय कराना आवश्यक है। अंत में प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति को संबोधित चार सूत्रीय ज्ञापन जिला कलेक्टर को सौंपा गया।

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ज्ञापन में पत्रकारों ने मुंबई के पत्रकार ज्योतिर्मय डे के हत्यारों को शीघ्र गिरफ्तार करने, कपिल शर्मा मामले में आरोपी पुलिसकर्मियों पर मुदकमा दर्ज करने, पत्रकारों के जान माल की सुरक्षा की व्यवस्था करने और पत्रकारों पर हो रहे अत्याचार पर तत्काल अंकुश लगाने की मांग की है। इस मौके पर राजस्थान श्रमजीवी पत्रकार संघ के जिलाध्यक्ष अनिल जांदू, जिला महासचिव राजू रामगढिय़ा, गुलाम नबी, विश्वास कुमार, बलवंत सिंह निडर, बलजीत राय, पंकज मिश्रा, हरदीप सिंह, प्रदीप कुमार, राजेन्द्र वाट्स आदि पत्रकार मौजूद थे।

देहरादून में भी पत्रकारों ने ज्‍योतिर्मय डे की हत्‍या के विरोध और हत्‍यारों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर कैंडल मार्च निकाला। पत्रकारों ने कहा कि ज्‍योतिर्मय डे की हत्‍या पत्रकारिता पर सीधा हमला है। जेडे के परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ उन्‍हें आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। इस कैंडल मार्च में राजीव निशाना,  सुरेश झा, श्नेता, रवि भारती, महासचिव सकील अहमद, सचिव प्रशांत त्रिपाठी के अलावा काफी संख्या में इलेक्‍ट्रानिक और प्रिंट मीडिया के पत्रकार मौजूद रहे।

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