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टेप लीक मामले में टाटा पहुंचे सुप्रीम कोर्ट

टाटा समूह के मुखिया रतन टाटा ने कंपनियों के लिए सत्ता के गलियारों में समर्थन जुटाने वाली एक शख्सियत नीरा राडिया के साथ उनकी फोनवार्ताओं के टैप को लीक किए जाने के खिलाफ उच्चतम न्यायालय की शरण ली है। टाटा ने अपील की है कि लीक के जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए क्यों कि इससे उनके जीवन जीने के मूलभूत अधिकार का हनन हुआ है जिसमें निजता का अधिकार भी शामिल है।

टाटा समूह के मुखिया रतन टाटा ने कंपनियों के लिए सत्ता के गलियारों में समर्थन जुटाने वाली एक शख्सियत नीरा राडिया के साथ उनकी फोनवार्ताओं के टैप को लीक किए जाने के खिलाफ उच्चतम न्यायालय की शरण ली है। टाटा ने अपील की है कि लीक के जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए क्यों कि इससे उनके जीवन जीने के मूलभूत अधिकार का हनन हुआ है जिसमें निजता का अधिकार भी शामिल है।

टाटा ने अपनी याचिका में कहा है कि इस टैप को लीक किया जाना उनके मूलभूत अधिकारों का हनन है। साथ ही यह एक तरह से उनकी निजी जिंदगी में दखलंदाजी है। टाटा ने अपनी याचिका में केंद्र सरकार को भी पक्ष बनाया है। नीरा राडिया की जनसंपर्क कंपनी ही टाटा समूह का जनसंपर्क का काम देखती है। समझा जाता है कि टाटा न्यायालय के समक्ष यह तर्क देंगे कि इस टैप में कुछ बातचीत बेहद निजी है और वह जांच का हिस्सा नहीं हो सकती। टाटा ने न्यायायल से अपील की है कि यह तय किया जाए कि इस लीक के लिए कौन जिम्मेदार है।  साभार : भाषा

रतन टाटा और नीरा राडिया के बीच बातचीत के टेप सुनने के लिए क्लिक करें- टेप एक और टेप दो

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0 Comments

  1. madan kumar tiwary

    November 30, 2010 at 4:11 am

    रतन टाटा जी मैं भी यह मानता हूं कि निजता में हस्तक्षेप नही होना चाहिये लेकिन निजता जब राष्ट्रहीत के आडे आने लगे तो क्या करें। कीसी को क्या जरुरत थी आप के और निरा के टेप सुनने की । फ़ालतु वक्त भी तो चाहिये वाहियात बातों को सुनने के लिये । अब आप लोगो ने सीधे तौर पर २ जी घोटाला में कोई हाथ है इसे नकारना शुरु कर दिया है तो मजबुरी हो गई है आप लोगो की खडयंत्रकारी बाते सुनना । निरा लाबिंग करती थी आपके लिये इससे तो आपको भी इंकार नही है । लाबिंग का सीधा साधा अर्थ है Act of attempting to convince public officials to favour a certain cause or take a certain action. Is it morally or ethically right? एक तरफ़ आप कहते है कि आपने निरा को कभी भी किसी अधिकारी या मंत्री से फ़ेवर के लिये या पालिसी मैटर में हस्तक्षेप के लिये निर्देश नही दियें तो आखिर यह तो बताईये की निरा का काम क्या था। देखना है कि न्यायालय कानून से बढकर जनता और देश को मानता है या नही । वैसे मेरी समझ से देश में कानून है अगर कोई आपकी प्रतिष्ठा को क्षति पहूंचाता है तो आप मुकदमा कर सकते हैं। फ़िर आप सेंसर क्यों चाहते है . why blanketing of information.

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