थानाध्‍यक्ष ने ग्रामीणों पर चढ़ाई जीप, भड़के लोग, फूंका थाना, बिगड़ा माहौल, फायरिंग, पांच घायल

वैसे भी जिस बंदे के बदन पर खाकी होती है, उसके हाव-भाव-ताव सब अलग होते हैं. जनता उनके लिए कीड़े-मकोड़े से ज्‍यादा नहीं होती. खाकी बदन पर चढ़ते ही ये खुद को कानून से ऊपर समझने लगते हैं और आईपीसी की धाराओं को अपनी रखैल. जब जैसा चाहा वैसा किया, फिर कानून की कमजोरी का फायदा उठाते हुए बच निकले. आज गाजीपुर जिले के बिरना थाने क्षेत्र में हुई घटना भी ऐसे ही एक पुलिस वाले की गुंडई तथा कानून से खुद को ऊपर समझने की मानसिकता का परिचायक है.

इस दारोगा का नाम है रणजीत राय. युवा है, जोश है, पर होश में कभी नहीं रहता है. यह खुद को दंबग का सलमान खान समझता है और जनता को भेड़-बकरी. पिस्‍टल दिखाने और चलाने का इसे बहुत ज्‍यादा ही शौक है. अब आते हैं कानून के इस दबंग के चलते बिगड़ी कानून-व्‍यवस्‍था की कहानी पर. जो बात थोड़ी समझदारी और नरमी से सलट सकती थी, वह इस दारोगा की दबंगई के चलते हादसा बन गई. घटना बन गई. पर इसका कुछ बिगड़ेगा इसकी उम्‍मीद ना के बराबर है. क्‍यों कि यह दबंग अपने अफसरों का काफी चहेता है. हां, जो घायल हुए हैं, जिनका बिगड़ा है वो अपने बारे में सोचे, अपना सोचे.

अब आते हैं मूल घटना पर. गाजीपुर जिले के बिरना थाना क्षेत्र का कबूतरी गांव. यहां के एक स्‍कूल के प्रबंधक तथा पेशे से शिक्षक धर्मेंद्र बिंद, उनकी लाश उनके ही स्‍कूल में फंदे से लटकी मिलती है. पुलिस को सूचना दी जाती है. शाम की घटना है, पर पुलिस रात को पहुंचती है. पहुंचते ही धर्मेंद्र की मौत को आत्‍म हत्‍या घोषित कर देती है. अब जब खाकी वालों ने आत्‍महत्‍या घोषित कर दिया तो फिर यह हत्‍या या कोई संदिग्‍ध मौत कैसे हो सकती है. आखिर इनके मुंह से निकले वाक्‍य खुद कानून जो बन जाते हैं. परिजन-ग्रामीण कहते हैं कि धर्मेंद्र की हत्‍या हुई है. वो मुकदमा दर्ज करने की बात करते हैं, पोस्‍टमार्टम कराने की बात करते हैं. पर जब खाकी ने एक बार कह दिया कि आत्‍महत्‍या तो फिर किसी और जांच का सवाल ही कहां रह जाता है.

धर्मेंद्र के परिजन और ग्रामीण अपना विरोध जताते हैं. सुबह वे थाने के सामने पहुंचकर सड़क पर बैठ जाते हैं तथा उनकी मांग होती है कि मामला दर्ज कर जांच की जाए. अगर एक तरीके से देखा जाए तो किसी की मौत पर उसके परिजनों को शक है तो पुलिस को इसकी जांच करनी चाहिए, पर इन खाकी वाले दबंगों की कही बात पत्‍थर की लकीर बन जाती है. बिरना पुलिस मुकदमा लिखने और जांच करने को तैयार नहीं हुई. ग्रामीण भी मौके पर जमे रहे. इस बीच इस जाम-प्रदर्शन की सूचना जिले के आला हाकिमों को दी जाती है. आला हाकिम अपने प्रिय दबंग दारोगा और जंगीपुर थाने के थानाध्‍यक्ष रणजीत राय तथा मरहद थाने के थानेदार को मौके पर पहुंचने को कहती है.

मरदह थानाध्‍यक्ष मौके पर पहुंच जाते हैं. अब बारी आती है दबंग थानाध्‍यक्ष रणजीत राय की. यह दबंग स्‍टाइल में अपनी सरकारी जीप धरनारत ग्रामीणों की भीड़ में घुसा देता हैं. भगदड़ मचती है. कुछ लोग घायल होते हैं. कुछ को चोट लगती है. इसके बाद यह दारोगा ग्रामीणों की मां-बहन करता है तथा पिस्‍टल हाथ में लहराने लगता है. इस अमानवीय व्‍यवहार के बाद जनता भड़क जाती है और पुलिस विरोधी नारे लगाने लगती है. इसके बाद भी रणजीत राय का मन नहीं भरता है. वो पिस्‍टल लेकर भीड़ को दौड़ा लेता है. इसके साथ कुछ पुलिसकर्मी लाठीचार्ज कर देते हैं. फिर भीड़ उग्र हो जाती है और पथराव शुरू कर देती है. तब यह दबंग अपने सिपाहियों के साथ वापस भागता है. थाने में आकर घुस जाता है.

उग्र भीड़ अब अनियंत्रित हो जाती है. कई वाहनों को तोड़ने-फोड़ने के बाद थाना परिसर में रखे गए पुराने वाहनों को आग लगा देती है. थाने की चहारदीवारी तोड़ डालती है. फिर मामला और बिगड़ जाता है और पुलिस गोलियां चलाती है, जिसमें कम से कम पांच ग्रामीणों को छर्रा लगता है तथा कई गिर-पड़कर घायल हो जाते हैं. सूचना पाकर एसपी, डीआईजी तथा आईजी भी मौके पर पहुंच गए. इन वरिष्‍ठ अधिकारियों ने पूछताछ के बाद घटना की मजिस्‍ट्रेटियल जांच की घोषणा किया है. मौके पर पहुंचे सांसद राधामोहन सिंह ने पुलिस की लापरवाही बताते हुए सीबीआई जांच की मांग की.

उल्‍लेखनीय है कि पूरे मामले को बिगाड़ने वाले यह दारोगा नंदगंज थाने में तैनाती के दौरान भी नियम कानून की धज्जियां उड़ाते हुए महिलाओं को कई घंटे थाने पर बैठाए रखा था, जिसमें इसे लाइन हाजिर भी किया गया था.रणजीत राय को हाथ में पिस्‍टल लेकर लोगों को डराने का शौक है. इसे इसमें बहुत मजा आता है. कई बार पिस्‍टल लहराकर यह अपने इस शौक का सार्वजनिक प्रदर्शन कर चुका है. बीते 25 मई को भी जंगीपुर थाना क्षेत्र में एक सड़क हादसे के बाद प्रदर्शन कर रहे लोगों पहले लाठियों से पिटवाया. जब ग्रामीण भी विरोध करने लगे तो इस दारोगा ने हाथों में पिस्‍टल लेकर प्रदर्शनकारियों पर टूट पड़ा था.

महिला उत्पीड़न का आरोपी और मानवाधिकार जांच में फंसे आईपीएस लोकू को माया सरकार देगी श्रेष्‍ठता पुरस्‍कार!

केवल प्रताड़ना के लिए निर्दोष महिलाओं को रात भर थाने पर बिठाये रखने वाले पुलिस अफसर को प्रदेश की माया-सरकार ने उसकी हरकतों को उत्‍कृष्‍ट और सराहनीय माना है। कल सोमवार 15 अगस्‍त को मुख्‍यमंत्री मायावती खुद उसके गले में मेरीटोरियस सर्विस का मेडल टांगेंगी। यह अफसर अब लखनऊ में डीआईजी के तौर पर बिराजमान है।

पुलिस सुधार के लिए चलने वाले प्रयासों को यूपी में किस तरह रौंदा जाता है, इसका ताजा उदाहरण है राष्‍ट्रपति पदक के लिए चुने गये यूपी के अफसर। इन पदकों में जिसका नाम खास तौर पर उल्‍लेखनीय है, वह है रविकुमार लोक्‍कू। आईपीएस अफसर है यह शख्‍स। अभी कुछ ही महीना पहले यह गाजीपुर जिले में कप्‍तान था। उस पर गाजीपुर जिले में अपनी तैनाती के दौरान निर्दोष महिलाओं के उत्पीड़न, १६ घंटों तक बिना वजह महिलाओं को थाने में बिठाने का आरोप है। इसी आरोप के कारण उसका तबादला कर दिया गया और उसके खिलाफ मानवाधिकार आयोग की जांच शुरू हो गई। अब इसी अफसर को मायावती सरकार की तरफ से सम्मानित किया जाएगा।

दरअसल, पुलिस अफसरों को राष्‍ट्रपति पुरस्‍कार के लिए प्रदेश सरकार की ओर से प्रस्‍ताव भेजा जाता है। यह पुरस्‍कार वीरता, उल्‍लेखनीय सेवाओं और असामान्‍य श्रेष्‍ठता हासिल पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को दिया जाता है। सामान्‍य तौर पर, और कोई खास ऐतराज पेश न आने पर राष्‍ट्रपति कार्यालय से इस सूची को मंजूरी मिल ही जाती है। इसके बाद उन्‍हें मिलती है रकम और मेडल के साथ ढेर सारी सुविधाएं भी। वेतन में विशेष रकम भी जोड़ी जाती है जो आजीवन मिलती है। वह भी टैक्‍स-फ्री।

रवि कुमार लोकू

यही है यूपी का महिला विरोधी कुख्यात पुलिस अफसर रवि कुमार लोकू

बहरहाल, बात हो रही है लोक्‍कू की। गाजीपुर में पिछले पंचायत चुनावों के दौरान हुई हिंसा में एक व्‍यक्ति की मौत हो गयी थी। हत्‍या के अभियुक्‍तों को पुलिस तो पकड़ नहीं पायी। उल्‍टे अभियुक्‍तों के पड़ोस की घरों की महिलाओं को धर-दबोचा। रात भर उन्‍हें थाने पर बिठाये रखा। यह सारा तब हुआ जब महिलाओं को थाने पर ले जाये जाते समय न तो कोई महिला पुलिस थी और न ही थाने पर पूरे दौरान किसी महिला पुलिसकर्मी की व्‍यवस्‍था की गयी। महिलाएं हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाती रहीं कि उन्‍हें किसी भी अभियुक्‍त के बारे में कोई सूचना नहीं है, लेकिन लोक्‍कू के नेतृत्‍व में किसी भी मर्द पुलिसवाले का दिल नहीं पसीजा। इन महिलाओं को थाने में बिठाये रखा गया और बात-बात पर उन्‍हें बेइज्‍जत किया जाता रहा।

इन महिलाओं को पकड़े जाने की खबर पाते ही इस बारे में लखनऊ में मौजूद आला पुलिस और प्रशासनिक अफसरों को खबर दे दी गयी। चूंकि यह मामला एक वरिष्‍ठ पत्रकार के परिवार का था, इसलिए लखनऊ के पत्रकार भी सक्रिय हुए। लेकिन लोक्‍कू ने पत्रकारों के हर फोन पर यही कहा कि जब तक अभियुक्‍त नहीं पकड़े जाते महिलाओं को नहीं छोड़ा जाएगा। हर अफसर ने लोक्‍कू को फोन किया, लेकिन करीब 18 घंटों तक थाने पर रखने के बाद ही इन महिलाओं को छोड़ा गया। हालांकि बाद में जांच के नाम पर एक अफसर को मौके पर भेजा गया, लेकिन उस जांच का क्‍या हुआ, कोई नहीं जानता।

हैरत की बात तो यह है कि सर्वोच्‍च न्‍यायालय तक इस बात पर सख्‍त ऐतराज जता चुका है कि अभियुक्‍तों को न पकड़ पाने पर, उनका सुराग लेने के लिए पुलिस द्वारा अभियुक्‍तों के परिवारीजनों को पकड़ लेती है। उच्‍चतम न्‍यायालय ने ऐसी घटनाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किये जाने की भी हिदायत दे रखी है। वैसे भी, कानूनन किसी भी महिला को निर्दोष होने पर थाने नहीं बुलाया जा सकता है। और किसी महिला को यदि गिरफ्तार किया जाता है तो उसके साथ उस समय तक महिलापुलिसकर्मी अनिवार्य रूप से होने का प्राविधान है, जब तक कि उसे जेल न भेज दिया जाए। लेकिन कायदे-कानून को अपने जूते की नोंक पर रखती है यूपी की टोपीक्रेसी, जिसके अब नये नेता हैं रविकुमार लोक्‍कू। तो, अब यूपी सरकार कुमार सौवीरने इस अफसर को राष्‍ट्रपति पुरस्‍कार से सम्‍मानित करने का फैसला किया है।

यूपी के वरिष्ठ पत्रकार कुमार सौवीर की रिपोर्ट


आईपीएस एल. रवि कुमार उर्फ रवि कुमार लोकू उर्फ लोक्कू की असलियत जानने के लिए इन लिंक पर क्लिक करके पढ़ें….

 

लुच्चा लोकू, बेईमान बृजलाल

Justice for मां : गाजीपुर के एसएसपी को चिट्ठी

मां को न्याय दिलाने के लिए राज्य मानवाधिकार आयोग को प्रेषित कंप्लेन

क्योंकि वो मायावती की नहीं, मेरी मां हैं

jusitce for मां

क्या करें, कैसे करें

गाजीपुर के पत्रकारों ने बनाया ‘एक्टिव जर्नलिस्‍ट फोरम’

गाजीपुर जनपद में यूं तो पत्रकारों के कई संगठन हैं और ये सभी संगठन पत्रकारों के हितों के नाम पर अलम्बरदारी कर रहे हैं। ये दीगर बात है कि पत्रकारों के हितों के नाम पर चल रहे इन संगठनों का सबसे महत्वपूर्ण काम आपसी राजनीति, गुटबंदी और खेमेबाजी ही नजर आ रहा है, ऐसे में पत्रकारिता की मुख्यधारा से जुड़े लोग चाहे वो संवाददाता हों, छायाकार हों या जनपद में विभिन्न अखबारों के ब्यूरो चीफ, पत्रकारिता के नाम पर चलने वाले इन संगठनों से किनारा कर अपने कामों में मशगूल बने रहते हैं।

यही वजह है कि पत्रकारों के हितों के नाम पर कुछ गोष्ठियां-बैठक कर तथाकथित पत्रकार संगठन जनपद भर में पत्रकारिता की मर्यादा गरिमा और शुचिता के सामने गम्भीर सवाल खड़े कर रहे हैं। महज आपसी चकल्लस, बेसिरपैर की गुटबाजी और व्यक्तिगत स्वार्थ सिद्धि में पूरी तरह लिप्त इन संगठनों ने आम लोगों को भी गुमराह कर रखा है। ऐसे में गाजीपुर में पत्रकारिता की मुख्यधारा में काम कर रहे लोगों ने व्यवसायिक प्रतिद्वंदिता और प्रतिस्पर्धा को दरकिनार कर एक नई पहल शुरू की है। जनपद में सभी महत्वपूर्ण समाचार पत्रों और मुख्य न्यूज चैनलों के लोगों ने पत्रकारिता की गरिमा और शुचिता के मद्देनजर एक प्लेटफार्म बनाने का निर्णय लिया।

नतीजा एक्टिव जर्नलिस्ट फोरम के गठन की रूपरेखा बनाई गई। जिसमें पत्रकारिता की मुख्य धारा में काम कर रहे लोग शामिल होंगे। इसमें प्रिंट मीडिया से अमर उजाला, दैनिक जागरण, आज, राष्‍ट्रीय सहारा, तथा इलेक्‍ट्रानिक मीडिया से आजतक, महुआ न्यूज, ईटीवी, सहारा न्यूज, इंडिया टीवी जैसे अग्रणी मीडिया संस्थानों से जुड़े लोग (जिनका कार्यक्षेत्र गाजीपुर है) शामिल हैं। एक्टिव जर्नलिस्ट फोरम के गठन का एक मात्र उद्देश्य मीडिया की मुख्यधारा में काम कर रहे संवाददाताओं, छायाकारों एवं विभिन्न मीडिया संस्थानों के ब्यूरो प्रमुखों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष करना और कार्यक्षेत्र में आने वाली विभिन्न समस्याओं का निराकरण करना है।

गौरतलब है कि फोरम में छद्म पत्रकारिता के वेश में अपना व्यक्तिगत हित साधने वालों के लिए कोई जगह नहीं है। ऐसे में जनपद में पत्रकारिता की गरिमा, मर्यादा और शुचिता के साथ मीडियाकर्मियों के हितों की रक्षा करने के लिए फोरम ने अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है। राह मुश्किल जरूर लेकिन फोरम से जुड़े लोगों के हौसले बुलन्द नजर आ रहे है। इतना ही नही पत्रकारिता की मुख्यधारा से जुड़े लोगों के एक प्लेटफार्म पर खड़े होने की वजह से बहुरूपिए पत्रकारों की जमात और इनको संरक्षण देने वाले प्राशसनिक और पुलिस अधिकारियों के बीच हड़कम्प नजर आ रहा है। प्रेस विज्ञप्ति

फिर नहीं हुई गुलाब राय के हमलावरों की जमानत

गाजीपुर में हमला कर फोटो जर्नलिस्‍ट गुलाब राय को लूटने के मामले में आबकारी निरीक्षक राजेश यादव और मुख्य आरक्षी विन्ध्याचल राय की जमानत का मामला टल गया। अर्जी पर अब सुनवाई 17 मार्च को होगी। अपर सत्र न्यायाधीश (एससीएसटी) संजय डे के न्यायालय में मंगलवार को अर्जी पर सुनवाई शुरू हुई।

सुनवाई के दौरान वादी के अधिवक्ता राम अवतार राय ने दरख्वास्त देकर न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय से पत्रावली तलब करने की गुजारिश की। इसे स्वीकार करते हुए विद्वान न्यायाधीश ने सुनवाई की अगली तारीख तय कर दी। इसके बाद बचाव पक्ष के मौजूद लोगों के चेहरे लटक गये।

दोनों अभियुक्तों की गिरफ्तारी घटना के बाद मौके पर ही हो गयी थी। अगले दिन शाम को उन्हें सीजेएम विजय आजाद ने जेल भेज दिया था। इसके बाद सीजेएम की नामौजूदगी में न्यायिक मजिस्ट्रेट में जमानत की अर्जी पड़ी मगर वहां उसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद डीजे उमेश सिंह के न्यायालय में अर्जी दी गयी। उसे उन्होंने अपर सत्र न्यायाधीश (एससीएसटी) के न्यायालय में स्थानान्तरित कर दिया था।

न्‍याय के लिए पत्रकारों को करना पड़ा अधिकारियों के भ्रष्‍टतंत्र से संघर्ष

गाजीपुर में 9 मार्च को हुए छायाकार पर हमले की घटना के सूत्रधार आबकारी निरीक्षक राजेश यादव व कान्सटेबल विध्यांचल राय को बचाने के लिए अधिकारी और माफियाओं ने जो एकजुटता दिखाई, उससे समाज में जीने वाले सच्चे और ईमानदार लोग के लिए कड़ी चुनौती साबित हुई। दबाव और पैसे की लालच में आकर पुलिस और अधिकारी किस हद तक गिर सकते हैं इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। सभ्य समाज में जीने वाले लोग अब इस बात पर सोचने को मजबूर हो गये है कि आखिर हमारा क्या होगा।

इस यथार्थ को मैं इसलिए सामने लाना चाहता हूं कि हमारे समाज में रहने वाले लोग, न्याय की उम्मीद करने वाले लोग व्यवस्था पर अपनी आस्था लगाकर न बैठें कि न्याय उन्हें आसानी से मिल जायेगा। उनके साथ कितनी बार मानसिक उत्‍पीड़न किया जाता होगा इसका अंदाजा प्रेस फोटोग्राफर गुलाब राय पर हुए हमले के मामले से आसानी से लगाया जा सकता है।

वाकया यह रहा कि निर्धारित मूल्‍य से 5 रूपये अधिक पर बिक रहे शराब की शिकायत करने डिप्टी सीएमओ प्रशासन डा. आरके मेहरा आबकारी विभाग पहुंचे। वहां उन्‍होंने आबाकरी निरीक्षक राजेश यादव से इसकी शिकायत की। इसी कहासुनी में डा. साहब के कुछ शब्द निरीक्षक व वहां बैठे दबंग ठेकेदारों को नागवार गुजरी। जिस पर तैस में आकर ठेकेदार व विभाग के कुछ कर्मचारी डा. साहब पर टूट पड़े। इसी बीच शोर सुनकर दैनिक समाचार पत्र ‘आज’ के छायाकार गुलाब राय (उम्र 50 वर्ष), जो समाजवादी पार्टी का प्रदर्शन कवर करने के लिए मुस्‍तैद थे, आबकारी विभाग पहुंच गए। उन्‍होंने अपना कैमरा निकाला और मारपीट की घटना को कैद करने लगे। इसी बीच निरीक्षक की नजर इन पर पड़ी और सारे लोग डा. को छोड़ एकहरे बदन के छायाकार पर टूट पड़े, जिससे छायाकार घायल होकर अचेतावस्था में गिर गये। उनके दो डिजीटल कैमरे व मोबाइल छीन लिए गए।

इसकी जानकारी होने पर अन्य पत्रकार भी मौके पर पहुंच गए। उन्हें भी आबकारी निरीक्षक ने गाली दिया। उसके कहने पर वहां मौजूद ठेकेदार और कर्मचारी दूसरे पत्रकारों के भी कैमरे व माइक छीनने की कोशिश करने लगे। इतने में कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची, पहले डा. को पीटा और उसके बाद उन्‍हें तथा आबकारी विभाग के कांस्‍टेबल विध्याचल राय को साथ लेकर जाने लगी। इस पर आबकारी निरीक्षक भड़क गया। उसने कोतवाल को भी अपने औकात में रहते हुए कांस्‍टेबल छोड़ने की बात कही। इसके बाद कोतवाल आबकारी निरीक्षक को भी बैठाकर कोतवाली लायी। पूरी घटना की जानकारी जब सभी पत्रकार बन्धुओं को हुई तो वे भी कोतवाली पहुंच गए। आबकारी निरीक्षक समेत सभी दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग पर अड़ गए।

दूसरी तरफ पीसीएस कैडर के सभी अधिकारी आबकारी निरीक्षक को बचाने के लिए उसके पक्ष में लामबन्द होकर समझौते की पैरवी में आने लगे। इसके बाद पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज करने में हीलाहवाली का सिलसिला जारी हो गया। कोतवाली में पत्रकारों द्वारा पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारे लगने लगे। आबकारी निरीक्षक के लिए बिसलेरी की बोतल व चाय की व्यवस्था भी करायी जाने लगी। अपर पुलिस अधीक्षक के साथ अन्य कई अधिकारी भी समझौते पर जोर देने लगे। डा. मेहरा भी दबाव के चलते अपने खिलाफ हुए सभी कारनामों को भूल गये और मुख्य चिकित्साधिकारी डा. प्रदीप सिंह, मुख्य चिकित्साधीक्षक डा. बीजेपी सिन्हा भी आबकारी निरीक्षक के विरूद्व कोई कार्यवाही करने का साहस नही जुटा पाये। दबाव में काम कर रही पुलिस ने गुलाब राय के तहरीर पर पहले आईपीसी की धारा 323, 392 जैसे गैरजमानती में मुकदमा पंजीकृत किया।

एफआईआर दर्ज होने के बाद आबकारी अमला व समाज के दलाली संगठनों ने पत्रकारों व पुलिस पर जोर आजमाइश शुरू कर दी। पत्रकारों की एकजुटता पर तो उनका कोई जोर नहीं चला, परन्तु पुलिस प्रशासन को अपने धनबल एवं एप्रोच बल से काबू कर लिया और एफआईआर की मूल धारा पुलिस अधीक्षक व आईजी के हस्तक्षेप से धारा 392 को 356 में तब्दील कर दी गयी। जिससे माननीय न्यायालय में निरीक्षक व कांस्‍टेबल की जमानत हो सके। जनपद के सभी बड़े क्रिमनल केस के अधिवक्ताओं को पत्रकारों की पैरवी करने से मना कर दिया गया। धनबल व बाहुबल वाले शराब के सभी बड़े ठेकेदार, आबकारी अधिकारी, पुलिस व अन्य अधिकारी अपनी अपनी आन-बान-शान मान कर तानाशाह व निरंकुश निरीक्षक व कर्मचारी के बचाओ अभियान में कूद पड़े। जो समाज में एक चर्चा का विषय बन गयी और पत्रकारों के लिए बड़ी चुनौती खड़ी हो गयी।

इसके बावजूद दोनों की जमानत खारिज कराने के लिए पत्रकार एवं अधिवक्ता हृदय नरायण सिंह ने इनकी सारी बातें, कारनामें मुख्य दण्डाधिकारी के समक्ष खोल कर रख दीं। पत्रकारों की एकजुटता देख बचाव पक्ष के वकीलों के पसीने छूटने लगे। न्यायिक अधिकारियों को भी परीक्षा के दौर से गुजनता पड़ा। इस‍के लिए उन्‍होंने कई न्यायिक अधिकारियों से अपने निर्वतन कक्ष में राय मशवरा किया। इसके पश्चात आईपीसी की धारा 392 जोड़कर रात 8 बजे केस की अगली तारीख 10 मार्च डालकर अभियुक्त आबकारी निरीक्षक व कांस्‍टेबल को जेल भेजा गया। आज के इस सामाजिक न्यायहित की बात करने वाले इन अधिकारियों के चेहरे अन्दर से कितने घिनौने हैं, इसका अन्दाजा समाज के सभ्य नागरिकों को नहीं होता है।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

फोटोग्राफर पर हमला : आरोपियों की गिरफ्तारी में निष्क्रियता दिखा रही पुलिस

गाजीपुर में हमला कर फोटो पत्रकार को लूटने के मामले में आबकारी विभाग के शेष अभियुक्तों की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस खामोश है। अब तक घटना में लूटे गये कैमरों की भी बरामदगी नहीं हुई है। इसको लेकर पत्रकारों में रोष बढ़ता जा रहा है। बीते बुधवार को आबकारी विभाग के दफ्तर में डिप्टी सीएमओ डा. आरके मेहरा की पिटाई की घटना को कैमरे में कैद करते वक्त पत्रकार गुलाब राय पर हमला किया गया था।

हमले के दौरान आबकारी कर्मियों और ठेकेदारों ने गुलाब को मारपीट कर गंभीर रूप से घायल कर दिया था और उनके दो कैमरे लूट लिये थे। हालांकि इस मामले में पुलिस का रवैया शुरू से पक्षपातपूर्ण रहा, मगर मीडिया कर्मियों के दबाव के चलते आखिर में प्राथमिकी दर्ज करनी पड़ी थी। फिर पुलिस ने कुछ ले दे के बिना वादी का बयान लिये लूट की धारा ही बदल दी, लेकिन सीजेएम विजय आजाद ने गिरफ्तार आबकारी निरीक्षक राजेश यादव तथा मुख्य आरक्षी विन्ध्याचल राय को आईपीसी की धारा 394 के तहत वारंट बनाने को कहा और फिर उन दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था।

मुकदमे में दो नामजद अभियुक्तों के अलावा आठ अज्ञात अभियुक्त हैं। यह लोग भी विभागीय कर्मी हैं या ठेकेदार हैं, लेकिन पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए अब तक कहीं कोई दबिश नहीं डाली है। इस सिलसिले में पुलिस कप्तान डा. मनोज कुमार का दावा है कि -शेष अभियुक्तों को भी शीघ्र गिरफ्तार कर लूटे गये कैमरे बरामद किये जायेंगे, लेकिन पुलिस की लापरवाही उसकी निष्पक्ष कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ी कर रही है। क्या इन पुलिस वालों को पत्रकारों से भी रिश्वत की उम्मीद है या फिर कहीं आरोपियों ने उनकी जेबें गरम तो नहीं कर दी है।

फोटोग्राफर पर हमले के आरोपी इंस्‍पेक्‍टर एवं कांस्‍टेबल को नहीं मिली जमानत

नौ मार्च को आबकारी कार्यालय, गाजीपुर में डिप्टी सीएमओ प्रशासक आरके मेहरा पर जानलेवा हमला तथा समाचार संकलन और फोटो कवरेज कर रहे दैनिक आज समाचार पत्र के छायाकार गुलाब राय से मारपीट और कैमरा लूटने के मामले में आरोपी आबकारी इंस्‍पेक्‍टर राजेश यादव और कांस्‍टेबल विंध्‍याचल राय की जमानत याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी.

उल्‍लेखनीय है कि इस मामले में मारपीट में घायल डिप्‍टी सीएमओ की तरफ से तो कोई मुकदमा दर्ज नहीं कराया गया था. परन्‍तु घायल पत्रकार गुलाब राय ने कोतवाली में दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था. जिसके बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था. जिसकी सुनवाई सीजेएम ने अगले दिन के लिए टाल दी थी.

शुक्रवार को आरोपियों की ओर से जमानत अर्जी जिला जज की अदालत में दी गई, जो स्थानांतरित होकर एससीएसटी एक्ट की अदालत में सुनवाई के लिए भेज दी गई. जहां आरोपियों के अंतरिम जमानत के लिए अर्जी दी गई. जिस पर आरोपी के अधिवक्ता एवं अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता हृदय नारायण सिंह और रामअवतार राय एवं विशेष अभियोजन अधिकारी कमला सिंह को सुनने के बाद अंतरिम जमानत अर्जी को अस्वीकार करते हुए कोर्ट ने मूल जमानत की अर्जी पर सुनवाई के लिए 14 मार्च की तिथि मुकर्रर की है.

उल्‍लेखनीय है कि इस मामले में गुरुवार को धारा 392 को निकालते हुए शेष जमानती धाराओं में आरोपियों को पुलिस ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया था. जहां आरोपियों की ओर से अधिवक्ता सुनील कपूर और विजय पांडेय ने जमानत की प्रार्थना करते हुए कहा कि आरोपियों पर लगाए गए आरोप जमानती हैं. उनको छोड़ा जाए. वहीं वादी की ओर से अधिवक्ता हृदय नारायण सिंह ने सभी तथ्यों से अदालत को अवगत कराते हुए जमानत का विरोध किया.

दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने यह पाया कि एफआईआर और वादी के बयान से उक्त धाराओं के अलावा 394 यानी डकैती का भी अपराध बनता है, लिहाजा अदालत ने जमानत अर्जी को नामंजूर करते हुए आरोपियों को जेल भेज दिया था.

पत्रकार पर हमला, आबकारी विभाग के निरीक्षक एवं कांस्‍टेबल जेल भेजे गए

: डिप्‍टी सीएमओ की जमकर धुनाई हुई : होली आने से पहले ही गाजीपुर जिले में होली का नशा आबकारी विभाग और सरकारी अफसरों पर चढ़ने लगा है. दारू के दाम को लेकर डिप्‍टी सीएमओ से आबाकारी के लोग भिड़े ही, पत्रकार पर भी हमला किया गया. घायल पत्रकार की तहरीर पर आबकारी निरीक्षक और हेडकांस्‍टेबल के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्‍हें कोर्ट में पेश किया गया. दलील सुनने के बाद सीजेएम ने दोनों को जेल भेज दिया.

होली से पहले शराब के दुकानदार आबकारी विभाग के कर्मियों की शह पर निर्धारित दर से अधिक मूल्‍य पर शराब बेच रहे थे. जिले में डिप्‍टी सीएमओ के पद पर तैनात डा. आरके मेहरा एक दुकान में शराब पी रहे थे. दुकानदार द्वारा जब शराब की कीमत तय मूल्‍य से अधिक मांगा गया तब डिप्‍टी सीएमओ साहब ने अपना परिचय दिया, इस पर दुकानदार ने अधिक पैसे लिए जाने की बात आबकारी विभाग से जाकर पूछने का कहा. जिसके बाद डाक्‍टर साहब तुरंत आबकारी विभाग पहुंच गए. वहां विभागीय लोगों से अधिक पैसे लिए जाने के बारे में पूछने लगे. जिस पर वहां के अधिकारियों तथा आबकारी निरीक्षक के कहने पर कर्मचारियों ने डाक्‍टर साहब की जमकर धुनाई शुरू कर दी.

इस घटना की जानकारी मिलने पर वाराणसी से प्रकाशित होने वाले दैनिक आज के फोटोग्राफर गुलाब राय भी मौके पर पहुंच गए तथा फोटो लेने लगे. अपनी फोटो लिए जाते देख विभागीय लोग डाक्‍टर को छोड़ कर पत्रकार पर टूट पड़े. इनकी भी जमकर सुताई की गई. गुलाब से कैमरा छीन लिया गया. जब इलेक्‍ट्रानिक मीडिया के लोग पहुंचे तो उनसे भी विभागीय लोगों ने बदतमीजी करनी शुरू कर दी. कैमरे छीनने के प्रयास किए गए. पत्रकारों ने इस घटना की जानकारी पुलिस को दी. पुलिस मौके पर पहुंचकर डाक्‍टर को ही पकड़ लिया. आबकारी के कर्मचारियों के बारे में पूछताछ करने पर आबकारी विभाग के इंस्‍पेक्‍टर कोतवाल से ही भिड़ने की कोशिश की.

पत्रकार जब उक्‍त आबकारी इंस्‍पेक्‍टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगे तो तो पास ही बैठे अपर पुलिस अधीक्षक के इशारे पर वह वहां से उठकर भागने लगा. जहां पत्रकारों ने उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया. मामला बिगड़ते देख अपर पुलिस अधीक्षक अवधेश पाण्‍डेय वहां से खिसक लिए. इस घटना के बाद मुख्‍य चिकित्‍साधिकारी ने डिप्‍टी सीएमओ के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई करने की बात कही, लेकिन आबकारी विभाग के खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज नहीं कराया.

घायल पत्रकार की तहरीर पर पुलिस ने आबकारी निरीक्षक राजेश यादव, हेडकांस्‍टेबल विन्‍ध्‍याचल राय सहित दस लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 392, 143 एवं 323 के तहत मामला दर्ज कर लिया. बाद में पुलिस ने किसी दबाव के चलते धारा 392 हटाकर 356 लगा दिया. इसके बाद आरोपियों को कोर्ट में पेश किया. जहां धाराओं में कुछ संशोधन के बाद सीजेएम ने आरोपियों को जेल भेज दिया. जमानत की सुनवाई अगले दिन के लिए टाल दिया गया.

गाजीपुर से अनिल कुमार की रिपोर्ट.

गाजीपुर में वरिष्ठ कवियों और पत्रकारों का हुआ सम्मान

: काव्य गोष्ठी में कवियों ने बहाई सुर व शब्दों की गंगा-यमुना : गाजीपुर। गाजीपुर पत्रकार एसोसिएशन द्वारा काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन नगर के मध्य स्थित हरिशंकरी में किया गया। इसमें जनपद के वरिष्ठ कवियों व साहित्यकारों को पत्रकारों द्वारा सम्मानित किया गया। इसमें मुख्य रूप से डा. गजाधर शर्मा ’गंगेश’, अनन्त देव पाण्डेय, दुर्गा प्रसाद गुरू, अश्क गाजीपुरी, गोपाल गौरव, रश्मि साक्या, डा. प्रेम शंकर ’प्रेम’ जी शामिल रहे।

इस कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था के संरक्षक व वरिष्ठ पत्रकार कार्तिक कुमार चटर्जी ’दादा’ ने सर्वप्रथम मां सरस्वती के चित्र पर माल्यापर्ण एवं दीप प्रज्जवलित करते हुए किया। कवियों का स्वागत पत्रकार चन्द्र कुमार तिवारी, अनिल जी न्यूज व पत्रकार राजेश दुबे द्वारा माल्यापर्ण कर किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित वरिष्ठ पत्रकारों में धर्मदेव राय, जयप्रकाश भारती, आरसी खरवार को पत्रकार चन्द्र कुमार तिवारी व अनिल द्वारा माल्यापर्ण कर स्वागत किया गया। कवियों में दुर्गा प्रसाद गुरु द्वारा रचित सरस्वती वन्दना का गायन हुआ। कवि अनन्त देव पाण्डेय ने भोजपुरी में ‘‘गौवो गांव बुझाते नइखे, कहुवो अब ऊ बाते नइखे’’ गा कर लोगों से वाहवाही लूटी।

डा. प्रेम शंकर जी द्वारा हास्य काव्य, अश्क गाजीपुरी, अनिलाभ द्वारा ’अब बस कर’, गोपाल गौरव व रश्मि साक्या द्वारा ’’लागी पीरितियां क डोर,’’ कुसुम तिवारी द्वारा प्रेम रस की प्रस्तुति व सतीश उपाध्याय द्वारा गाजीपुर जनपद की विशेषताओ व समस्याओ को करते हुए सुनाया– ‘‘चला गोरी घुमा लियाई गाजीपुर बजरियां में, मिश्रीरबाजार क गोलगप्पा खियाई’’… यह सब सुन लोग बरबस ताली बजा पड़े। कार्यक्रम के अन्त में दादा द्वारा कार्यक्रम का संचालन कर रहे कवि गजाधर शर्मा उर्फ ‘गंगेश जी’ को शाल व गाजीपुर पत्रकार एसोसिएशन का स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इसी क्रम में अनन्तदेव पाण्डेय, डा. प्रेम शंकर ’प्रेम’, अश्क गाजीपुरी, गोपाल गौरव, रश्मि साक्या को संस्था के संरक्षक द्वारा सम्मानित किया गया।

इस कार्यक्रम में सांध्य दैनिक ’काल भैरव’ के प्रधान सम्पादक राजेन्द्र अग्रवाल भी मौजूद थे। इस अवसर पर पत्रकार अनिल उपाध्याय, अशोक सिंह, अशोक श्रीवास्तव, गांधी, प्रमोद कुमार, शशिकान्त सिंह, शशिकान्त यादव, विनोद सिंह, नवीन श्रीवास्तव, विनोद पाण्डेय, विनोद सिंह, राजेन्द्र, अजय शंकर तिवारी, मुन्ना तिवारी, शेषनाथ, संजय चौरसिया, अधिवक्ताओ में सिविल बार एसोसिएशन के क. सचिव सैयद निगहतुल्लाह, अजय प्रताप सिंह पूर्व सचिव, हेमन्त राय, अजय तिवारी, अजय कुमार गुप्ता, अनूप श्रीवास्तव, प्रवीन तिवारी, योगेश वर्मा, राजेश श्रीवास्तव, नदीम अहमद आदि लोग उपस्थित थे।

गाजीपुर पत्रकार एसोसिएशन के कार्यकारिणी सदस्य चन्द्र कुमार तिवारी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित

पत्रकारों के सम्‍मान की धज्जियां उड़ाई दैनिक जागरण ने!

हमेशा दूसरे की हक और हुकूक की लड़ाई लड़ने वाली मीडिया आज कहां पहुंच गई है, इसकी बानगी देखने को मिला गाजीपुर में, जहां अपनी बेइज्‍जती और संगठन की लड़ाई में सहयोग देने के बजाय कुछ अखबार अधिकारियों के तलवे चाटने से बाज नहीं आ रहे हैं. जिला पंचायत अध्‍यक्ष पद के लिए नामांकन गाजीपुर कलेक्‍ट्रेट परिसर में हो रहा था. नामांकन को कवर करने के लिए कुछ मीडियाकर्मियों ने अंदर प्रवेश करने की कोशिश की तो वहां तैनात दरोगा ने सीडीओ के आदेश पर किसी को अंदर नहीं जाने दिया. यह बात मीडियाकर्मियों को नागवार लगी. जिसके बाद सभी मीडियाकर्मियों ने उक्‍त नामांकन का बहिष्‍कार करने का निर्णय ले लिया.

जिसमें दैनिक जागरण, हिन्‍दुस्‍तान, अमर उजाला, आज सहित कई अन्‍य अखबारों के पत्रकार एवं फोटोग्राफर शामिल थे. इन पत्रकारों के समर्थन एवं मीडिया के सम्‍मान में जनपद के अन्‍य प्रिंट एवं इलेक्‍ट्रानिक मीडिया के पत्रकारों ने बहिष्‍कार का समर्थन करते हुए नामांकन का कवरेज नहीं किया. लेकिन खुद को सबसे बड़ा अखबार कहने वाला दैनिक जागरण, जो आजकल सरकारी अखबार का खिताब पा चुका है, ने पत्रकारों के सम्‍मान की धज्जियां उड़ा दी. इसके फोटोग्राफर ने अपने सहयोगियों से दगा करते हुए अपने प्रिय अधिक‍ारियों डीएम, सीडीओ एवं सूचना अधिकारी की फोटो नामांकन कराते हुए व जांच करते हुए अपने अंक में छापा डाला. एक तरफ तो उक्‍त फोटोग्राफर बहिष्‍कार में समर्थन दिया वहीं दूसरे रास्‍ते अपने साथी के सहयोग से अंदर घुसकर अपने प्रिय अधिकारियों को भी खुश कर दिया कि हम पैसे के लिए कुछ भी कर सकते हैं. कुछ भी.

जानकारों के अनुसार उक्‍त अखबार को प्रतिमाह लाखों का सरकारी विज्ञापन मिलता है. जिसके चक्‍कर में ये आज अपना मान-सम्‍मान भी चौराहे पर बेच डाले. आगे ये विज्ञापन और अधिकारियों की चाटुकारिता के लिए क्‍या-क्‍या कर सकते हैं, कहने की जरूरत नहीं है.   जब इसकी जानकारी सुबह दूसरे मीडियाकर्मियों को हुई तो सभी उस बात पर हैरान थे. दूसरी तरफ जिला मुख्‍यालय पर चाय-पान की दुकानों पर कल के बहिष्‍कार की खबर को लोग चटकारे लेते हुए बात करते नजर आए. इन लोगों का कहना था कि आखिर इन मीडियाकम्रियों की क्‍या औकात, जो अपने संगठन का नहीं होगा वो दूसरों की क्‍या मदद करेगा, क्‍या साथ देगा. इनको बस 500-1000 का नोट दिखाओं और जो चाहो करा डालो.

गाजीपुर से एक पत्रकार की रिपोर्ट.

कम हो गई है कलम की धार

राष्‍ट्रीय पत्रकारिता दिवस के अवसर पर जिला सूचना अधिकारी कार्यालय, गाजीपुर में एक गोष्‍ठी का आयोजन किया गया. जिसमें ‘मीडिया तथा कारपोरेट वर्ल्‍ड की चुनौतियां और अवसर’ विषय पर चर्चा आयोजित की गई. गोष्‍ठी में जनपद भर से जुटे दर्जनों पत्रकारों ने अपने-अपने विचार रखे.  भारतीय प्रेस परिषद एवं निदेशक, सूचना व जनसम्‍पर्क विभाग उत्‍तर प्रदेश के आदेश पर इस कार्यक्रम को जिला सूचना विभाग ने आयोजित किया.

गोष्‍ठी में पत्रकारों ने कहा कि मीडिया के समक्ष इस समय चौतरफा चुनौतियां मौजूद हैं. पत्रकारों के लिए अब मिशन की पत्रकारिता करना मुश्किल हो गया है. क्‍योंकि अब ज्‍यादातर मीडिया हाउस गाजीपुर कारपोरेट हो गए हैं, जिन्‍हें अब जनपक्षधरता की बजाय लाभ-हानि का ध्‍यान ज्‍यादा रहता है. इस दौर में कलम की धार कम हो गई है और पत्रकार क्‍लर्क बनते जा रहे हैं.

कार्यक्रम में सहायक सूचना अधिकारी एसपी सिंह के अनुपस्थित रहने से पत्रकारों में नाराजगी देखी गई. कार्यक्रम का सफल आयोजन सूचना विभाग के लेखाधिकारी कृपा शंकर पांडेय ने किया. कार्यक्रम की अध्‍यक्षता वरिष्‍ठ पत्रकार कार्तिक कुमार चटर्जी ने किया.

कार्यक्रम में अशोक श्रीवास्‍तव, आरसी खरवार, अरविन्‍द कुमार, अजय शंकर तिवारी, अनिल कुमार, प्रवीण गुप्‍ता, चन्‍द्र कुमार तिवारी, आरिफ, सत्‍येन्‍द्र शुक्‍ला, राकेश पाण्‍डेय, अशोक सिंह, श्‍याम सिन्‍हा, राजेश सिंह सहित कई पत्रकार मौजूद रहे. धन्‍यवाद ज्ञापन पत्रकार एसोसिएशन के अध्‍यक्ष उधम सिंह ने किया.

चौकी इंचार्ज ने पत्रकार को किया अपमानित

: गाजीपुर में पुलिस की दबंगई जारी : गाजीपुर में गोरा बाजार चौकी इंचार्ज एक पत्रकार को कालार पकड़कर सबके सामने अपमानित किया। उक्‍त मामला त्रिस्‍तरीय पंचायत चुनाव की मतगणना के दौरान घटित हुई। सरकारी महकमें में पत्रकारों को फर्जी कहने का चलन सा हो गया है। उक्‍त दारोगा ने भी एक अखबार के पत्रकार को फर्जी कहकर मतगणना स्‍थल से बाहर निकाल दिया। इस घटना के बाद से जनपद के पत्रकारों में रोष व्‍याप्‍त है।

जनपद गाजीपुर के मीडियाकर्मियों को खुद अपने हस्ताक्षर से पास जारी करने वाले प्रभारी सहायक सूचना अधिकारी उन्हीं मीडियाकर्मियों को फर्जी कहते आ रहे थे। जिसके चलते दूसरे चरण के मतदान के बाद से ही जनपद के कई पत्रकार एसोसिएशन सूचना विभाग का बहिष्कार कर दिया तथा उक्त अधिकारी के बदलने की मांग पर अड़ गए थे। इसके बाद अब अन्य सरकारी कर्मियों ने भी जनपद के पत्रकारों को फर्जी कहना आरम्भ कर दिया है। जिसके चलते जनपद के मीडियाकर्मियों को प्रतिदिन अपमानित होना पड़ रहा है।

ताजा घटना त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दूसरे दौर के गणना के दिन का है। जहां पर वाराणसी से प्रकाशित प्रात: कालीन संस्करण समाचार ज्योति के पत्रकार विनोद गुप्ता, जो खबरों का संकलन करने के लिए, सुबह से ही डटे हुए थे। कई घण्टों  तक खड़ा रहने के बाद जब वे मतगणना स्‍थल से पानी पीने के लिए वे बाहर सड़क पर आए तो सुरक्षा मे तैनात गोरा बाजार चौकी इंचार्ज श्रीधर पाण्डेय ने पहले तो अपशब्दों का प्रयोग करते हुए उन्हें रोका। जब उन्‍होंने चौकी इंचार्ज को सूचना विभाग से जारी पास दिखाया तो उसे फर्जी बताते हुए हजारों लोगों की भरी भीड़ के सामने कालर पकड़ कर बैरियर के बाहर तक धक्‍का देकर निकाल दिया गया। इस दौरान इस दरोगा ने उक्‍त मीडियाकर्मी को अपशब्‍द कहने के साथ यह भी कहा कि मुझे मालूम है जनपद में बहुत ज्‍यादा फर्जी पत्रकार हो गये हैं। ऐसे फर्जी पत्रकारों को पास भी जारी किया गया है।

जब इस बात की जानकारी एएसपी शलभ माथुर को पत्रकार एसोसिएशन के लोगों ने दिया तो वे तुरन्त मौके पर पहुंचे। मामले की गम्भीरता को समझते हुए उन्‍होंने उक्त दरोगा के कृत्यों के लिए खुद माफी मांगी। हालांकि इस दौरान भी उक्त दरोगा अपनी गलती मानने को तैयार नही था। हालांकि सूत्र बताते हैं उक्‍त दारोगा बहुत ही शातिर किस्‍म का है। उक्त दरोगा के पास एक मास्टर चाभी है, जिसकी सहायता से वो आए दिन कचहरी या फिर भीड़भाड़ वाले स्थान से मोटर साइकिल उठवाकर कोतवाली पहुंचा देता है। जब भुक्त भोगी अपनी गाड़ी की चोरी का मुकदमा दर्ज कराने पहुंचता है तो इधर-उधर की बात कह कर मोटी रकम वसूली जाती है, इसके बाद ही भुक्‍तभोगी की गाडी वापस होती है।

गाजीपुर से अनिल कुमार की रिपोर्ट.

गाजीपुर के पत्रकारों ने कहा- शेम शेम पुलिस

justice for मांगाजीपुर पत्रकार एसोसिएशन की कैम्प कार्यालय, टैगोर मार्केट, कचहरी,  गाजीपुर में आयोजित एक बैठक में गाजीपुर पुलिस के रवैए को शर्मनाक करार दिया गया. बैठक में भडास4मीडिया के सीईओ व एडिटर यशवंत सिंह जे गाजीपुर के नन्दगंज थाने के बनगांवा गांव में रहने वाले परिजनों के साथ पुलिस के शर्मनाक व्यवहार की निंदा की गई. बैठक में कहा गया कि गाजीपुर निवासी यशवंत वर्तमान में दिल्ली रहकर अपना कार्य कर रहे हैं. उनकी मां गांव पर ही रहती हैं. पिछले दिनों पंचायत चुनाव को लेकर हुए हत्या के बाद पुलिस आरोपियों पर शिकंजा कसने के लिए इनकी मां यमुना सिंह के साथ ही उनकी विकलांग चाची जो चल फिर पाने में असमर्थ हैं, के साथ ही 2 अन्य महिलाओं को थाने पर पूरी रात व अगले दिन दोपहर तक अवैध तरीके से बैठाये रखा.

इन निर्दोष महिलाओं के खिलाफ न कोई शिकायत थी और न ही कोई तहरीर या एफआईआर. बावजूद इसके स्थानीय पुलिस अपने बड़े अफसरों के निर्देश पर नियम कानून को भूलकर कार्य करती रही. इन महिलाओं को पुरुष थाने पर रखा गया. थाने लाते समय कोई महिला पुलिस नहीं थी. भूखे प्यासे 12 से 18 घंटे तक थाने में रहीं इन महिलाओं को तभी घर जाने दिया गया जब इनके परिवार के एक युवक ने सरेंडर कर दिया जिनका नाम एक एफआईआर में था. पत्रकार एसोसियेशन के सदस्यों ने पुलिस के इस कृत्य की निन्दा की और कहा कि जब एक पत्रकार की मां को घंटों पुलिस थाने में बिठाया जा सकता है तो आम इन्सान की क्या बिसात.

एक दूसरा मामला पंचायत चुनाव के दुसरे चरण के समाचार संकलन से संबंधित है. सूचना विभाग ने पत्रकारों के लिए एक खटारा वाहन उपलब्ध कराया था. इसमें विभाग के बड़े बाबू सहित 9 पत्रकार बैठ कर जा रहे थे. उन पत्रकारों में एक मान्यता प्राप्त पत्रकार थे जिनके पास प्रदेश सरकार के द्वारा निर्गत मछली छाप वाला पास भी उपलब्ध है, के वाहन का चक्का निकल जाने से वाहन क्षतिग्रस्त हो गया और पत्रकारों की जान जाते जाते बची. इसके बाद पत्रकारों ने वैकल्पिक व्यवस्था के लिए जनपद के आला अधिकारियों के यहां लगातार फोन किया लेकिन किसी ने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा. जब प्रभारी सूचना अधिकारी को इस बात की जानकारी इलेक्ट्रानिक चैनल के लोगों ने दी तो उनका कथन था का उस गाड़ी में बैठे सभी पत्रकार फर्जी हैं, उनका समाचार से कोई लेना देना नहीं है. वे सभी तफरी करने के लिए गये हैं. बैठ कर इन्तजार करें. इस कथन की सभी पत्रकारों ने कड़ी आलोचना की और सभी ने एक स्वर में कहां कि इस विभाग का प्रभार किसी और को दे देना चाहिए. पत्रकारों ने यह निर्णय लिया कि वे लोग तीसरे चरण के मतदान कवरेज का बहिष्कार करेंगे. इस बात की सूचना फैक्स व रजिर्स्टड डाक से प्रमुख सचिव, सूचना निदेशक लखनउ, मुख्यमंत्री व जिलाधिकारी को दे दी गई है.

बताते चलें कि जनपद के लगभग 200 पत्रकारों को खुद सूचना अधिकारी जो वर्तमान में अल्प बचत अधिकारी व विकलांग विभाग का भी प्रभार देख रहे हैं, के हस्ताक्षर से पास जारी किया गया है. और उक्त वाहन में जाने वाले सभी पत्रकारों के पास भी उनके हस्ताक्षर से जारी पास था. फिर भी वे सभी पत्रकारों को फर्जी घोषित कर रहे हैं जो शर्मनाक है. ऐसे में अब पत्रकारों को ये समझ में नही आ रहा है कि उक्त पास फर्जी है, या पास पर किया हस्ताक्षर फर्जी है या इनके पास प्रदेश सरकार के द्वारा कोई नया डाटा उपलब्ध कराया गया है जिसको देखने के बाद इन्हें पता चला कि मैंने जो पास जारी किया है उसमें से 9 पत्रकार फर्जी हैं जो वाहन से तफरी करने के लिए घूम रहे हैं. इस बैठक में पत्रकार अशोक सिंह, अशोक श्रीवास्तव, कार्तिक चटर्जी, अरविन्द जी, अनिल उपाध्याय, नवीन श्रीवास्तव, आरसी खरवार, चन्द्र कुमार तिवारी, अजय तिवारी, रविन्द्र सैनी, राजेश सिंह, शशिकान्त सिंह, शशिकान्त यादव, विश्वनाथ यादव, राजेन्द्र प्रसाद, प्रवीण गुप्ता, प्रमोद राय आदि पत्रकार उपस्थित रहे. इस बैठक की अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष उधम सिंह ने किया व संचालन महामंत्री अनिल कुमार ने किया. PR

गाजीपुर में ‘हिंदुस्तान’ की प्रतियां फुंकी

यूपी के गाजीपुर जिले से खबर है कि वहां बड़े पैमाने पर हिंदुस्तान अखबार की प्रतियां जलाई गईं. घटनाक्रम के मुताबिक  थाना दिलदारनगर के कुशी गांव में दलितों-मुसलमानों के बीच किसी बात पर कहासुनी हो गई. स्थानीय लोगों के मुताबिक दलितों का पक्ष लेकर जमानिया सर्किल के क्षेत्राधिकारी हरिभजन आर्य ने मुसलमानों से अभद्रता कर दी.

इससे मुसलमान नेता नाराज हो गए और सीओ की बर्खास्तगी की मांग पर अड़ गए. ये लोग जिले के अधिकारियों से मिले. सीओ के तबादले का इन्हें आश्वासन भी मिला. पर सीओ जमे रहे. इससे खफा कई गांवों के मुसलमानों ने दिलदारनगर थाना घेरने का मन बनाया. स्थानीय प्रशासन ने घेराव वाले 26 जून के दिन थाना क्षेत्र में धारा 144 लगा दिया. पर थाने के सामने लगभग 5000 से ज्यादा मुसलमान इकठ्ठा हो गए.

धारा144 के बावजूद धरना दिया और जनसभा की. इसमें कई दलों के नेता शामिल हुए. यह खबर सभी अखबारों में प्रमुखता से प्रकाशित हुई. सभी ने धरना-प्रदर्शन को सफल बताया. पर हिंदुस्तान अखबार में धरना-प्रदर्शन को नाकाम बताया गया. इससे हिंदुस्तान अखबार के प्रति स्थानीय लोगों में गुस्सा भर गया. नाराज लोगों ने विभिन्न क्षेत्रों में 28 जून को हिन्दुस्तान दैनिक अखबार की सभी प्रतियों को अपने कब्जे मे लेकर आग के हवाले कर दिया और अखबार प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की.

उमरिया के पत्रकार भी अफसरों से हैं नाराज

पीआरओ को ज्ञापन सौंपते जिले के पत्रकारयूपी के गाजीपुर जिले में ब्लैकमेलर कहे जाने से पत्रकार नाराज हो गए हैं तो मध्य प्रदेश के उमरिया जिले से खबर है कि जिले भर के पत्रकार जिला प्रशासन के लोगों के असम्मानजनक व्यवहार से परेशान हो गए हैं. इसी कारण पिछले दिनों एक बैठक के बाद उमरिया के पत्रकारों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा. पत्रकारों ने ज्ञापन में कई सवाल पूछे हैं और कई मांग उठाई है, जो इस प्रकार हैं-

  1. जिले में संपन्न नगरीय निकाय चुनाव वर्ष 2009 व त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2009-10 में निवार्चन प्रक्रिया में नियमों की जानकारी देने हेतु जिला प्रशासन द्वारा पत्रकारों से प्रेस वार्ता नहीं किये जाने की वजह स्पष्ट की जाये।

  2. माननीय मुख्यमन्त्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि हर तीन माह में जिला प्रशासन जिले में पत्रकार वार्ता आयोजित करेगा, लेकिन उमरिया जिले में इसका परिपालन जिला प्रशासन द्वारा नहीं किया जा रहा है। ऐसा क्यों?

  3. त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के प्रथम चरण की मतगणना के दौरान करकेली में जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा जिले के पत्रकारो एवं मीडियाकर्मियों को अपमानजनक तरीके से लाउडस्पीकर से ऐलाउन्स करवाकर मतगणना स्थल से बाहर करने की घटना लोकतन्त्र के प्रहरी कहे जाने वाले पत्रकारो का घोर अपमान है। जिला निर्वाचन अधिकारी समस्त पत्रकारों के समक्ष चर्चा कर अपनी गलती स्वीकार करें ।

  4. दिनांक 03/02/10 को मानपुर मे सारणीकरण के दौरान ग्राम पंचायत बांधारथेली के मतदान क्रमांक 231 (क) का मतगणना परिणाम का लिफाफा गुम होने की खवर की कवरेज करते समय तहसीलदार अशोक सिंह मराबी द्वारा मीडियाकर्मियों पर हमला करते हुए एक मीडियाकर्मी का कैमरा तोड़ दिया गया। उस समय एस.डी.एम. मानपुर बी.डी.सिंह एवं रिटर्निंग आफीसर वाईआर तुमराने मौजूद रहे लेकिन तहसीलदार को रोकने की कोशिश नहीं की। पूरे मामले पर पत्रकारों से चर्चा कर मीडियाकर्मी को हुई आर्थिक क्षति की भरपाई की जाये व दोषी अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्यवाही की जाये।

पत्रकारों ने कलेक्टर को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर समय सीमा के अन्दर निराकरण ना हुआ तो समस्त पत्रकार जिला प्रशासन के कार्यक्रमों व सरकारी प्रेस विज्ञप्तियों का बहिष्कार करेंगे. साथ ही, जिले के दौरे पर आने वाले मंत्रियों-नेताओं के सामने काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। ज्ञापन पर इन पत्रकारों के नाम हैं- लक्ष्मी शंकर उपाध्याय, रणजीत सिंह, सुरेन्द्र त्रिपाठी, रजनीश सिंह, राज कुमार सिंघई, बिजेन्द्र तिवारी, अशोक गर्ग, चन्द्र प्रकाश शुक्ला, राहुल सिंह, वीरेन्द्र सिंह, चन्द्रिका राय, कौशल विश्वकर्मा, दीप नारायण सोनी, राकेश दर्दवंशी, अशोक सोनी, राजा तिवारी, राजू शर्मा, अरूण त्रिपाठी, मोहसिन खान, बृजेश श्रीवास्तव, फिरोज खान, नीरज यादव, मान सिंह, शाहिद खान, राजेश शर्मा, संजय तिवारी, सन्तोष सिंह, इन्द्र कुमार पाण्डेय, गोपाल तिवारी, नरेन्द्र देव बगड़िया, धर्मराज सिंह।

डीएम ने ‘ब्लैकमेलर’ कहा तो भड़क गए पत्रकार

गाजीपुर के पत्रकारों ने बैठक कर कहा- आरोप साबित करें अन्यथा माफी मांगें जिलाधिकारी : यूपी के गाजीपुर जिले के पत्रकार बेहद गुस्से में हैं. उनकी नाराजगी जिलाधिकारी हृदयेश कुमार से है. डीएम ने पत्रकारों को सार्वजनिक तौर पर ‘ब्लैकमेलर’ कह दिया. इसी से पत्रकार भड़क गए हैं. गाजीपुर के पत्रकारों की पीड़ा है कि जिलाधिकारी हृदयेश कुमार जनपद के पत्रकारों को बार-बार अपमानित करते रहते हैं. इसी क्रम में उन्होंने कल मण्डलायुक्त वाराणसी एनएस रवि की प्रेसवार्ता के दौरान पत्रकारों को ‘ब्लैकमेलर’ तक कह डाला.

डीएम के इस आरोप से नाराज पत्रकारों ने आज दोपहर कचहरी स्थित पत्रकार प्वाइंट पर एक आपात बैठक का आयोजन किया. बैठक में जिलाधिकारी द्वारा पत्रकारों के प्रति लगातार गलत नज़रिया रखने व गलत बयानी करने पर घोर असन्तोष व्यक्त किया.  डीएम से मांग की गई कि वे आरोप साबित करें अन्यथा पत्रकारों से माफी मांगें. बैठक में पत्रकारों ने कहा कि बिना किसी तथ्य के पत्रकारों को सार्वजनिक तौर पर ब्लैकमेलर कहना पत्रकार वर्ग को अपमानित करना है. पत्रकारों ने डीएम से कहा है कि वे अपने आरोपों की पुष्टि के लिए प्रेस कौसिंल, सूचना निदेशालय/समाचार पत्रों के सम्पादक अथवा अदालत में जाएं और जिन पत्रकारों ने उन्हें ब्लैकमेल किया हो, उसके खिलाफ कार्रवाई कराएं. यदि वे ऐसा नहीं करते हैं तो पत्रकार इस बात को प्रेस कौंसिल के समक्ष ले जाकर जिलाधिकारी के खिलाफ कार्यवाही की मांग करेंगे.

पत्रकारों की बैठक में ‘गाण्डीव’ के प्रतिनिधि कार्तिक कुमार चटर्जी, ‘न्यायाधीश’ से आरसी खरवार, ‘तरूण मित्र’ से प्रमोद कुमार राय, पीटीआई / जनसत्ता / आकाशवाणी से जयप्रकाश भारती, ‘सन्मार्ग’ से अनिल कुमार उपाध्याय, ‘पंजाब केसरी’ से राजेश सिंह, ‘काशी वार्ता’ से उधम सिंह, अशोक सिंह, ‘यूनाइटेड भारत’ से चन्द्र कुमार तिवारी, ‘काल भैरव’ से अजय शंकर तिवारी, ‘वार्ता’ से नवीन कुमार श्रीवास्तव, ‘जी न्यूज’ से अनिल कुमार, ‘आज तक’ से विनय सिंह, ‘ईटीवी’ से मनीष मिश्रा, ‘अमृत प्रभात’ से धर्मदेव राय के साथ कई अन्य पत्रकार भी उपस्थित थे.