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दर्द से कराहता रहा मासूम, तड़पती रही मां, नहीं आए डॉक्‍टर

: अमित को न्‍याय दिलाओ मीडियावालों : तकलीफ से कराह रहे बच्चे को लिये रो रही मां का दर्द सुनने वाला शायद सदर अस्पताल में कोई नही था. बच्चे के कान से लगातार कान से खून बह रहा था और बच्चे की हालात चिंताजनक बनी हुई थी, पर सदर अस्पताल के भगवान कहे जाने वाले डाक्टर का कोई आता पता नही था. ऐसे हालात में एक गरीब मां अपने बच्चे को लेकर कहां जाए उसकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था.

: अमित को न्‍याय दिलाओ मीडियावालों : तकलीफ से कराह रहे बच्चे को लिये रो रही मां का दर्द सुनने वाला शायद सदर अस्पताल में कोई नही था. बच्चे के कान से लगातार कान से खून बह रहा था और बच्चे की हालात चिंताजनक बनी हुई थी, पर सदर अस्पताल के भगवान कहे जाने वाले डाक्टर का कोई आता पता नही था. ऐसे हालात में एक गरीब मां अपने बच्चे को लेकर कहां जाए उसकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था.

जब हमारी नजर दर्द से तड़प रहे इस बच्चे पर पड़ी तो हमने सबसे पहले अस्पताल में नर्स के लिखे उस दवा की पर्ची को देखा, जिस पर अस्पताल में अनुपलब्‍ध दवा लिखे गए थे. सबसे पहले वहां पहुंचे महुआ न्‍यूज के पत्रकार ने अपने पैसे से दवा बाहर से मंगवाया फिर उन्‍होंने ये जानने की कोशिश की कि डाक्‍टर साहब कहां हैं? डाक्‍टर को खोजते घंटों बीत गए.

नीचे आप जो तस्‍वीर देखेंगे वो उस वक्‍त का है जब अमित जिंदा था. जी हां! अमित को बचाया जा सकता था, लेकिन डाक्‍टरों की लापरवाही के कारण उसकी मौत हो गई. यह मामला पूर्णिया के सदर अस्‍पताल का है, जहां एक दो घंटे नहीं बल्कि पूरे छह घंटे दर्द से कराहते हुए अमित ने अपनी जान गंवा दी. ऐसे में सवाल यह है कि कहां गया सुशासन सरकार का दावा. हैरत की बात है कि इस मामले में पूर्णिया के सर्जन हर बार बयान बदलते देखे गए. इतना ही नहीं वे मीडिया वालों से गुंडई करने पर भी उतर आए और मीडिया वालों को धमकाने लगे.

मैं महुआ न्‍यूज के पत्रकार के इंसानियत का कायल हो गया. उसने ना सिर्फ अमित के लिए अपने पैसे से दवा मंगाई बल्कि उसने खबर को भी प्रमुखता से भेजा, इसके बाद सहारा समय और आर्यन टीवी ने इस खबर को प्रमुखता दी. अन्‍य किसी चैनल ने अमित को न्‍याय दिलाने के लिए कोई पहल नहीं की है. क्‍या सभी पत्रकारों की संवेदना मर गई है या सभी पत्रकार सरकार के तलवे चाटने लगे हैं! सभी पत्रकारों से आग्रह है कि वो अमित को न्‍याय दिलाने की पहल करें ताकि आगे किसी अमित की डाक्‍टरों की लापरवाही से असमय मौत न हो सके.

सुशासन का सच और डाक्‍टरों की लापरवाही के लिए वीडियो देखें – तड़प तड़प कर मासूम की मौत

पूर्णिया से अंकुर कुमार की रिपोर्ट.

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0 Comments

  1. rajeev azad

    August 11, 2011 at 2:36 am

    mahua news ke reporter ko thanks. jisne sahi mayne me jouranalisam ki ejjat bachai. bihar ke sare akhabar wale nitish ke rakhel hain…

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