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‘दिवास’ और ‘देवास’ : पत्रकारिता का सत्‍यानाश

यशवंत जी, आज से लगभग तीन-चार दशक पहले हर बेरोजगार की तमन्ना मास्टर बनने की होती थी, बाद के समय में यह आकांक्षा पत्रकार बनने तक सीमित हो चली. इसका असर यह हुआ कि गली नुक्कड़ों पर पत्रकार पैदा करने की दुकानें खुल गईं. इसका खामियाजा यह हुआ कि ऐसे ‘पत्रकारों’ की पौध सामने आ रही है, जो पत्रकारिता को कलंकित कर रही है. पत्रकारिता पहले मिशन हुआ करती थी, बाद में यह प्रोफेशन हुई और अब सेंसेशन बन गई है. बहरहाल एक बड़ी एजेंसी की एक खबर इसका उदाहरण हो सकती है.

यशवंत जी, आज से लगभग तीन-चार दशक पहले हर बेरोजगार की तमन्ना मास्टर बनने की होती थी, बाद के समय में यह आकांक्षा पत्रकार बनने तक सीमित हो चली. इसका असर यह हुआ कि गली नुक्कड़ों पर पत्रकार पैदा करने की दुकानें खुल गईं. इसका खामियाजा यह हुआ कि ऐसे ‘पत्रकारों’ की पौध सामने आ रही है, जो पत्रकारिता को कलंकित कर रही है. पत्रकारिता पहले मिशन हुआ करती थी, बाद में यह प्रोफेशन हुई और अब सेंसेशन बन गई है. बहरहाल एक बड़ी एजेंसी की एक खबर इसका उदाहरण हो सकती है.

इसरो घोटाले में शामिल बताई जा रही ‘दिवास’ नाम की एक कंपनी को हिंदी मीडिया ‘देवास’ लिख-पढ़ रहा है. यहाँ तक तो सब चल सकता था, मगर हद तो तब हो गई जब इस एजेंसी द्वारा जारी एक समाचार आज कई अखबारों में प्रकाशित हुआ. इस समाचार में डेटलाइन देवास बताई गई है, जो कि मध्य प्रदेश का एक धार्मिक नगर है, इंदौर के पास स्थित देवास एक औद्योगिक शहर तो है, मगर घोटाले वाले ‘दिवास’ से उसका दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है. दिवास का मुख्यालय बैंगलुरू में है, जो खबर वाले देवास से लगभग डेढ़ हजार किलोमीटर दूर है.

देवास

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0 Comments

  1. Sumit1

    February 11, 2011 at 12:59 pm

    Deda Gark

  2. anil pandey

    February 11, 2011 at 7:23 pm

    उपदेश जी ने एक गंभीर त्रुटि की ओर ध्यान दिलाया है

  3. ravindra

    February 12, 2011 at 5:20 am

    ye baat sahi hai kyo ki mai dewas ka hi hu aur mai bhi ye sochne par majboor ho rahah tha ki dewas kese ho sakta hai chuki dewas jana 4 saal se sambhaw nahi hua is liye soch liya ki ye sab wakya dewas ka hi hoga….

  4. manojkumar

    February 12, 2011 at 10:20 am

    updesh ne jo likha waisha hi hum sub ko likhana chahiye. updesh achha laga.

  5. S KUMAR

    February 14, 2011 at 8:58 am

    GALT BAAT HEI BHAI DEWAS CITY KO KYU BADNAAM KARKTE HO

  6. amitvirat

    February 15, 2011 at 4:50 am

    Main kareeb ek saal se dewas mein hi patrakeita kar raha hoon aisi koi mamla huamare saamne nahin aaya. yeh khabar pad kar to yahi lag raha hai waqai mein media mein zahilon ki fauz shamil ho gai hai jise hey nahin pata hai ki dewas madhya prdesh ki dharmik aur audyogik nagri hai iske sath hi indore ke paas ka oh shaher hai jahan bhavishya mein indore aur dewas ka fark bhi khatm ho jayega dewas se matra 35 kilomtre door hai uar ek doosre shaher se lagbhag juda hua. khabar likhne wale ko yeh sochna chahiye ki aisi khabar likhne ase shaher aur yahan vashindon par nakaratmak asar padta hai.

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