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दीवालिया विजय माल्या की दीवाली

[caption id="attachment_18347" align="alignleft" width="57"]आलोक तोमरआलोक तोमर[/caption]राज्यसभा में दूसरी बार अपने लिए एक सीट खरीद लेने वाले विजय माल्या भारत सरकार की तेल कंपनियों का उधार नहीं चुका रहे हैं। उनकी कंपनी किंग फिशर सबसे बड़े कर्जदारों में से एक है। मगर भारत सरकार, खास तौर पर तेल मंत्री मुरली देवड़ा पर विजय माल्या का जादू चलता है। इसी कारण विजय माल्या बिलकुल मजे में जी-खा रहे हैं।

आलोक तोमर

आलोक तोमर

राज्यसभा में दूसरी बार अपने लिए एक सीट खरीद लेने वाले विजय माल्या भारत सरकार की तेल कंपनियों का उधार नहीं चुका रहे हैं। उनकी कंपनी किंग फिशर सबसे बड़े कर्जदारों में से एक है। मगर भारत सरकार, खास तौर पर तेल मंत्री मुरली देवड़ा पर विजय माल्या का जादू चलता है। इसी कारण विजय माल्या बिलकुल मजे में जी-खा रहे हैं।

मुरली देवड़ा पर माल्या के जादू का ही असर है कि माल्या के सबसे बड़े कर्जदार होने के बावजूद जांच ऐसी कंपनी की हो रही है जो सबसे कम उधारी लेने वालों में से एक है। विजय माल्या अपनी रईस और महंगी आदतों के लिए जाने जाते हैं। कार की जगह हैलीकॉप्टर में चलते हैं और रेल में तो कभी बैठते ही नहीं हैं। कई द्वीपों के मालिक हैं। दावत देने के इरादे से उन्होंने एक अच्छा खासा पानी का जहाज भी खरीद रखा है। लेकिन भारत सरकार की कंपनियों खास तौर पर हिंदुस्तान पेट्रोलियम के छह सौ करोड़ से ज्यादा उन्होंने दबा कर रखे और कंपनी भी मुरली देवड़ा के दबाव में माल्या को जम कर उधार देती रही। यह उधारी केंद्रीय सतर्कता आयोग और कानूनी सलाह के बावजूद चलती रही।

विमान यात्रा सेवा का परिचालन करने वाली देश की तमाम निजी कंपनियों पर सरकार का 304.65 करोड़ रुपया बकाया है। लगातार नोटिस भेजे जाने के बावजूद इस धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है। दिलचस्प बात यह है कि बकाया भुगतान नहीं करने के मामले में सरकार की ओर से केवल एक एयरलाइन पैरामाउंट एयरवेज पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके पास सबसे कम बकाया राशि 4.53 करोड़ रुपये है।

सूचना का अधिकार कानून के तहत प्राप्त जानकारी के मुताबिक देश में परिचालन करने वाली एयरलाइनों में सरकार की सबसे अधिक लेनदारी किंगफिशर एयरलाइंस पर है। किंगफिशर को 184.87 करोड़ रुपये का भुगतान करना है। इसमें 166.69 करोड़ रुपये यातायात और 18।18 करोड़ रुपये गैर यातायात मद में बकाया हैं। जेट एयरवेज पर सरकार का 36.34 करोड़ रुपये है। इसमें यातायात मद में 28.18 करोड़ रुपये और गैर यातायात मद में 8.16 करोड़ रुपये हैं। ऐसे ही जेट लाइट एयरवेज, इंडिगो एयरलाइंस, स्पाइस जेट, गो एयरलाइंस सरकार की बकायेदार हैं। इसके अतिरिक्त अन्य एयरलाइनों पर सरकार के 36.64 करोड़ रुपये शेष हैं। इसमें यातायात मद में 30.57 करोड़ और गैर यातायात मद में 6.07 करोड़ रुपये शामिल हैं।

सूचना का अधिकार कानून के तहत हिसार के आरटीआई कार्यकर्ता नरेश सैनी ने देश की निजी एयरलाइनों पर सरकार के बकाए का ब्यौरा तथा धन की वसूली के संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी थी। जानकारी देते हुए भारतीय विमानपत्तान प्राधिकरण की सहायक महाप्रबंधक गायत्री वी। ने बताया कि निर्धारित अवधि में राशि का भुगतान नहीं करने वाले बकायदारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। दंड स्वरूप इनसे ब्याज भी वसूला जाता है।

वसूली बाकी – एयरलाइन बकाया- किंगफिशर 184.87, जेट एयरवेज 36.34, जेट लाइट 14.66, इंडिगो एयरलाइंस 11.19, स्पाइस जेट 11.13, गो एयर 5.29, पैरामाउंट एयरवेज 4.53 और अन्य 36.64। (रुपये करोड़ में)

लेखक आलोक तोमर देश के जाने-माने पत्रकार और डेटलाइन इंडिया के संपादक हैं.

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