दैनिक जागरण के खिलाफ थानों में तहरीरें देकर मुकदमा कायम करने का सिलसिला जोर पकड़ गया है। चौरी में एक और कपसेठी थाने में दो तहरीरें थानों में दी गयी हैं और वहां के एसओ इनपर कौन सी धाराएं लगायी जाएं इनपर संबंधित लोगों से पूछताछ करते देखे जा रहे हैं। ज्ञात हो कि दैनिक जागरण ने विगत दिनों माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल-इंटर की परीक्षाओं में खुलेआम हो रहे नकल को दर्शाते हुए फोटो सहित कई रिपोर्ट्स छापी थी।
इसमें राज्य के एक काबीना मंत्री के विद्यालय का भी नाम था। स्वस्थ पत्रकारिता का दिग्दर्शन करने पर जागरण को विभिन्न विद्यालयों ने अपने निशाने पर लिया है जिनकी जागरण टीमों ने पोल खोली थी। कपसेठी थाने में जागरण के एल एम त्रिपाठी, सुरेन्द्र सिंह तथा तीन अन्य लोगों के खिलाफ आइ पी सी की धारा ३८४, ५०६ और परीक्षा अधिनियम की धारा ६ के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
मजे की बात यह कि नकल करने और कराने वालों के खिलाफ एक्शन लेने की जगह नकल की पोल खोलने वाली दैनिक जागरण वाराणसी की टीम के खिलाफ थानों में एफआईआर दर्ज करायी जा रही है। प्रदेश में पहली बार नकल की फोटो छपने पर किसी के खिलाफ एफआईआर हुई है। चर्चाकारों का कहना है कि मंत्री के निर्देश के बाद अब हर उस विद्यालय का प्रबंधक एफआईआर कराने जा रहा है जिसकी फोटो व खबर छापी गयी है। यानी अभी एक दर्ज हुई है, आठ और कतार में हैं। एक नोटिस भी आज भेज दी गयी है। वाराणसी में एक नारा गूंज गया है-नकल माफिया की जय हो!
यही नहीं जिले के चौबेपुर थाने में एक एफआईआर लिखायी गयी है जो चार अज्ञात लोगों के खिलाफ है। एफआईआर लिखाने वाले माध्यमिक शिक्षा परिषद के एक कालेज के केंद्र व्यवस्थापक की दलील है कि चार अज्ञात लोग कालेज परिसर में घुस आए और बिना अनुमति फोटो खींची। जबकि परीक्षा नियमावली के अनुसार यह गैरकानूनी है। यह कृत्य परीक्षा नियम विरुद्ध होने की वजह से यह एफआईआर लिखायी जा रही है। पुलिस को जांच कर कार्रवाई करनी चाहिए। पुलिस को यह भी पता करना चहिए कि वे कौन लोग थे। चूंकि, केंद्र व्यवस्थापक को नहीं पता कि वे कौन लोग थे लिहाजा पुलिस को जांच करनी होगी। सुना गया है कि कुछ और स्कूलों ने पुलिस को तहरीर दी है कि उनके यहां भी कुछ लोग घुस आए थे और फोटो ली थी। दैनिक जागरण पर मुकदमे की गूंज विधानसभा तक होने की संभावना जताई जा रही है। साभार : पूर्वांचलदीप












राजा लहुराबीर
March 30, 2011 at 2:47 pm
इलाहाबाद से लगायत बनारस तक एलएन त्रिपाठी के नाम का कवनौ जोड नहीं है। ई समाचार भी एलएन त्रिपाठी का ही लिखा था। बडी धाकड रिपोर्टिंग करते हैं त्रिपाठी जी। दैनिक जागरण का नाम ऐसे ही लोगों के प्रयासों से ही आज ऊंचा है। लेकिन जागरण प्रबंधन, उनके कारिंदे, चमचे, और ऐेसे स्थानीय सम्पादक तथा समाचार प्रभारी भी हैं जो ऐसे धाकड और खबर के लिए जूझने की भसोट रखने वालों को अपमानित करते रहते हैं।
यह वही एलएन त्रिपाठी जी हैं जिनको इलाहाबाद के उस सम्पादक ने अपमानित कर बनारस तबादला कर दिया जो लखनऊ में अफसरों की चापलूसी और अपने संस्थान में लडचटाई में नम्बर एक माना जाता था, और उसी के चलते वह इलाहाबाद का समाचार प्रभारी बना।
अरे गुप्ताओं, अब तो शर्म करो। वरना पाठक खुद ही तुम लोगों को शर्मसार कर देंगे, अगर ऐसे पत्रकारों का अपमान होता रहा तो। खुद ही देख लो कि तुम्हारा वह समाचार प्रभारी काबिल है, या चंद रूपये तनख्वाह पाकर भी किसी कालेज प्रबंधक या मंत्री को लतिया-जुतिया कर केवल खबर को अपना कैरियर बनाने वाले एलएन त्रिपाठी जैसे पत्रकार। अरे दम हो तो उस समाचार प्रभारी को लतियाओ ना। काहे को गरीब मगर साहसी पत्रकारों को लतियाते हो लतखोरों।
kk chauhan
April 5, 2011 at 3:23 pm
राजा लहुराबीर ne bhut hi acaha or vastvikta ka ulleKh kiya hai
kk chauhan