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दोस्‍ती के असली मतलब

आलोक तोमर मैं पहली बार भड़ास के कार्यालय में आया हूं और बहुत अच्‍छा लग रहा है. इसलिए नहीं कि कार्यालय बहुत भव्‍य और कारपोरेट संस्‍कृति का है लेकिन इसकी आत्‍मीयता, सरलता और काम के प्रति प्रतिबद्धता हर कोने में नजर आती है. यहां आने का पहले कोई इरादा नहीं था क्‍योंकि यहां आए बगैर भी कई वर्ष से भड़ास अपनी ही जगह बन गई है लेकिन यों ही यशवंत से बात हुई रास्‍ते भटकते हुए आ पहुंचा. सबसे पहले तो यह है कि पिछली बार आपने इन्‍हीं पन्‍नों पर पढ़ा था कि मेरा कैंसर फैल गया है और मैं खतरे की सीमा में आ गया हूं. कैंसर का इलाज चल रहा है और यहां आप गौर करें कि मैंने लिखा है कि इलाज मेरा नहीं कैंसर का चल रहा है.

आलोक तोमर मैं पहली बार भड़ास के कार्यालय में आया हूं और बहुत अच्‍छा लग रहा है. इसलिए नहीं कि कार्यालय बहुत भव्‍य और कारपोरेट संस्‍कृति का है लेकिन इसकी आत्‍मीयता, सरलता और काम के प्रति प्रतिबद्धता हर कोने में नजर आती है. यहां आने का पहले कोई इरादा नहीं था क्‍योंकि यहां आए बगैर भी कई वर्ष से भड़ास अपनी ही जगह बन गई है लेकिन यों ही यशवंत से बात हुई रास्‍ते भटकते हुए आ पहुंचा. सबसे पहले तो यह है कि पिछली बार आपने इन्‍हीं पन्‍नों पर पढ़ा था कि मेरा कैंसर फैल गया है और मैं खतरे की सीमा में आ गया हूं. कैंसर का इलाज चल रहा है और यहां आप गौर करें कि मैंने लिखा है कि इलाज मेरा नहीं कैंसर का चल रहा है.

कुल मिलाकर कैंसर को ठीक किया जा रहा है कि वह मेरी काया से अपने आप को बचाए. कैंसर लगा हुआ है, देखते हैं कब तक अपने आपको बचाता है. जब भड़ास कार्यालय आ रहा था तो कार से उतरते ही यशवंत ने छोटे भाई की तरह पूछा कि पैदल चलने में तो कोई दिक्‍कत तो नहीं होगी. सच मानिए कि सोच कर नहीं बोला था, मगर दिल से निकला और कहा कि मैं तो मरघट पर भी जाऊंगा तो पैदल ही जाऊंगा. यह कोई बड़बोलापन नहीं है लेकिन आप सब मित्रों के अपनेपन और मेरे प्रति बिना मुझसे मिले, बिना मुझसे कुछ पाए मेरे प्रति सामने आयी आपकी आत्‍मीयता है, जिसमें मेरी चम्‍बल घाटी की जिजीविषा को इतनी शक्ति दी है.

मुझे अच्‍छा लगा कि देश के कोने-कोने से मित्रों ने बताया कि वे कौन से मंदिर गए थे और मेरे लिए क्‍या-क्‍या मनौती मांगी है. बहुत सारे मित्रों ने तो बहुत सारे वैद्यों, चिकित्‍सकों से समय तय कर लिया और जगदीश कातिल जैसे कातिल नाम के अनदेखे मित्र ने अपनी ओर से चेक बनाकर के भेज दिया. लखनऊ में डीएनए के संपादक और चेयरमैन और पूरी सरकार से पंजा भिड़ाने की हिम्‍मत रख्‍ाने वाले श्री निशीथ राय का एक एमसमएस पहले आया, जिसमें उनकी सात्विक और सच्‍ची चिंता झलक रही थी. एक पंक्ति में आभार का संदेश भेजा तो दूसरा संदेश यह आया कि आपके खाते में फिलहाल 25 हजार रूपये जमा करा दिए हैं और यह आपके लिखने का मेहनताना बल्कि आपको बचाए रखने की कोशिश का एक छोटा सा हिस्‍सा है. इतने सारे मित्रों की शुभाशाएं और चिंताएं सामने आईं कि समझ में नहीं आता कि स्‍नेह का यह बोझ लेकर सबका आभार कैसे चुकाऊंगा. कोई मित्र इंदौर में बैठे हैं और महाकाल में मेरे लिए पूजा कर आए हैं तो एक मित्र गुवाहाटी में कामाख्‍या देवी को एक बेचारे भैंसे की बलि चढ़ाने का वादा कर आए हैं. मुख्‍यमंत्रियों एवं केन्‍द्रीय मंत्रियों का तो समझ में आता है कि वे समर्थ हैं लेकिन पांच सौ और हजार रूपये भेजने के लिए खाता नम्‍बर चाहने वालों का कर्ज मैं कहां से उतारूंगा?

मित्रों, आपके सबके स्‍नेह और शुभकामनाएं मृत्‍यु पर भारी पड़ जायेगी, वैसे भी इतनी जल्‍दी अपना मरने का इरादा नहीं है. आपसे सिर्फ आग्रह है कि जहां भी हैं मेरे जैसे इस चतुर और जटिल रोग के उन शिकारों पर एक नजर जरूर डालें जिन्‍हें इसका इलाज करने में अपने घर और खेत बेचने पड़ते हैं. कैंसर के इलाज में मुनाफाखोरी का जो नीच तत्‍व हैं वह असहनीय है और अविश्‍वसनीय है. हमारे और आपके जैसे लोग ढाई लाख रुपये का एक इंजेक्शन कहां से लगवाएंगे और उसके बाद घर जाकर चूल्‍हा कैसे जलाएंगे. इस बीमारी ने मुझे एक सीख दी है और मानवीयता और मित्रता में मेरा विश्‍वास और पक्‍का कर दिया है. विश्‍वास कीजिए, जो अखबार और पत्रिकाएं मुझे लिखने के लिए पूछते भी नहीं थे उन्‍होंने अचानक मेरे साप्‍ताहिक स्‍तम्‍भ शुरू कर दिए हैं और सहज से कई गुना ज्‍यादा भुगतान भी दे रहे हैं. यह बीमारी मेरे लिए मित्रता और संबंधों का एक इम्तिहान है. जिसमें जीत मित्रता की हुई है और मेरे लिए इतना काफी है. मैं संतुष्‍ट हूं कि इतनी बड़ी दुनिया में मेरे लिए अपनों के कुछ दरवाजे खुले और उनकी खिड़कियों से सांत्‍वना की नहीं सहकार की आवाज आ रही हैं. मेरे लिए यह एक बार फिर संकट पर मित्रता की जीत की कहानी है. आपकी मित्रता बनी रहेगी तो यही मेरे लिए असली जय होगी.

आलोक तोमर

संपादक

डेटलाइन इंडिया

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
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0 Comments

  1. ..XYZ..

    December 24, 2010 at 11:57 am

    Ishwer kare Aap jaldi swasthya ho jaayein !

  2. raju

    December 24, 2010 at 12:09 pm

    आलोक जी। मैं पत्रकार नहीं, न ही मीडिया से जुड़ा हूं। बस एक पाठक हूं। मैं आपका फैन हूं। आपके जैसा पत्रकार नहीं देखा। मेरी शुभकामनाएं।

  3. Sudhir.Gautam

    December 24, 2010 at 2:16 pm

    लड़ना है भीतर बाहर पसरते “सी” दैत्य से- “आलोक तोमर ने कैंसर को जकड लिया”
    May god give you and your family strength to overcome, may you be surrounded by friends like Yashwant, because of whom all came to know about the Devil
    I dont know what word would be appropriate to express the fear in mind (actually i know notthing would be sufficient), this world is not same the day I lost her (savitri-my mother) not because of Devil “C” but yeah lot many other associated white collar “Shaitan” prevailing to suck the blood of those closely associated with the patient.
    Its not only time , energy & money but actually they take every atom of charm out of your life.साले आत्मा का बलात्कार कर लेते हैं, मन चीत्कार कर यही कहता है, why us, why my family, why my beloved, and then finally a stage comes when you understand ये किसी को भी न हो, दुश्मन को भी नहीं.
    Alok bhai whatever little i know of you is from the organisation where we have worked in common, at different time interval, but I can say due to “Bhadas” “Yashwant” the real “Alok”, the hero “Alok” comes to many including me and I will definitely pray for you and your family. May God Bless you all !!!
    Do Read…
    http://medianukkad.blogspot.com/2010/12/blog-post.html

  4. Sudhir.Gautam

    December 24, 2010 at 2:25 pm

    Also Read if time permits…an effort to raise fund for the facebook supported organisation “THE RACE TO END CANCER” for doing research in diagnosis and treatment of the cancer.
    http://wishes.causes.com/wishes/154431
    दुआ करो दुश्मन को भी ये कर्कट रोग न लगे .

  5. भारतीय़ नागरिक

    December 24, 2010 at 2:34 pm

    जल्दी स्वस्थ हो…. शुभकामनायें है…

  6. rajesh vajpayee jansandesh unnao

    December 24, 2010 at 3:30 pm

    YASHWANT BHAI ALOKJI JALDI SWASTHA HO JAYE.
    BHAI HAR KAD KATHI MAAMOOLI NAAMCHEEN MAANAV O SAY SABKA HUWA PAR ALOKJI JAISA MAHA-MANAV NAHI DEYKHA.KYA GAJAB KI JIJEEVISHA VA JUNOONI KAYA KA MARD HAI YEH BANDA.WAKAI SHERO KI TARAH DAHARTA LALKARTA HAI KALAM KA SAMRATH. DHANY HAI WAH MAA JINKA LAL HAI YEH.
    rajesh vajpayee jansandesh unnao

  7. Vinay Nayak

    December 24, 2010 at 4:39 pm

    Jug jug jiye aap aur sada hi bane rahe ye tevar

  8. बालेन्दु दाधीच

    December 24, 2010 at 4:57 pm

    आलोक जी, कोई भी बीमारी आपके हौंसलों के सामने कहां टिक सकती है। ईश्वर ने आपको तकलीफ जरूर दी है किंतु अनंत गुना बड़ा मनोबल, शक्ति और कभी पीछे मुड़कर न देखने का जज़्बा भी दिया है। आप स्वयं तो इससे सकुशल मुक्त होंगे ही, अनगिनत लोगों को हौंसला और प्रेरणा भी देंगे। आपकी तकलीफ आपके अनगिनत मित्रों और शुभचिंतकों की साझा तकलीफ है और इससे मुकाबले में हम सबका सम्मिलित संकल्प आपके साथ है।

  9. sudhir

    December 24, 2010 at 5:49 pm

    alok,
    mrityu ko kisi ne nahi dekha hai ,ummid hai tum bhi nahi dekh paoge.hum sab ek saath hain ,without having death in our life .abhi bahut baat karni hai yaar…..cancer ki aisi ki taisi.bimari unko hoti hai jo bimar hote hain …..u r my sher .abhi bahut baat karni hai …….:)

  10. dinesh mansera

    December 24, 2010 at 11:34 pm

    hum aapko nahi aapke cancer ko khona chahte hai….

  11. dinesh mansera

    December 24, 2010 at 11:34 pm

    hum aapko nahi aapke cancer ko khona chahte hai

  12. govind goyal sriganganagar

    December 25, 2010 at 1:48 am

    marne se pahale kyon mare?

  13. vijendra rawat - journalist

    December 25, 2010 at 1:59 am

    alok jee,
    aap vakayi jnabaj ho, jab patrakarita dalali ke dal-dal me dhans rahi hai, aise samay me aapke vichar padane me sukoon milata hai. aapko jis bimari ne ghera hai, usame etana dam nahin ki aapaka kucch bigar sake.
    chambal se lekar delhi ke bihar me jo aapne kaam kiya hai vah tarife kabil hai. yah chambal ke paani ka hi dam hai ki aapame luteron ko lutera kahne ki himmat hai.
    bhagavan se dua hai ki aap jaldi thik honge. mujhe vishwas hai ki aise jambaj se bimari jaroor haar jayegi.
    god bless you———-

  14. arun dogra reetu

    December 25, 2010 at 5:06 am

    भाई आलोक जी आपकी लेखनी का कायल हूं और मन में आपसे मिलने की तमन्‍ना भी है लेकिन परिस्थितियों के अनुकूल न होने के कारण मिल नहीं पा रहा हूं यह अवश्‍य है कि आपकी लेखनी से लगभग हर रोज ही मुलाकात हो जाती है
    मेरी परमात्‍मा से कामना है कि
    आप जिएं हजारों साल साल के दिन हों पचास हजार

  15. Kuldeep Singh

    December 25, 2010 at 5:50 am

    Sir,
    Get wel soon.

    Kuldeep Singh
    Punjab Kesari
    Delhi

  16. Amit Singh Virat

    December 25, 2010 at 6:08 am

    Alok ji aapko koi kya santwana deaga.
    aap jald swasth hon yahi ishwar se prathana hai.

  17. vijendra rawat - journalist

    December 25, 2010 at 6:23 am

    alok jee,
    aap jaise patrkar ki samaj ko behad jarurat hai. esaliya hamari kamana hai ki aap jaldi swatha honge.
    good bless you

  18. anoop

    December 25, 2010 at 6:56 am

    aalok jee, aap patrakarita ke hero rahe hai aur rahenge. sach maniye ye bimari bhi aapko chu kar nikal jayegi. waise bhi hum sabko jane-anjane aapki jarujar jo hai. god bless you.

  19. sudhir dandotiya

    December 25, 2010 at 7:24 am

    sir ji kamaal karte ho aaap kyaa likhte ho me aapka ki lekhni kaa fen hu…….

  20. sudhir dandotiya

    December 25, 2010 at 7:26 am

    sir ji kamaal karte ho kya likhte ho aap me aap ki lekhni kaa fen hu.. dua hai ki lambe samay tak aap ko padta ranhuga…..

  21. harsh , bhopal

    December 25, 2010 at 7:43 am

    alok ji aapke liye hum sabhi lambi aayu kii kaamna kar rahe hai……… abhi to aapko kai dalal logo ka sach apni kalam ke madhyam se sabke saamne lana hai…..mujhe khushi is baat kii hai media me aaj aap jaise patrakar bhii hai jo apni lekhni ka alok samachar patro me bikher rahe hai……………..

    ishwar se prathna karta hoo apko wah cancer se ladne kii shakti de………………..

  22. rakesh seth

    December 25, 2010 at 11:05 am

    मेरी परमात्‍मा से कामना है कि
    आप जिएं हजारों साल साल के दिन हों पचास हजार

  23. payal

    December 25, 2010 at 2:42 pm

    आलोक सर हौसला रखि‍ए, आपका हौसला इतना बुलंद होना चाहि‍ए कि‍ कोई भी बीमारी आपके हौसले के सामने ज्‍यादा दि‍न टि‍क न सके। मेरी और मेरे परि‍वार की शुभकामनाएं आपके साथ हैं। ईश्‍वर से हर रात दुआ में आपके ज्‍ल्‍द से जल्‍द स्‍वस्‍थ होने की प्रार्थना करूंगी

    पायल चक्रवर्ती

  24. satya prakash "AZAD"

    December 25, 2010 at 3:42 pm

    आप जल्द स्वस्थ हों, इसी कामना के साथ…….

  25. Ashutosh Mishra

    December 27, 2010 at 6:01 pm

    सर, इतनी स्पष्ट और कटु सत्य की लेखनी के साथ इतनी जल्दी लड़ाई लड़ने की इच्छा तो अभी भगवान की भी नहीं होगी! अभी तो सत्य की बहुत सारी रौशनी फ़ेलानी है बहुत सारे लोगो के कच्चे चिट्टे खोलने है आपको! आप बहुत जल्द स्वस्थ हों, इसी मंगल कामना के साथ…….

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