उत्तराखंड के मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने नवी मुंबई के वाशी में 15 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले ‘उत्तराखंड एम्पोरियम और अतिथिगृह’ का शिलान्यास किया. इस अवसर पर मुख्यमंत्री निशंक ने दैनिक ‘नवभारत’ के स्थानीय संपादक अभिमनोज व ‘नवभारत टाइम्स’ के स्थानीय संपादक सुंदरचंद ठाकुर को शॉल-श्रीफल और पुष्पगुच्छ से सम्मानित किया.
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि हर वर्ष मुंबई में ’14 फरवरी’ उत्तराखंड दिवस के रूप में मनाया जायेगा और इसका स्वरूप मुंबई में गत तीन वर्ष से जारी उत्तराखंडी महोत्सव ‘कौथिग’ सा ही होगा. इस वर्ष ‘कौथिग’ 25-27 फरवरी को प्रस्तावित है.

उल्लेखनीय है कि चार हजार वर्ग फीट क्षेत्र में प्रस्तावित पांच मंजिला ‘एम्पोरियम व गेस्ट हाउस’ का निर्माण उत्तराखंड अवस्थापना विकास निगम द्वारा किया जाएगा. एम्पोरियम में 100 कारों की पार्किग, भूतल पर 100 व्यक्तियों की क्षमता का रेस्टोरेंट, 200 लोगों की क्षमता का एम्पोरियम और 500 लोगों की क्षमता का ऑडिटोरियम होगा. प्रथम तल पर 60 लोगों के रुकने के प्रबंध के अलावा जिम और मनोरंजन कक्ष भी होगा। द्वितीय तल पर जीएमवीएन और केएमवीएन के कार्यालय, तृतीय तल पर चार वीआईपी कक्ष व स्थानिक आयुक्त कार्यालय होंगे. चतुर्थ तल पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री के लिए अतिविशिष्ट ब्लॉक होंगे.












shubchintak
February 18, 2011 at 10:34 am
nishank je aap ke is kaam ke liye hum tahe dil se aapko badhai dena cahte hai….ab hum bhe mumbai main dhamal kar sakte hai………………thanks
Critics
February 19, 2011 at 3:36 pm
Uttarakhand main to aap vikas kar nahi paye parantu Mumbai mei Uttrakhand Emporium banane ke liye dhanyawaad. Shayad isi bahane Uttrakhand ke log aapko yaad rakhein.
alok
February 20, 2011 at 1:24 pm
abhi manoj jaise nam matra ke patrakar ke sath thakur sahab ka samman apman ke brabar hai.abhi manoj ne do sal me ak line nahi likha, jabki sunder thakur ne nbt,mumbai ko badal kar rakh diya hai.
ravindra kumar
February 22, 2011 at 3:43 pm
कैसे-कैसे लोगो का सम्मान हो जाता है. ये वाही अभी मनोज है, जिन्होंने नवभारत,सताना का सत्यानाश करने के बाद मुम्बा की तरफ कुछ किया है. अब तो नवभारत, मुंबई का भगवन ही मालिक है. अह आदमी स्ट्रिंगरो से फायदा लेने के चक्कर में रहने वाला संपादक है.
rajit tiwari
February 22, 2011 at 3:54 pm
आदरणीय सुंदर चाँद ठाकुर जी
नमस्कार, मै आप का इस लिए प्रशंसक हू की आप ने इस शहर माँ आकार अपनी काबिलियत साबित की है. आप लिखा भी पढने को मिलाता है और पढ़ कर आनंद भी आता है. पर मुझे यह देख कर दुःख हुवा की आप का सम्मान एक इससे संपादक के साथ हुआ जिसको पत्रकारिता का कोई शवुर नहीं है. मै नवभारत times के नवभारत भी पढ़ लेता हू. पर कभी भी अभी मनोज जी का लिखा कुछ भी पढने को नही मिला. मुझे पता चला की इस आदमी का लिखने पढने से कोई सम्बद्ध नहीं है. वे तो केवल जुगाडू सम्पादक. इस लिए आप से निवेदन है की भविष्य में इस बात का ख्याल रखे[b][/b]
rajit tiwari
February 22, 2011 at 3:56 pm
आदरणीय सुंदरचंद ठाकुर जी
नमस्कार, मै आप का इस लिए प्रशंसक हू की आप ने इस शहर माँ आकार अपनी काबिलियत साबित की है. आप लिखा भी पढने को मिलाता है और पढ़ कर आनंद भी आता है. पर मुझे यह देख कर दुःख हुवा की आप का सम्मान एक इससे संपादक के साथ हुआ जिसको पत्रकारिता का कोई शवुर नहीं है. मै नवभारत times के नवभारत भी पढ़ लेता हू. पर कभी भी अभी मनोज जी का लिखा कुछ भी पढने को नही मिला. मुझे पता चला की इस आदमी का लिखने पढने से कोई सम्बद्ध नहीं है. वे तो केवल जुगाडू सम्पादक. इस लिए आप से निवेदन है की भविष्य में इस बात का ख्याल रखे[b][/b]
raj
February 22, 2011 at 4:00 pm
mujhe aaj pata chala ki navbharat,mumbai me kai abhi manoj nam ki jiv hi hai, jo sampadak jaise pad par hai. ab tak mai. vinod maheshwari ji ko hi sampadak janta-manta tha. yah aadmi kaise sampadak ho sakta hai jiski aisi hlat ho…..
hasmi
February 22, 2011 at 4:07 pm
भड़ास का धन्याद, इससे कम से कम यह तो पता चला की सतना की हिंदी पत्रकारिता में हँसी के पात्र माने जाने वाल़े अभी मनोज जी मुंबई, पहुच गए है और नवभारत,मुंबई के संपादक भी बन गए है. बेचारे वहा के पत्रकारों की रोजी-रोटी तो खतरे में ही पड़ गई समझो. क्योकि इनका तो पत्रकारिता से कोई लेना-देना है नही. मुंबई,नवभारत का भी वही हाल न हो जाये, जो उनके कार्यकाल में सताना,नवभारत का हुआ.
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khabarchi
February 23, 2011 at 5:32 pm
अब माननीय संपादक अभी मनोज को लेकर इतनी प्रितिक्रिया आई है, तो एक बात मुझे भी बताने का मन कर रहा है. हुआ यूं था की नवभारत, नवी मुंबई ऑफिस में कार्यरत एक सब एडिटर से पेज में कुछ गलती चली गयी, तो अभी मनोज जी ने उस सब एडिटर को चार लाईन की नोटिस दी. पर उस चार लाईन में पाच गलतिया थी. इस लिए सब एडिटर महादोय उलटे अभी मनोज पर चढ़ लिए. उन्होंने कहा की खुद तो कुछ लिखना-पढना आता नहीं, चले है नोटिस देने. मै यह नोटिस मालिक के पास भेजूंगा. इसके बाद बेचारे अभी मनोज के पास नोटिस को वापस लेकर फाड़ने के आलावा कोई चारा नहीं था.
khabarchi
February 24, 2011 at 6:28 am
अब अभी मनोज को लेकर इतनी प्रतिक्रिया आई है तो एक एक बात मुझे भी याद आ रही है. दरअसल हुआ यूं था की नवभारत, नवी मुंबई ऑफिस में एक सिनिअर सब एडिटर से पेज पर कुछ गलती चली गयी तो अभी मनोज ने उस सिनिअर सब एडिटर को चार लाइन की नोटिस जारी की, पर उस चार लाइन में पाच गलतिया थी. यह देख कर सिनिअर सब एडिटर महोदय अभी मनोज पर चढ़ लिए, बोले तुमको तो खुद कुछ लिखना- पढना नहीं आता. आप मुझे क्या नोटिस दोगे, मै यह नोटिस अखबर के मालिक के पास भेजता हूँ. वही योग्यता का फैसला करेंगे. इसके बाद बेचारे अभी मनोज की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गयी. किसी तरह नोटिस मांग कर फाड़ कर फेकने में ही अपनी भलाई समझी. [b][/b]