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पत्रकारों के बंगले भी होंगे जमींदोज!

राजेंद्र हाड़ा अजमेर। अफसर, पत्रकार, राजनेता और जमीन के दलालों की मिलीभगत से हुए एक बडे़ जमीन घोटाले में सरकार की टेढ़ी निगाह से अजमेर नगर निगम के मेयर कमल बाकोलिया समेत दैनिक नवज्योति के स्थानीय संपादक ओम माथुर और दैनिक भास्कर के संतोष गुप्ता जैसे प्रभावशाली पत्रकारों के बंगले भी धूल धूसरित होने की नौबत आ गई है। यह जमीन घोटाला अजमेर के बच्चे-बच्चे की जुबान पर है परंतु आज तक किसी अखबार ने इसे उजागर करने का साहस नहीं किया।

राजेंद्र हाड़ा अजमेर। अफसर, पत्रकार, राजनेता और जमीन के दलालों की मिलीभगत से हुए एक बडे़ जमीन घोटाले में सरकार की टेढ़ी निगाह से अजमेर नगर निगम के मेयर कमल बाकोलिया समेत दैनिक नवज्योति के स्थानीय संपादक ओम माथुर और दैनिक भास्कर के संतोष गुप्ता जैसे प्रभावशाली पत्रकारों के बंगले भी धूल धूसरित होने की नौबत आ गई है। यह जमीन घोटाला अजमेर के बच्चे-बच्चे की जुबान पर है परंतु आज तक किसी अखबार ने इसे उजागर करने का साहस नहीं किया।

बचते-बचाते जो कुछ खबरें छपी, उसके लिए भी किसी ना किसी प्रेस विज्ञप्ति की आड़ ली गई। मामला पत्रकारों की एकता का मानिए या हमाम में सब नंगे वाला परंतु दैनिक भास्कर के ठीक सामने स्थित माधव नगर योजना रद्द करने के सरकारी आदेश के बाद भी किसी अखबार ने इस योजना में पत्रकारों की मिलीभगत के सवाल को नहीं उठाया। माधव नगर योजना भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए मुसीबत बन गई है। चार महीने के लिए नगर परिषद सभापति बने भाजपा के सुरेंद्र सिंह शेखावत ने इस योजना को मंजूरी दी थी। जमीन दलालों ने इस मंजूरी की भारी कीमत चुकाई और कई नेताओं तथा पत्रकारों को लगभग मुफ्त में प्लॉट दिए ताकि मामला उजागर ना हो। भाजपा के कुछ नेता तो इस हद तक गुलाम मानसिकता के शिकार रहे कि पत्रकारों के मकान निर्माण के दौरान वे रोज ऐसे हाजरी लगाते मानो मैट के रूप में उनकी नियुक्ति की गई हो। कुछ तेज तर्रार राजनेता और पत्रकार मुफ्त में मिले प्लॉटों को हाथों हाथ अच्छे दामों पर बेचकर चलते बने। इनमें कुछ पत्रकार अब राजस्थान और उत्तर प्रदेश के बडे़ अखबारों में अच्छे पदों पर हैं।

जनसंघ और बाद में भाजपा के एक बडे़ नेता थे स्वर्गीय भंवर लाल शर्मा। अच्छी छवि रखते थे। उन्हीं के पुत्र कमल शर्मा की सरपरस्ती में चलती है दीप दर्शन हाउसिंग सोसायटी। कमल शर्मा रिश्ते में दैनिक नवज्योति के मालिक और प्रधान संपादक दीनबंधु चौधरी के बहनोई हैं। सन 1983 में राजस्थान सरकार ने गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को सस्ती दर पर मकान मुहैया कराने के लिए गृह निर्माण सहकारी समितियों को जमीन आवंटित करने के निर्देश नगर सुधार न्यास और जिला प्रशासन को दिए। जैसा गरीबों की हर योजना में होता है वही यहां हुआ। दीप दर्शन हाउसिंग सोसायटी ने एक माधव नगर योजना बनाई और 1992 में नगर सुधार न्यास में 62 लाख रुपए जमा करवाते हुए 250 रुपए प्रति वर्गगज की दर से 23 हजार वर्ग गज जमीन आवंटित करने के लिए आवेदन कर दिया। 1996 में नगर सुधार न्यास 450 रुपए वर्ग गज की दर से जमीन देने के लिए तैयार हुआ। सोसायटी ने सहमति देते हुए बाकी रकम जमा करवा दी। 1999 में यह योजना नगर परिषद अजमेर को हस्तांतरित कर दी गई और तत्कालीन सभापति वीर कुमार के निधन के बाद फरवरी 1998 में चार महीने के लिए नगर परिषद सभापति बने सुरेंद्र सिंह शेखावत ने इस योजना को रातों रात मंजूरी देते हुए सोसायटी को 21 हजार 80 वर्ग गज जमीन आवंटित कर दी। सोसायटी की ओर से पूर्व में नगर सुधार न्यास में जमा करवाए गए लाखों रुपए नगर परिषद ने ना तो लिए और ना ही लेने में कोई रूचि दिखाई।

सोसायटी को गरीबों को 50-50 वर्ग गज के मकान बनाकर देने थे, इसकी जगह सोसायटी ने रसूखदारों को प्लॉट काट दिए। जमीन मिली 21 हजार वर्ग गज, सोसायटी ने 26 हजार वर्ग गज में प्लॉट काट दिए। मास्टर प्लान में सौ फीट चौड़ी सड़कें दिखाई गई और उनकी चौड़ाई सिर्फ 40 फीट कर प्लॉट के आकार बढ़ा दिए गए। इसी बीच सोसायटी ने नगर सुधार न्यास को कहा कि उसे माधव नगर योजना में अविकसित जमीन दी गई है अतः उसकी जमा रकम में से विकास शुल्क वापस दिया जाए। एक बार फिर अफसरों, पत्रकारों, नेताओं और भू-माफियाओं की चांडाल चौकड़ी जमी और नगर सुधार न्यास ने पैसे की जगह सोसायटी को पंचशील नगर में मात्र 123 रुपए वर्गगज की रियायती दर पर 66 बीघा जमीन आवंटित कर दी। प्लॉटों की खूब बंदरबांट हुई। एक दर्जन से ज्यादा पत्रकारों को फिर प्लॉट मिल गए। और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को भी कथित तौर पर कुछ प्लॉट आवंटित होने का मामला सुर्खियों में आ गया। जयपुर स्थित शासन सचिवालय में पोस्टर चिपके, कुछ शिकायतें भी हुई और मुख्यमंत्री गहलोत ने रातोंरात जांच बैठा दी तथा एक आईएएस एमके खन्ना को तत्काल अजमेर भेज दिया। जांच में गड़बड़झाला पाए जाने पर सरकार ने न्यास अफसरों का तबादला करते हुए 21 जनवरी 2011 को 66 बीघा जमीन का आवंटन रद्द कर न्यास ने वापस कब्जा ले लिया। खन्ना की रिपोर्ट पर सरकार ने 17 जून 2011 को माधव नगर योजना की जमीन का आवंटन भी रद्द कर दिया।

आदेश मिलते ही जिला प्रशासन हरकत में आया और 21 जून 2011 को हाथोंहाथ निर्णय लेकर नगर निगम आयुक्त और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने पुलिस की मदद से माधव नगर योजना में बनी 10 दुकानें और 59 प्लॉट सीज कर दिए। मेयर और पत्रकारों समेत बाकी ‘गरीबों’ के 84 बंगलों पर कार्रवाई होनी बाकी है। नगर निगम सूत्रों की माने तो वे कानूनी नोटिस देने की तैयारी कर रहे हैं। कांग्रेस के मेयर कमल बाकोलिया की खासी किरकिरी हुई है। वे केंद्रीय संचार मंत्री सचिन पायलट के खास माने जाते हैं। उनके साथ इससे ज्यादा बुरा और क्या होगा कि जिस समय वे नगर निगम के दफ्तर में बैठे थे उसी समय नगर निगम का अतिक्रमण तोड़ू दस्ता और निगम आयुक्त बगैर उनकी जानकारी में लाए उनके घर के आस-पास तोड़-फोड़ कर रहे थे। उनकी जानकारी में इस मामले को लाया ही नहीं गया जबकि उनका खुद का घर इसके निशाने पर है।

यह मामला कांग्रेस, भाजपा, पत्रकारों और अफसरों के लिए गले की हड्डी बन गया है। कांग्रेस इस मुद्दे को इसलिए गलत नहीं ठहरा सकती क्योंकि राज्य में सरकार उसी की है और अगर सही ठहराती है तो मेयर का घर नेस्तनाबूद होता है। भाजपा अगर मामला उठाती है तो भ्रष्टाचार के लिए सबसे पहले निशाने पर आती है, क्योंकि उसी के सभापति सुरेंद्र सिंह शेखावत ने इस योजना को मंजूरी दी थी, नहीं उठाती है तो विपक्ष की भूमिका पर सवाल खडे़ होते हैं। पत्रकार अगर अतिक्रमण हटाने की खबरें लिखते हैं तो अंगुली पत्रकारों के बंगलों पर भी उठती है, नहीं लिखते तो बिकाउ होने का ठप्पा लगता है। अफसर अगर किसी और गैरकानूनी निर्माण को तोड़ते हैं तो जनता माधव नगर के सवाल को उठाएगी और नहीं हटाते हैं तो माधव नगर लालफीताशाही और उनकी नामर्दांगिनी की मिसाल बनकर आडे़ आता है। उन पत्रकारों और नेताओं की प्रतिष्ठा भी दांव पर है,  जिन्होंने कौड़ियों में लिए प्लॉट पर मकान बनाने की जगह लाखों में उन्हें बेच डाला। पैसे तो उन्हें लौटाने से रहे। प्रतिष्ठा तो कांग्रेसी मेयर कमल बाकोलिया और पूर्व भाजपा सभापति सुरेंद्र सिंह शेखावत की भी दांव पर है। बाकोलिया को राजनीति में लाने से लेकर मेयर तक बनवाने में उनकी बड़ी भूमिका जो मानी जाती है।

राजेंद्र हाड़ा राजस्थान के अजमेर के निवासी हैं. करीब दो दशक तक सक्रिय पत्रकारिता में रहे. अब पूर्णकालिक वकील हैं. यदा-कदा लेखन भी करते हैं. लॉ और जर्नलिज्म के स्टूडेंट्स को पढ़ा भी रहे हैं. उनसे संपर्क 09549155160 के जरिए किया जा सकता है.

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0 Comments

  1. prakash

    June 23, 2011 at 6:30 am

    Aise patrakar patrakarita ke nam par kalank hain. Jo swayam bhrashtachar me lipt ho vo bhrashtachar ke virudh likhne ki himmat kaise kar sakta hai ?

  2. Hariom garg

    June 23, 2011 at 7:56 pm

    हाड़ा जी, इतने साफगोई से लिखने वालों को धूर्त और मोकापरस्त लोग “बेवकूफ ” भले ही कहें पर आपने अब भी अपने पत्रकार धर्म को निभाया है .कुछ भी हो मजबूती से इसी रास्ते पर चलते रहें इश्वर आपके साथ है
    हरिओम गर्ग .बीकानेर .

  3. priya sheel haada

    June 25, 2011 at 4:17 pm

    chote bhayia ab bas kar,,

    ghar aa ja dal roti ka intjam ho jayega.. aise kab tak karta rahega.

    tumhara bhai

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