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पत्रकार समझ लें, अफसर किसी के सगे नहीं होते

चैतन्‍य जबलपुर में ‘डीबी स्टार’ के युवा छायाकार की निर्मम हत्या के बाद जबलपुर के जिला और पुलिस प्रशासन ने जिस संवेदनहीनता का परिचय दिया उससे यह बात साफ हो गई है कि शहर में आने वाले इन आयातित अफसरों का किसी भी शहर और उसके रहवासियों से से कोई रिश्‍ता नहीं होता.

चैतन्‍य जबलपुर में ‘डीबी स्टार’ के युवा छायाकार की निर्मम हत्या के बाद जबलपुर के जिला और पुलिस प्रशासन ने जिस संवेदनहीनता का परिचय दिया उससे यह बात साफ हो गई है कि शहर में आने वाले इन आयातित अफसरों का किसी भी शहर और उसके रहवासियों से से कोई रिश्‍ता नहीं होता.

पिछले दिनों अयोध्या पर आये निर्णय के बाद जब प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने इस दौरान किसी भी प्रकार के उपद्रव होने पर उस जिले के कलेक्टर और एसपी पर कार्यवाही की घोषणा की थी, उस वक्त जिले का प्रशासन और पुलिस के ये मुखिया कहे जाने वाले अफसर कलेक्टर और एसपी शहर से प्रकाशित होने वाले हर बड़े-छोटे अखबारों के संपादको को ससम्मान बुलाकर उनके सामने घिघिया रहे थे कि वे शांति-व्यवस्था बनाये रखने में उनकी मदद करे. उस वक्त इन अफसरों को अखबारों और उनके पत्रकारों की मदद की दरकार थी और अखबार वालों ने इस मामले में उनकी भरपूर मदद की, पर जब युवा छायाकार राकेश साहू की गोली मारने के बाद जला कर हत्या के मामले में वे ही वरिष्ठ पत्रकार और संपादक किसी ठोस आश्‍वासन के लिये चौराहे पर धरने पर बैठे तब कलेक्टर और एसपी ने उनसे मिलने और उनकी पीड़ा समझनेमें कई घंटे लगा दिये.

कई घंटों के इंतजार के बाद वे दोनों धरना स्थल पर तब आये, जब शहर के सत्तादल के एक विधायक और महापौर ने अफसरों को तलब किया. प्रजातंत्र के चौथा पाया कहे जाने वाले ‘‘प्रेस’’ के एक छायाकार की निर्मम हत्या हो जाती है, उसके साथी न्याय मांगने के लिये शहर के बीच चौराहे पर बैठकर जिला और पुलिस प्रशासन से ये उम्मीद करते हैं कि वे उनसे आकर मिलें और उनकी पीड़ा का अहसास करें. उन्हें सुरक्षा और न्याय की गारंटी दें पर नेताओं के दरवाजे पर सुबह शाम हाजिरी बजाने वाले इन अफसरों ने उन संपादक स्तर के वरिष्ठ पत्रकारों से मिलना भी उचित नहीं समझा, जिनसे कुछ दिनों पहले ही उन्होंने अपने आप को बचाने के लिये मदद मांगी थी.

दरअसल जबलपुर में अफसरों के अहं को बढ़ाने में यहां के अखबार और पत्रकार यदि दोषी कहे जायें तो गलत न होगा. अपने शहर के नेताओं जन प्रतिनिधियों को पानी पी-पी कर कोसने और उनकी बखियां उधेड़ने में सिद्धहस्त शहर के अखबार, साल दो साल के लिये शहर में नौकरी करने आये जिला और पुलिस प्रशासन के आला अफसरों के सामने, घुटने टेक हो जाते हैं. इन अफसरों को ये अखबारों में हीरो बनाये रहते हैं. एसपी यदि मोटर साइकल पर गश्‍त करने निकलता है तो चार कालम में उसकी फोटो छापी जाती है. आईजी आधी रात को थानों को निरीक्षण करने जाते हैं तो उस समाचार को इस ढंग से पेश किया जाता है मानों आईजी ने ‘‘भारत रत्न’’ पाने जैसा काम कर दिया हो, जबकि यह काम उनके रोजमर्रा के काम में शामिल है.

वृक्षारोपण, तालाबों की सफाई, नर्मदा शुद्धिकरण जैसे जागरूकता अभियान में कलेक्टर, एसपी, कमिश्‍नर को उनके बड़े-बड़े फोटो के साथ ‘‘आइकान’’ बनाकर पेश किया जाता है. हर मौके पर उनके विचारों को उनके फोटो के साथ प्रमुखता से प्रकाशित किया जाता है. यह परंपरा पिछले कुछ बरसों से जम कर शुरू हुई है. इस ‘‘भटैतगिरी’’ के चलते ये चालाक अफसर समझ जाते हैं कि अखबार और अखबार वालों की क्या औकात है. और जब मौका आता है वे उन्हें आईना दिखा देते हैं.

अखबार और अखबारों में काम करने वाले पत्रकार ये नही समझते कि ये तो उड़ते पंछी है. साल दो साल के लिये किसी जिले में जाते हैं. उनका न तो उस शहर से भावनात्मक लगाव होता है और न ही उनकी संवेदनाएं उस शहर से जुड़ पाती है. वे आते हैं टाइम पास करते हैं और अपना कार्यकाल पूरा कर बोरिया बिस्तर समेट कर किसी दूसरे आशियाने की तरफ बढ जाते हैं.  राकेश साहू की मौत के बाद पत्रकारों का आक्रोश, प्रशासन की संवेदनहीन भूमिका, ये तमाम बातें पत्रकारों को एक सीख तो जरूर दे गई है और इस सीख को उन्हें अपनी गांठ में बांध लेना चाहिये कि ये अफसर किसी के सगे नही होते इस घटना के बाद इस बात की उम्मीद करना बेमानी न होगी कि जबलपुर के अखबार और उसमें काम करने वाले लोग इन अफसरों को ‘‘नायक’’ बनाने की अपनी मनोवृति में बदलाव लायेंगे.

चैतन्य भट्ट जबलपुर के वरिष्ठ पत्रकार है. वे कई अखबारों में संपादक रहे हैं. उनसे संम्पर्क उनके मोबाइल नंबर 09424959520 के जरिए किया जा सकता है.

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0 Comments

  1. photojournalist

    October 30, 2010 at 3:51 am

    aap sahi keh rhe hi yahna ke patrkar ho ya photogrpher. kisi ko bhi hawaldar ho yo si se lekar sp tak kisi ne bhi muskuraker baat kar li ya tae par bula liya to wo apne aap ko kisi top se kam nahi samjhta or wo ppro ho jata hi yani police pro.ye pravratti jab tak kahtm nahi hogi tab tak aosa hi hota rahega. aap ki vichaar dhara me chalnewala photographer

  2. .xyz.

    October 30, 2010 at 5:17 am

    Bikul sahi farmaaye Bhatt sahab aap ne ! Aap ne likha — इस ‘‘भटैतगिरी’’ के चलते ये चालाक अफसर समझ जाते हैं कि अखबार और अखबार वालों की क्या औकात है. और जब मौका आता है वे उन्हें आईना दिखा देते हैं. Ye baat bilkul sahi hai ! Akhbaar ke maaliq ab *Shuddh rup se* vyaapaari ho chale hain ! Maqsad saaf – kisi ke saam ne bhi Ghidgidaana pade ya chaaplusi kar apna kaam nikal jaaye to karo ! Aise mein ya koi Patrakaar (Jiske paas paisa ho, jo ki apwaad hota hai) hi News Paper ya TV channels khole to Patrakaaron ke dukh-dard ko samajh sakta hai ,Warna in *Vyaapaari buddhi * waale media maaiqon se SAMAAN KI RAKSHA karne jaisa nivedan karna murkhta hi hogi ! Par kya karein patrakaar bhi , PAAPI PET KE SAWAAL KA WAASTA JO THARA !

  3. हरिओम गर्ग

    October 30, 2010 at 6:41 am

    चैतन्य जी
    आपने बहुत सही लिखा है .
    ये अधिकारी लोग किसी के सगे नहीं होते.पर पत्रकारों में भी आजकल चाटुकारों और जी हुजूरियों की जमात बढती ही जारही है
    और ऐसे ही बिकाऊ पत्रकारों से फायदा लेते हैं ये मतलब परस्त अधिकारी .
    हरिओम गर्ग
    संपादक
    सान्ध्य दैनिक जांबाज़
    बीकानेर.

  4. rakeshseth

    October 30, 2010 at 12:26 pm

    sir
    i am agree with your comments.
    Rakesh Seth

  5. sanjay bhati editor Danik Supreme news

    October 30, 2010 at 4:19 pm

    setho or lalao ki nokri kar rahe bhaio ki jada kichayi mat kiya karo . kya aap nahi jante ki malik log chor or munafekhor hai phir ve to dm or ssp ki chatne ke liy he patarkaro ko rakhege rahana hai raho nahi rahana to mat raho dusre bhut sare line laga kar khade hai . yadi sach likhana hai to tankha /dhan nahi milaga . bata sakte hai kitne patarkar bina pase ke kam karne ko tayar hai wo bhi khud ka kharch karke .yadi ham bina salri ke kam karte bhi hai to bade banero me jabki ham sabhi jante hai ki bade banero ko sach se matlab nahi hai par kitne hai jo web media ke sath kam karne ko tayar hai kitne hai jo choote samachar patro or patrikao me kam karne ko raji hai batao . jabab milega ki jinko bade baner ghas nahi dal rahe majburi me chote banaro ke sath kam kar rahe hai jabki ve khub jante hai ki hamare jase chote akhabaro me unhe khulkar likhne ki ajadi maliko ki taraha hai .adarsh ki bat karte hai najar un bade akhbaro me jane ke liye lagi rahti hai jinme ghungru bandh kar mandari k bandar ki tarha nachana padta hai .SUPREME NEWS DAILY se kuch log AMAR UJJALA me jakar kude-kude phir rahe the 7 din me hi guru ji guru ji karte vapas aa gaye . ant me bhya je yadi imandari se patrkarita karni hai to web medid or chote samachar patr-patrika nikalo dhire-dhire sudhar jarur hoga . SANJAY BHATI EDITOR DAILY SUPREME NEWS 9811291332-9311808705

  6. govind goyal,sriganganagar

    October 30, 2010 at 7:21 pm

    sahi bat hai. inko kucch lena dena nahin. ye to journalist ko use karte hain.

  7. somduttshastri

    October 30, 2010 at 11:30 pm

    jio dear abhi bhi tumhari kalam aag ugal rahi hai ye dekh kar acha laga.‘‘भटैतगिरी’’ sahhi sabbad hai.mai sahmat hu tumse dost

  8. anant jain

    October 31, 2010 at 1:33 am

    sir, aapki soch se itefaq rakhta hoon
    anant agra

  9. vijay pragya

    October 31, 2010 at 1:50 am

    bilkul sateek aur akhbaaron ko beparda karne vali baat kahi hai bhatt ji aapne. kyoki halat agar batane lagenge to patthar bhi aansu bahate milenge ek arse se kho gai insaniyat use banane me jamane lagenge

  10. vijay pragya

    October 31, 2010 at 1:56 am

    bahut theek likha aapne. kyonki halat agar batane lagenge to patthar bhi aansu bahane lagenge ek arse se kho gai jo insaniyat use banane me jamane lagenge

  11. sanjay choudhary

    November 3, 2010 at 6:26 am

    Bhatt sahab,छायाकार ,rakesh shahu की निर्मम हत्या के बाद जबलपुर के जिला और पुलिस प्रशासन ने संवेदनहीनता का परिचय दिया कि शहर में आने वाले इन आयातित IAS, IPS अफसरों का किसी भी शहर और उसके रहवासियों से से कोई रिश्‍ता नहीं होता.,ur patrkaro ke sabbar ki intha to tab hui ki jab,25 ki rat 2 am pr colletor,s.p. ne appki kahi bat ko senior journilsts ke sammane sewekar ve kiya …………..
    sanjay choudhary jabalpur

  12. kunwar nikhilesh pratap singh

    November 3, 2010 at 8:15 pm

    sawo tka sahi kha sir ji……………………………

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