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दुख-दर्द

पहले तो जमकर धुना, फिर बोली गलती हो गयी पत्रकार जी

: नर्सिंग होम में हंगामा काटने पर लेडी डॉक्‍टर ने जूतियों से पीटा : जौनपुर में अपनी आबादी के हिसाब से पत्रकारों की बेहिसाब बढ़ी तादात की अभद्रता को एक महिला डॉक्‍टर ने बहुत नायाब तोहफे से नवाज दिया। अपने नर्सिंग होम में हंगामा कर रहे इस पत्रकार को पहले तो डॉक्‍टर ने जूतियों से पीटा, फिर डण्‍डों से धुना। बाद में पत्रकार की ही तर्ज पर माफी मांग ली। बोली :- गलती हो गयी पत्रकार जी।

: नर्सिंग होम में हंगामा काटने पर लेडी डॉक्‍टर ने जूतियों से पीटा : जौनपुर में अपनी आबादी के हिसाब से पत्रकारों की बेहिसाब बढ़ी तादात की अभद्रता को एक महिला डॉक्‍टर ने बहुत नायाब तोहफे से नवाज दिया। अपने नर्सिंग होम में हंगामा कर रहे इस पत्रकार को पहले तो डॉक्‍टर ने जूतियों से पीटा, फिर डण्‍डों से धुना। बाद में पत्रकार की ही तर्ज पर माफी मांग ली। बोली :- गलती हो गयी पत्रकार जी।

वाकया हालांकि करीब एक सप्‍ताह पुराना है, लेकिन है बड़ा दिलचस्‍प। यह सबक भी है उन पत्रकारों के लिए जो पत्रकारिता की घुड़की के बल पर पत्रकारिता कम, अपना धंधा-पानी ज्‍यादा चलाते हैं। ऐसे लोगों की बेहिसाब बढ़ती तादात से त्रस्‍त जौनपुर के लोग इस वाकये को अब चटखारे लेकर एक-दूसरे को सुना रहे हैं।

मामला है एक बड़े अखबार के एक स्‍थानीय पत्रकार का। पिछले दिनों यह पत्रकार महोदय अपने किसी परिचित का इलाज कराने एक नर्सिंग होम पहुंचे। यह नर्सिंग होम एक प्रख्‍यात महिला डॉक्‍टर द्वारा संचालित किया जाता है। यहां पहुंचने पर पत्रकार जी ने नर्सिंग होम कर्मियों को अर्दब में लेना शुरू कर दिया। मकसद था, तयशुदा फीस न अदा करनी पड़े। लेकिन जब यह अर्दब काम नहीं आया तो पत्रकार जी ने नंगी गालियों का प्रयोग शुरू कर दिया। बताते हैं कि इस हंगामे के चलते वहां लॉबी में बैठे मरीज और उनके परिवारीजन दहशत में आ गये। हंगामे को सम्‍भालने पहुंचे डॉक्‍टर के देवर से भी इन पत्रकारजी ने गालियों से बात शुरू कर दी।

मामला बढ़ने पर आखिरकार महिला डॉक्‍टर अपने चैंबर से बाहर आ गयीं। नाराज डॉक्‍टर के कड़े तेवर देखते ही पत्रकार जी की पैंट गीली हो गयी। वे फौरन बचाव की मुद्रा में आ गये और बोले:- मुझसे गलती हो गयी, माफ कर दीजिए। लेकिन महिला डॉक्‍टर का पारा अब तक खासा भड़क चुका था। उन्‍होंने वहीं लाबी में अपनी सैंडिल उतारी और जुट गयीं पत्रकार महोदय पर। सैंडिल टूटी, तो पास पड़ी जमादार की झाड़ू से डण्‍डा खींच कर निकाला और रसीद करना शुरू कर दिया। बताते हैं कि जमीन पर बचाव की मुद्रा में उधर-उधर उलटते-पलटते पत्रकार महोदय ने केवल त्राहि-माम् त्राहि-माम् का ही जयकारा लगाया। करीब पांच मिनट तक चले इस धुनाई अभियान के बाद डॉक्‍टर साहब ने पत्रकार जी को उठाकर कुर्सी पर बिठाया, अपने

कुमार सौवीर

हाथों से गिलास भर कर पानी पिलाया और फिर उन्‍हीं के अंदाज में हाथ जोड़ कर बोलीं :- गलती हो गयी पत्रकार जी। माफ कर दीजिए।

लेखक कुमार सौवीर लखनऊ के जाने-माने और बेबाक पत्रकार हैं. कई अखबारों और न्यूज चैनलों में काम करने के बाद इन दिनों आजाद पत्रकारिता कर रहे हैं.उनसे संपर्क 09415302520 के जरिए किया जा सकता है.

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0 Comments

  1. shishir yaday

    September 22, 2011 at 8:17 am

    कुमार सौवीर बेबाक नहीं घटिया पत्रकार हैं. भड़ास में प्रकाशित इनकी सारी रिपोर्ट पढ़ लीजिए. वही इनके घटियापन का सार्टिफिकेट हैं.

  2. vijay yadav

    September 22, 2011 at 11:21 am

    कुमार जी , आपका लिखने का अंदाज काफी रोचक है. महिला डाक्टर की पीटाई के बाद भी अगर कोई कसर बाकी होगी , तो उसे आपकी यह लेखनी जरुर पूरी कर देगी
    . विजय यादव
    09664640077

  3. anand sharma. journalist chh.

    September 22, 2011 at 1:00 pm

    kumar ji apke batae anusaar na to un kathit patarkaar mahoday ka rabaiyya theek tha or sabse ghatiya rabaiyya to us lady doctor ka tha jisne kisi ki abhadrata ka jabab kanoon ko hanth me lekar or ek narityav ki saari maryadaon ko todte hue is tarah diya. agar vo bakai me ek famous doctor hoti to police ko ph karti na ki is tarah kanon ko apne hanth me lekar kisi ganvaru ourat ki tarah apne hi hospital (sansthan) me zoota-chappal karti. mai to kisi educated person (vo bhi ourat) se is tarah ki harkat ko occhi va galat manta hun.

  4. vishvanath

    September 23, 2011 at 9:14 am

    बहुत अच्छा किया. जगह जगह बेमतलब रोब झाड़ने वाले पत्रकारों को यही सजा मिलनी चाहिए

  5. suyash saxena bhp.

    September 24, 2011 at 9:24 am

    maine to suna tha ki rob jhadne ka department police ya netao ne apne hath me le rakha hai…..nischit roop se ye mahasay nakli or bikau patrakar honge, asli ko rob jhadne ki jarurat hi nahi padti. ye hindustan hai mere bhai…..isse afghanistan na banne de. kanoon ka kam kanoon ko karne dena chahiye..

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