समरस फाउंडेशन द्वारा पिछले कई वर्षों से उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वालों को सम्मानित किया जा रहा है. इस वर्ष जौनपुर के वरिष्ठ पत्रकार तथा प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया के जिला प्रतिनिधि डा. मधुकर तिवारी को पंडित तीर्थराज तिवारी स्मृति पत्रकारिता सम्मान प्रदान किया जाएगा.
पीएचडी के साथ एमए, एमएड तक शिक्षित डा. मधुकर तिवारी 1993 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. दैनिक जागरण से करियर शुरू करने वाले डा. तिवारी जौनपुर में अमर उजाला और हिंदुस्तान के ब्यूरोचीफ भी रहे. आकाशवाणी के जिला संवाददाता भी रहे. इन दिनों पीटीआई को अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
समरस फाउंडेशन के अध्यक्ष डा. किशोर सिंह ने बताया कि 20 मई को जौनपुर के बजरंग महाविद्यालय घनश्यामपुर में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में डा. मधुकर तिवारी को यह सम्मान प्रदान किया जाएगा. कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व सांसद कमला प्रसाद सिंह करेंगे. यशोभूमि के संपादक आनंद राज्यवर्धन तथा जौनपुर पत्रकार संघ के अध्यक्ष ओम प्रकाश सिंह बतौर प्रमुख अतिथि कार्यक्रम में शामिल होंगे. कार्यक्रम के समन्वयक समरस फाउंडेशन के विशेष सलाहकार शिवपूजन पांडे होंगे.












haqeeqat-e-jaunpur
March 31, 2011 at 9:47 am
हां, भाई। बदलते वक्त में पुरस्कारों की पात्रता भी जितना नीचे गिर सकती है, गिर रही है। यह मधुकर जी पूरे जौनपुर में कुख्यात हें। अपनी दलाली के लिए। इनका इतिहास दलाल से शुरू हुआ और आज भी पुरजोर जारी ह। एक फर्जी धंधेबाज के तौर पर इनकी पहचान पूरे जौनपुर में है। सबसे पहले तो यह सरकारी प्राइमरी के टीचर हुए, फिर छुट्टी लेकर बिना कलम पकडे ही पत्रकार हो गये। सरकारी टीचरी से इस्तीफा तो अब तक नहीं दिया, लेकिन अफसरों में पत्रकारिता के बल पर धौंसपट्टी का धंधा चोखा चल रहा है। हां, शुरू में कुछ दिन की छुट्टी जरूर ली थी जिसकी मियाद ना जाने कितने साल पहले ही पूरी हो गये। पूरा जीवन येन-केन-प्रकारेण विज्ञापन बटोरने वाले एक घटिया शख्स के तौर पर जाने पहचाने जाने वाले मधुकर तिवारी अपने परिवार में अकेले ही नहीं हैं, उनकी बहन भी सरकारी टीचरी की नौकरी पाये हैं, लेकिन आज तक केवल वहां से वेतन लेने ही जाती हैं। मधुकर भैया की धौंस वहां भी चलती है।
ऐसे ही ना जाने कितने धंधे और कुकर्म करने वालों को अब सम्मानित करने का दौर चल रहा है हमारे यहां।
अरे, बुढऊ कमला सिंह। यह तो देख लेते कि कभी एक भी ऐसी खबर मधुकर ने कभी लिखी है जिसे खबर कहा जा सके। लेकिन जमीन के नीचे पांव लटक जाने के बावजूद मधुकर जैसे चमचे पालने का अधम शौक इतनी आसानी से कहां छूटता है। चपे रहो दोस्त, चपे रहो