सम्मानित सदस्यों, यहां पर आपसे कुछ बातें साझा करनी जरूरी हो जाती है. जिस समय वर्तमान मैनेजमेंट ने कार्यभार संभाला उस समय दिवालिएपन की वजह से क्लब बंद होने के कगार पर खड़ा था और क्लब 1.5 करोड़ रुपये से भी ज्यादा की देनदारियां थीं. पिछले मैनेजमेंट की घोर लापरवाही और कुप्रबंधन के कारण 33.50 लाख रुपये से अधिक की धनराशि सरकारी संस्थाओं में नहीं जमा की थी, जिसमें वैट, पीएफ, ईएसआई आदि शामिल है.
यह एक आपराधिक कृत्य था जिसकी वजह से क्लब सील हो सकता था, बिजली, पानी कट सकता था और पीएफ, ईपीएफ न जमा होने पर वर्तमान मैनेजिंग को जेल हो सकती थी. सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि जून 2009 के बाद खातों का रख रखाव किया ही नहीं गया. इसलिए नई कमेटी को इस बात की जानकारी मिल ही नहीं पा रही कि पैसे कैसे आए और कहां खर्च हुए. नई कमेटी द्वारा करवाया गया स्पेशल ऑडिट यह खुलासा करता है कि क्लब से इस अवधि के दौरान पैसे लीक हुए हैं. महान और शानदार संस्था ‘प्रेस क्लब’ में ऐसे लोगों को ऑनरेरी मेम्बर बनाया गया जिनका राष्ट्र व समाज के निर्माण में दूर-दूर तक कोई नाता नहीं था. इस श्रेणी में फोटो स्टूडियो के एक मालिक, एक एअर कंडीशनर विक्रेता, विदेश मंत्रालय के एक सेक्शन आफिसर तक को शामिल किया गया. पूछने पर मैनेजमेंट का जवाब था कि मेम्बर कोई भी नहीं बनाया गया. बाद में पता चला कि सेसे आनरेरी मेम्बर्स की संख्या 50 से ऊपर है.
खाद्य वस्तुओं, सब्जी व मदिरा की आपूर्ति करने वाले सप्लायरों के बीच क्लब की साख खत्म होने के कगार पर पहुंच गई. पैसा न मिलने के कारण तमाम आपूर्तिकर्ताओं ने अपनी सप्लाई बंद करा दी. फरेब व झूठ का सहारा लेकर बैंक खाते में पैसा न होते हुए भी चेक तो जारी कर दिए गए पर वे भुनाए नहीं जा सके. 300 से ज्यादा चेक ‘डिसआनर’ हुए जिस पर क्लब को हजारों रुपये हर्जाना देना पड़ रहा है. अपने लोगों को खाने-पिलाने के नाम पर पूर्व प्रबंधन ने करीब 4 लाख रुपये की धनराशि पानी की तरह बहा दी. रोजाना चाय, काफी, खाने-पीने पर तकरीबन 500 रुपये खर्च करने के तो वाऊचर ही नहीं है. वेटर व किचन के कर्मचारियों ने भी इस बात की पुष्टि की है.
मुफ्त मदिरा तथा खाने की वस्तुएं घर ले जाने की अराजकता में कुछ कर्मचारियों की भी मिलीभगत थी. सप्लायरों ने इस बात की पुष्टि की कि भुगतान पाने के लिए उनसे कमीशन मांगा गया. इन कर्मचारियों ने हेरा-फेरी के लिए क्लब के कागजातों को छिपाया, नष्ट किया और नई मैनेजमेंट कमेटी को परेशानी में डाला. जांच-पड़ताल व सबूतों के आधार पर ऐसे ही दो कर्मचारियों को नौकरी से निकला दिया गया है. लोगों को डराने-धमकाने व बेवजह मुकदमा दर्ज करवा कर उससे लड़ने पर गत वर्ष 5 लाख रुपये कोर्ट-कचहरी पर खर्च हुए. वाऊचर बताते हैं कि इससे पहले भी 3 लाख रुपये खर्च हुए. नई कमेटी ने करीब 10 मुकदमों को कोर्ट से वापस ले लिया है तथा अब कानूनी मामलों का खर्चा लगभग शून्य है.
क्लब के कागजात इस बात का खुलासा करते हैं कि कई मेम्बरों से सदस्यता शुल्क लिया गया पर वह खाते में जमा नहीं हुआ. एक एसोसिएट सदस्य को बिना 40 हजार रुपये की धनराशि लिए कार्ड जारी कर दिया. पर सदस्य का कहना है कि उसने पैसे दिए हैं. ऐसे ही कई मामले और भी हैं. भारत सरकार द्वारा क्लब को आवंटित की जाने वाली जमीन को लेकर लगातार भ्रामक प्रचार व झूठा दावा किया जाता रहा. खास अवसरों पर नए परिसर के नक्शे का माया जाल और सम्पूर्ण धनराशि जमा करने की बात की जाती रही. पर सच्चाई यह है कि जमीन के बाबत क्लब को अभी 1 करोड़ रुपये देने हैं और लीज पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं.
पूर्व प्रबंधन ने 1 लाख रुपये की लागत से प्रेस क्लब की वेबसाइट का निर्माण करवाया था. आश्चर्य इस बात का है कि जिस कंपनी ने इसका निर्माण किया था वह शिमला में है और वहीं से इसका नियंत्रण होता था. यह कंपनी एक आर्डिनरी मेम्बर के बेटे की है. नई कमेटी में आने के बाद कंपनी ने अपनी मनमानी और तीन महीने के पत्र-व्यवहार में आनाकानी शुरू कर दी. अब सदस्यों ने मिलजुल कर वेबसाइट के मामले में हल्का-हल्का कार्य करना शुरू किया है जिसकी परिकल्पना व संचालन में आप सभी सदस्यों का सहयोग अपेक्षित है.
4 महीने के प्रयास : नई मैनेजिंग कमेटी ने अपने 4 महीने के कार्यकाल के दौरान 1 करोड़ से अधिक की देनदारियां अदा की हैं. खाने-पीने की मुफ्तखोरी व लीकेज पर पूरी तरह लगाम कसी है. बिक्री बढ़ी है. आपके सहयोग से. क्लब के माहौल में बदलाव आने के बाद क्लब की संस्कृति में दबे पांव सुधार आया है और पत्रकारिता से जुड़े चेहरे दिखाई देने लगे हैं. हालांकि शुरू-शुरू में नई कमेटी के सदस्यों को धमकी का सामना करना पड़ा. जब एक बार पांच लोग स्थानीय आबकारी इंस्पेक्टर के मित्र बताकर बिल न अदा करने की बात पर अड़ गए. मैनेजिंग कमेटी द्वारा बनाई गई स्क्रीनिंग कमेटी ने जांच-पड़ताल के बाद पाया कि तमाम दिवंगत सदस्यों की सदस्य संख्या पर चहेतों को नम्बर आवंटित कर दिए गए. लाइजन करने वाले कई मेम्बरों को साधारण सदस्य बनाकर वोट देने का अधिकार दिया गया. और कई साधारण सदस्यों को मनमर्जी से वोट देने के अधिकार से वंचित किया गया. स्क्रीनिंग कमेटी का कार्य जारी है और वह मानकों के अनुरूप सुचारू रूप से काम कर रही है.
पूर्व प्रबंधन द्वारा देय वैट की 17 लाख रुपये से अधिक की देनदारी, जिसमें 4 लाख रुपये हर्जाना भी शामिल है, नई कमेटी ने अदा कर दिया है. मार्च 2010 से बिजली का बिल (रुपये 9 लाख) न जमा करवाने से कनेक्शन काटने का नोटिस आया. जिससे आनन-फानन में 1.80 लाख रुपये की राशि जमा करनी पड़ी और अब प्रतिमाह 70,000 रुपये की किश्त दी जा रही है. पिछली कमेटी के समय ओवर ड्राफ्ट 26 लाख रुपये था जो वर्ममान कमेटी के समय 15 लाख रुपये है.
सदस्यों के सहयोग और उनके क्लब आने से विगत 4 महीनों में 83 लाख रुपये की आमद हुई है. इसमें 80 प्रतिशत पुरानी देनदारी निपटाई जा चुकी है. लेकिन रास्ता अभी भी लंबा है और तमाम घोषित-अघोषित और आपकी इच्छानुसार कार्य नई कमेटी को करने हैं ताकि क्लब संस्कृति व क्लब का भविष्य निष्ठावान, ऊर्जावान व ईमानदार हाथों में सौंपा जा सके. अत: अप्रैल 9, 2011 को सायं 3 बजे ईजीएम में जरूर उपस्थित हों. आपका का विश्वास और सहयोग क्लब की ताकत है.
(प्रेस क्लब आफ इंडिया की मैनेजिंग कमेटी की तरफ से जारी)













himanshu
April 7, 2011 at 4:32 pm
press club ka kalmadi wahi tha jo kai saal tak lagaataar gen secy raha, puri recovery usi se honi chaiye.
ADARSH GOSWAMI
April 7, 2011 at 5:30 pm
yeh PATRKARO KA CLUB HEI KI BAIEMANO KA, anna hazare ko shayad yeh bat malum
nahi hei