प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनाव को देखते हुए प्रेस के लिए कुछ दिशा-निर्देश जारी किए हैं. प्रेस काउंसिल ने कहा है कि प्रेस को राजनीतिक दलों या उम्मीदवारों की ओर से किसी तरह के प्रलोभन को स्वीकार नहीं करना चाहिए और चुनाव पूर्व सर्वेक्षण छापने में सावधानी बरतनी चाहिए.
‘पेड न्यूज’ को लेकर पैदा हुए विवाद की पृष्ठभूमि में प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने कहा है कि चुनाव के दौरान कोई भी अखबार चुनाव की अंतिम तिथि समाप्त होने तक एग्जिट पोल सर्वेक्षण प्रकाशित नहीं करेगा. हालांकि बेहद ठोस और सटीक सर्वेक्षण के मामले में इससे छूट ली जा सकती है. निर्देशों में इसके साथ ही कहा गया है कि जब भी अखबार चुनाव पूर्व सर्वेक्षण प्रकाशित करता है, तो उसे बड़ी सावधानी से सर्वेक्षण कराने वाले संस्थान की जांच-पड़ताल करनी चाहिए. इसमें सर्वेक्षण के आकार, अपनाई गई विधि आदि बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए.
प्रेस काउंसिल ने प्रेस से कहा है कि वह किसी पार्टी या उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार करने के लिए किसी भी प्रकार का प्रलोभन स्वीकार न करे. दिशा-निर्देशों के मुताबिक, प्रेस को किसी भी उम्मीदवार के व्यक्तिगत आचरण या आचार-व्यवहार को लेकर आलोचनात्मक या झूठी टिप्पणियों को प्रकाशित करने से बचाना चाहिए. उसे समय-समय पर चुनाव आयोग या निर्वाचन या निर्वाचन अधिकारी या मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से जारी किए गए आदेशों और निर्देशों का पालन करना चाहिए.
इन निर्देशों में यह भी कहा गया है कि प्रेस से यह उम्मीद नहीं की जाती कि वह किसी पार्टी या उम्मीदवार विशेष के लिए प्रचार में शामिल होगा. यदि वह ऐसा करता है तो उसे दूसरे पक्ष या प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार को भी जवाब देने का अधिकार देना होगा. दिशा-निर्देश आगे कहते हैं कि चुनाव प्रचार के बारे में रिपोर्ट देते समय एक अखबार को किसी उम्मीदवार की ओर से उठाए गए महत्वपूर्ण मुद्दे को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और उसके प्रतिद्वंद्वी पर हमला नहीं बोलना चाहिए.
इन दिशा-निर्देशों में यह भी कहा गया है कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत सांप्रदायिक और जातीय आधार पर चुनाव प्रचार प्रतिबंधित है. इसमें कहा गया है कि प्रेस को ऐसी रिपोर्टों के बारे में सावधान रहना चाहिए जो धर्म, क्षेत्र, नस्ल, जाति, संप्रदाय या भाषा के आधार पर लोगों के बीच दुश्मनी या नरफरत पैदा करते हों. साभार : जनसत्ता











