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दुख-दर्द

बौखलाए अधिकारियों ने कार्बेट पार्क में मीडिया पर पाबंदी लगाई

: बाघ की मौत के कवरेज से रोका : पत्रकारों ने प्रधानमंत्री, मुख्‍यमंत्री एवं पर्यावरण मंत्री को पत्र लिखा :  एक ओर देश में सीमित संख्या में बचे बाघों की सुरक्षा व संरक्षण को लेकर चिंता जाहिर की जा रही है, वहीं कार्बेट पार्क जैसे अतंरराष्ट्रीय महत्व वाले टाइगर रिजर्व में बाघों की सिलसिलेवार मौतों का सच देश की आम जनता तक पहुंचने से रोकने को उत्तराखंड का वन्यजीव विभाग मीडिया पर पाबन्दी लगाने लगा है। लगता है मीडिया पर पाबन्दी लगाकर वह अपनी लचर कार्यप्रणाली और बाघों, हाथियों व दुर्लभ वन्यजीवों की अस्वभाविक मौतों की सच्चाई छुपाना चाहता है। मगर राज्य के मीडियाकर्मियों ने राज्य के मुख्य वन्यजीव वार्डन एवं कार्बेट पार्क प्रशासन के इस तुगलकी रवैये के खिलाफ प्रधानमंत्री, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री और राज्य के मुख्यमंत्री से शिकायत करके आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

: बाघ की मौत के कवरेज से रोका : पत्रकारों ने प्रधानमंत्री, मुख्‍यमंत्री एवं पर्यावरण मंत्री को पत्र लिखा :  एक ओर देश में सीमित संख्या में बचे बाघों की सुरक्षा व संरक्षण को लेकर चिंता जाहिर की जा रही है, वहीं कार्बेट पार्क जैसे अतंरराष्ट्रीय महत्व वाले टाइगर रिजर्व में बाघों की सिलसिलेवार मौतों का सच देश की आम जनता तक पहुंचने से रोकने को उत्तराखंड का वन्यजीव विभाग मीडिया पर पाबन्दी लगाने लगा है। लगता है मीडिया पर पाबन्दी लगाकर वह अपनी लचर कार्यप्रणाली और बाघों, हाथियों व दुर्लभ वन्यजीवों की अस्वभाविक मौतों की सच्चाई छुपाना चाहता है। मगर राज्य के मीडियाकर्मियों ने राज्य के मुख्य वन्यजीव वार्डन एवं कार्बेट पार्क प्रशासन के इस तुगलकी रवैये के खिलाफ प्रधानमंत्री, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री और राज्य के मुख्यमंत्री से शिकायत करके आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

उत्तराखंड के रामनगर में स्थित विश्वप्रसिद्व कार्बेट नेशनल पार्क में बाघ की मौत की कवरेज करने गए पत्रकारों को गोपनीयता का हवाला देकर विभागीय अधिकारियों ने रास्ते में ही रोक दिया। विरोध जताने पर प्रदेश के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने पत्रकारों को विभागीय कार्रवाई करने की चेतावनी तक दे डाली। कार्बेट में लगातार बाघों व हाथियों की मौतों की कवरेज से परेशान अधिकारियों ने बौखलाहट के बाद यह कदम उठाया है। पत्रकारों ने रामनगर मीडिया सेंटर में बैठक करके कवरेज पर रोक लगाने की निंदा करते हुए पीएम, सीएम व केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री को ज्ञापन भेजा है। वहीं मीडिया पर कवरेज की पाबंदी लगाने व लगातार बाघों की मौत से गुस्साए वन्यजीव प्रेमियों ने प्रदेश के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक श्रीकांत चंदोला का पुतला फूंककर उनके तबादले की मांग भी की है।

यह वाकया शनिवार दोपहर बाद का है। सूचना मिली कि कार्बेट के कालागढ़ रेंज में बाघ का शव मिला है। जिसके बाद इलेक्ट्रानिक मीडिया आजतक, सहारा समय, ईटीवी, साधना न्यूज, टीवी 100 के पत्रकार कवरेज करने मौके पर रवाना हो गए। लेकिन घटनास्थल से चंद किलोमीटर दूर ही वन एवं पर्यावरण अनुश्रवण समिति के सलाहकार अनिल बलूनी व उपनिदेशक ने मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक श्रीकांत चंदोला का इंतजार करने व उनके साथ अंदर जाने की बात कहकर रोक दिया गया। जब श्रीकांत चंदोला वहां पहुंचे तो वह पत्रकारों को देखकर भड़क गए। उन्होंने पत्रकारों से मिलना तो दूर उनके पार्क के भीतर आने पर परमिट मांग डाला। चंदोला के रूख से पत्रकार हतप्रभ रह गए। उन्होंने बाघ के शव की कवरेज करने की मांग की। जिसको नकारे जाने के बाद पत्रकारों व चंदोला के बीच तीखी बहस हुई। कवरेज से रोके जाने से गुस्साए पत्रकारों की अनिल बलूनी से भी तीखी तकरार हो गई। बलूनी ने तो खुद को वरिष्ठ पत्रकार बताते हुए मीडिया में अपनी पहुंच होने की भभकी भी पत्रकारों को दी। बाद में पत्रकारों को बगैर कवरेज किए ही वापस लौटना पड़ा।

रविवार को घटना की जबरदस्त प्रतिक्रिया भी देखने को मिली। कार्बेट टाइगर रिजर्व में लगातार हो रही बाघों की मौत लिए वन्यजीव प्रेमियों ने मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को जिम्मेदार ठहराते हुए पुतला दहन किया। गुस्साए लोगों ने सीएम को ज्ञापन भेजकर श्रीकांत चंदोला की हटाने की मांग की। गौरतलब है कि कार्बेट निदेशक ने वन्यजीवों की मौत होने की दशा में पारदिर्शता बरतने के मकसद से बाघ बचाओ समिति व मीडिया कर्मियों को पार्क में जाने की अनुमति होने की बात कही थी। मगर कालागढ़ में बीते दिनों मरे बाघ तक समिति के सदस्यों व मीडियाकर्मियों को घटनास्थल तक जाने से पहले ही रोक दिया गया। वहीं कार्बेट टाइगर रिजर्व में हुई बाघ की मौत की कवरेज करने गए मीडियाकर्मियों को रोकने पर श्रमजीवी पत्रकार संगठन ने गहरा रोष जताया है। उन्होंने कहा कि कवरेज से रोका जाना मीडिया की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। वन विभाग के अधिकारी नेशनल पार्क को निजी जागीर मान बैठे हैं। इसे कतई बर्दाश्त नही किया जाएगा। बैठक में श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के अध्यक्ष गणेश रावत, महासचिव आसिफ इकबाल, प्रभात ध्यानी, विनोद पपनै, जितेंद्र पपनै, गितेश त्रिपाठी, गोविंद पाटनी, खुशाल रावत, आसिफ इकबाल, जफर सैफी, मदन बिष्ट, सलीम मलिक, राजीव अग्रवाल, चंचल गोला, चंदन बंगारी, त्रिलोक रावत, असलम , दानिश खान, रोहित गोस्वामी, शमीम दुर्रानी सहित अनेक मौजूद रहे।


 

उत्तराखण्ड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन शाखा ईकाई- रामनगर (नैनीताल)

दिनांक: …20 2 2011.

सेवा में,

श्री मनमोहन सिंह

माननीय प्रधानमंत्री

भारत सरकार/अध्यक्ष

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण

विषय:-  कॉर्बेट नेशनल पार्क प्रशासन द्वारा मीडिया पर पाबन्दी लगाये जाने के सम्बन्ध में।

मान्यवर,

उत्तराखण्ड के रामनगर (नैनीताल) में विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट नेशनल पार्क का मुख्यालय स्थित है। यहाँ कार्यरत मीडिया कर्मियों को अक्सर कॉर्बेट पार्क की गतिविधियों और उसमें निवास करने वाले बाघ हाथी व अन्य दुर्लभ वन्य जीवों के बारे में समाचार संकलन हेतु जाना पड़ता है, परन्तु इस राष्ट्रीय-अर्न्तराष्ट्रीय महत्व वाले राष्ट्रीय उद्यान में बाघ, हाथी व अन्य दुर्लभ प्राणियों की मौतों के मामले में पार्क प्रशासन द्वारा मीडिया से छुपाये जाते हैं तथा पार्क के जंगलों के भीतर उनकी मौतों पर पत्रकारों को कवरेज करने से रोका जाता है। इस तथ्य से आप शायद अवगत होंगे कि कॉर्बेट पार्क में बीते एक माह में 4 बाघों की मौत के अलावा कॉर्बेट लैण्डस्केप में 9 हाथी अपनी जान गंवा चुके हैं तथा हाल में पार्क से वन्य जीव तस्करों का एक गिरोह भी पकड़ा गया है। दिनांक 19.02.2011 को पार्क के कालागढ़ रेंज में एक और बाघ की मौत हुई, जिसकी कवरेज करने पत्रकारों की एक टीम मौके पर रवाना हुई। मगर राज्य के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, राज्य वन्यजीव सलाहाकार बोर्ड उपाध्यक्ष व पार्क निदेशक ने पत्रकारों को घटनास्थल तक जाने से रोक दिया। ताकि बाघ की मौत का सच सामने न आये। इस संदर्भ में घटनास्थल के कोर जोन में पड़ने का उनका तर्क किसी के भी गले नहीं उतर रहा है, क्योंकि वन्य जीव अधिनियम इस बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं करता। इस दौरान पत्रकारों के साथ मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक व अन्य अधिकारियों द्वारा असहयोग के साथ ही जमकर अभद्र व्यवहार भी किया गया।

अतः आपसे अनुरोध है कि पार्क प्रशासन और उत्तराखण्ड के मुख्य वन्यजीव वार्डन को इस बारे में आवश्यक निर्देश दिये जायें, ताकि मीडिया के जरिये पार्क प्रशासन की कार्यप्रणाली और दुर्लभ वन्य प्राणियों की सिलसिलेबार मौतों की हकीकत सामने न आ सके वरना करोड़ों रूपये के खर्च से चलायी जा रही बाघ परियोजना संकट में आ जायेगी तथा स्थानीय मीडिया के साथ असहयोगपूर्ण रूप से पार्क प्रशासन के प्रति आम जनता में अविश्वास पैदा होगा।

अतः आपसे अनुरोध है कि निरंकुश बने पार्क अधिकारियों पर कार्यवाही के साथ-साथ भविष्य में पार्क के भीतर घटने वाली दुर्घटनाओं में पत्रकारों की त्वरित कवरेज की अनुमति दी जाये, ताकि विभाग की कार्यप्रणाली पर पारदर्शिता बनी रहे।

धन्यवाद।

भवदीय,

समस्त मीडियाकर्मी
उत्तराखण्ड श्रमजीवी पत्रकार यूनयिन
रामनगर (नैनीताल)


 

उत्तराखण्ड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन शाखा ईकाई- रामनगर (नैनीताल)

दिनांक: 20.02.2011.

सेवा में,

श्रीमान जयराम रमेश जी

माननीय मंत्री वन एवं पर्यावरण

भारत सरकार, दिल्ली।

विषय:-  कॉर्बेट नेशनल पार्क प्रशासन द्वारा मीडिया पर पाबन्दी लगाये जाने के सम्बन्ध में।

मान्यवर,

उत्तराखण्ड के रामनगर (नैनीताल) में विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट नेशनल पार्क का मुख्यालय स्थित है। यहाँ कार्यरत मीडिया कर्मियों को अक्सर कॉर्बेट पार्क की गतिविधियों और उसमें निवास करने वाले बाघ हाथी व अन्य दुर्लभ वन्य जीवों के बारे में समाचार संकलन हेतु जाना पड़ता है, परन्तु इस राष्ट्रीय-अर्न्तराष्ट्रीय महत्व वाले राष्ट्रीय उद्यान में बाघ, हाथी व अन्य दुर्लभ प्राणियों की मौतों के मामले में पार्क प्रशासन द्वारा मीडिया से छुपाये जाते हैं तथा पार्क के जंगलों के भीतर उनकी मौतों पर पत्रकारों को कवरेज करने से रोका जाता है। इस तथ्य से आप शायद अवगत होंगे कि कॉर्बेट पार्क में बीते एक माह में 4 बाघों की मौत के अलावा कॉर्बेट लैण्डस्केप में 9 हाथी अपनी जान गंवा चुके हैं तथा हाल में पार्क से वन्य जीव तस्करों का एक गिरोह भी पकड़ा गया है। दिनांक 19.02.2011 को पार्क के कालागढ़ रेंज में एक और बाघ की मौत हुई, जिसकी कवरेज करने पत्रकारों की एक टीम मौके पर रवाना हुई। मगर राज्य के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, राज्य वन्यजीव सलाहाकार बोर्ड उपाध्यक्ष व पार्क निदेशक ने पत्रकारों को घटनास्थल तक जाने से रोक दिया। ताकि बाघ की मौत का सच सामने न आये। इस संदर्भ में घटनास्थल के कोर जोन में पड़ने का उनका तर्क किसी के भी गले नहीं उतर रहा है, क्योंकि वन्य जीव अधिनियम इस बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं करता। इस दौरान पत्रकारों के साथ मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक व अन्य अधिकारियों द्वारा असहयोग के साथ ही जमकर अभद्र व्यवहार भी किया गया।

अतः आपसे अनुरोध है कि पार्क प्रशासन और उत्तराखण्ड के मुख्य वन्यजीव वार्डन को इस बारे में आवश्यक निर्देश दिये जायें, ताकि मीडिया के जरिये पार्क प्रशासन की कार्यप्रणाली और दुर्लभ वन्य प्राणियों की सिलसिलेबार मौतों की हकीकत सामने न आ सके वरना करोड़ों रूपये के खर्च से चलायी जा रही बाघ परियोजना संकट में आ जायेगी तथा स्थानीय मीडिया के साथ असहयोगपूर्ण रूप से पार्क प्रशासन के प्रति आम जनता में अविश्वास पैदा होगा।

अतः आपसे अनुरोध है कि निरंकुश बने पार्क अधिकारियों पर कार्यवाही के साथ-साथ भविष्य में पार्क के भीतर घटने वाली दुर्घटनाओं में पत्रकारों की त्वरित कवरेज की अनुमति दी जाये, ताकि विभाग की कार्यप्रणाली पर पारदर्शिता बनी रहे।

धन्यवाद।

भवदीय,

समस्त मीडियाकर्मी
उत्तराखण्ड श्रमजीवी पत्रकार यूनयिन
रामनगर (नैनीताल)


 

उत्तराखण्ड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन शाखा ईकाई- रामनगर (नैनीताल)

दिनांक: 20.02.2011.

सेवा में,

श्री रमेश पोखरियाल निशंक

माननीय मुख्यमंत्री,

उत्तराखण्ड शासन, देहरादून।

विषय:-  कॉर्बेट नेशनल पार्क प्रशासन द्वारा मीडिया पर पाबन्दी लगाये जाने के सम्बन्ध में।

मान्यवर,

उत्तराखण्ड के रामनगर (नैनीताल) में विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट नेशनल पार्क का मुख्यालय स्थित है। यहाँ कार्यरत मीडिया कर्मियों को अक्सर कॉर्बेट पार्क की गतिविधियों और उसमें निवास करने वाले बाघ हाथी व अन्य दुर्लभ वन्य जीवों के बारे में समाचार संकलन हेतु जाना पड़ता है, परन्तु इस राष्ट्रीय-अर्न्तराष्ट्रीय महत्व वाले राष्ट्रीय उद्यान में बाघ, हाथी व अन्य दुर्लभ प्राणियों की मौतों के मामले में पार्क प्रशासन द्वारा मीडिया से छुपाये जाते हैं तथा पार्क के जंगलों के भीतर उनकी मौतों पर पत्रकारों को कवरेज करने से रोका जाता है। इस तथ्य से आप शायद अवगत होंगे कि कॉर्बेट पार्क में बीते एक माह में 4 बाघों की मौत के अलावा कॉर्बेट लैण्डस्केप में 9 हाथी अपनी जान गंवा चुके हैं तथा हाल में पार्क से वन्य जीव तस्करों का एक गिरोह भी पकड़ा गया है। दिनांक 19.02.2011 को पार्क के कालागढ़ रेंज में एक और बाघ की मौत हुई, जिसकी कवरेज करने पत्रकारों की एक टीम मौके पर रवाना हुई। मगर राज्य के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, राज्य वन्यजीव सलाहाकार बोर्ड उपाध्यक्ष व पार्क निदेशक ने पत्रकारों को घटनास्थल तक जाने से रोक दिया। ताकि बाघ की मौत का सच सामने न आये। इस संदर्भ में घटनास्थल के कोर जोन में पड़ने का उनका तर्क किसी के भी गले नहीं उतर रहा है, क्योंकि वन्य जीव अधिनियम इस बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं करता। इस दौरान पत्रकारों के साथ मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक व अन्य अधिकारियों द्वारा असहयोग के साथ ही जमकर अभद्र व्यवहार भी किया गया।

अतः आपसे अनुरोध है कि पार्क प्रशासन और उत्तराखण्ड के मुख्य वन्यजीव वार्डन को इस बारे में आवश्यक निर्देश दिये जायें, ताकि मीडिया के जरिये पार्क प्रशासन की कार्यप्रणाली और दुर्लभ वन्य प्राणियों की सिलसिलेबार मौतों की हकीकत सामने न आ सके वरना करोड़ों रूपये के खर्च से चलायी जा रही बाघ परियोजना संकट में आ जायेगी तथा स्थानीय मीडिया के साथ असहयोगपूर्ण रूप से पार्क प्रशासन के प्रति आम जनता में अविश्वास पैदा होगा।

अतः आपसे अनुरोध है कि निरंकुश बने पार्क अधिकारियों पर कार्यवाही के साथ-साथ भविष्य में पार्क के भीतर घटने वाली दुर्घटनाओं में पत्रकारों की त्वरित कवरेज की अनुमति दी जाये, ताकि विभाग की कार्यप्रणाली पर पारदर्शिता बनी रहे।

धन्यवाद।

भवदीय,

समस्त मीडियाकर्मी
उत्तराखण्ड श्रमजीवी पत्रकार यूनयिन
रामनगर (नैनीताल)

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0 Comments

  1. pardeep mahajan

    February 21, 2011 at 1:06 pm

    galat baat hai parshasan ki-amit

  2. shashi shekhar

    February 21, 2011 at 4:53 pm

    isko khte hai khuleaam looot

  3. dinesh mansera

    February 22, 2011 at 9:08 am

    corbett mei poachers hai is khulase ke baad corbett parshsan bokhala gaya hai..yahan abhi aur tathaya samne aayenge..

  4. dinesh mansera

    February 22, 2011 at 9:10 am

    yahan corbett parshasan tanashah ho gaya hai media ne ye khulasa kar diya ki park mei poaching hoti hai

  5. खुशाल रावत

    February 22, 2011 at 6:21 pm

    खबर वही होती जो छुपाई जाती है,बाकी तो सब विज्ञापन है,कॉर्बेट पार्क प्रशासन जिसको मीडिया से छुपाना चाह रहा है वही खबर है,
    खुशाल रावत,संपादक-एटम बम,रामनगर

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