पटना से सूचना है कि मौर्य टीवी ने अपने दो कर्मियों को गलत काम करने के आरोप में चैनल से बाहर का रास्ता दिखा दिया है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एनडीटीवी के भूतपूर्व कैमरामैन अकरम अली, जो इन दिनों मौर्य टीवी के साथ थे, और मौर्य टीवी के क्राइम रिपोर्टर इरफान आलम पर एक डाक्टर से लाखों रुपए रंगदारी मांगने और खबर चलाने के नाम पर ब्लैकमेल करने का आरोप है.
बताया जाता है कि डाक्टर ने इन दोनों का ब्लैकमेल करते हुए स्टिंग कर लिया और इसे मौर्य प्रबंधन को सौंप दिया. पूरा मामला जब मौर्य के मालिक व मशहूर फिल्मकार प्रकाश झा तक पहुंचा तो उन्होंने तुरंत दोनों को बाहर का रास्ता दिखा देने का आदेश जारी करा दिया. उधर, कुछ लोगों का कहना है कि इरफान का इस प्रकरण में कोई दोष नहीं था क्योंकि उसे अकरम ने अस्पताल में गड़बड़ी होने की जानकारी देकर शूट के लिए बुला लिया था और बाद में इस शूट के आधार पर डाक्टर को ब्लैकमेल करने लगा.












mediaguy05
October 21, 2010 at 6:06 pm
akram to pahle se hi frod ta sayad der se hi magar uska asli roop maurya mai bhi samne aa hi gaya, ye akram ne pahle se frod ta………
mukesh
October 21, 2010 at 9:36 pm
अकरम की तो नहीं मालूम, मगर इरफ़ान तो ”चढ़ जा बेटा सूली पर भला करेगा सुनील पांड” के नाम पर नप गया. बेचारा करता भी तो क्या? सुनील पाण्डेय को पैसा देने के लिए कुछ न कुछ तो करता ही…. सो बेचारा फंस गया.
chandan srivastava
October 22, 2010 at 2:34 am
dono ke naam nahi chhapne chahiye the…1 percent bhi maan lijiye pata nahi kis sadyantra ka shikar hue ho ye log… ab sting doctor ke liye asan to hoga nhi…kisi shubhchintak apne sathi ne madad jaroor ki hogi..100 % galti ho to bhi naam nahi chhapna chahiye tha…career khatm ho gaya becharo ka..bina naam chhape sudharne ka mauka diya jana chahiye tha
mario
October 22, 2010 at 3:26 pm
नाम जरुर छापना चाहिए था. बल्कि डिटेल रिपोर्ट आनी चाहिए क्या हम अखबार में चोरी करते पकडे जाने पर नाम नहीं छापते? क्या रिश्वत लेते पकडे जाने वालो का नाम नहीं छपता? फिर हम पत्रकारों के लिए दूसरा मापदंड क्यों? हमारी तो और भी जिम्मेदारी है की हम जब सबके बारे में लिखते, बोलते और राय देते है तो हम क्यों किसी scrutiny के परे रहे. अगर उनका करियर ख़तम हो रहा है तो ये उनकी जिम्मेदारी है. इन्ही कर्मो के कारन आज हमारी विश्वश्नियता शुन्य है. कुछ कीजिये ताकि हमारे पेशे क़ो इज्जत मिल सके . हमारे बच्चे कह सके की पापा journalist है और उनके दोस्त या दोस्तों के घरवाले मुस्कुराये नहीं.
डाक्टर क़ो स्टिंग के लिए दोषी ठहराना जल्लाद पर हत्या का मुक़दमा करने के बराबर है हो सकता है लोगो ने कैमरा वगैरह लगाने में उसकी मदद की होगी. लेकिन ब्लैक मेलिंग से बचने का उपाय क्या हो सकता है दूसरा अकरम अली और इरफ़ान क़ो तो किसी ने पैसे माँगने के लिए नहीं सिखाया था
मुझे अकरम अली और इरफ़ान से कोई सहानभूति नहीं है. आज अधिकारी या पोलिटीसियन हमें एक मोबाइल फ़ोन ले के स्टोरी करनेवाला समझता है तो हमें रूककर सोचना चाहिए की हम कहा आ गए है लेकिन fairness के लिए अगर वो चाहे तो उन्हें भी अपनी बात कहने का मौका मिलना चाहिए.
यशवंत भाई पत्रकारिता के गिरते स्तर का सबसे बड़ा कारण है की यहाँ मेरिट नहीं बल्कि जान-पहचान के आधार पर नौकरिया दी जाती है . क़ोइ लिखित टेस्ट का प्रोविजन नहीं है. हमें अगर स्तर सुधारना है और विस्वसनीय बनाना है तो पहले इंट्री लेवल पर ही गलत लोगो क़ो रोकना होगा
मैं एक अंग्रेजी मीडिया में काम करता हु. मेरी सैलरी सालाना 7 लाख से ज्यादा है . जहा तक मुझे पता है अकरम अली की भी सैलरी सालाना 7 लाख से ज्यादा थी. हो सकता है वो भी मेरी तरह अपनी तनखा से नाखुश हो. मैं अपना उदहारण इसलिए नहीं दे रहा हूँ की मैं कोई आदर्श दिखना चाहता हूँ मैं तो खुद अपने लिए आदर्श नहीं बन सका हूँ तो दुसरो क़ो क्या सिखा सकता हूँ . लेकिन हाँ मैं एक उदहारण दे रहा हूँ अपनी सैलरी बढ़ने के लिए देश के कई मीडिया organizations में बात कर रहा हूँ संभव है बात बन भी जाये पर बहुत वक्त लग रहा है लेकिन इसका मतलब ये तो नहीं की मैं बैंक लुटने निकल जाऊ इसलिए की मेरी पत्नी क़ो मेरी पुरानी santro के बदले अब Maruti Dzire चाहिए
यशवंत भाई नाम नहीं देना चाहते हूँ
manoj dubey
October 24, 2010 at 1:29 am
kuch eaise logo ko adat padi hai ki blackmailing kar ke gujara karne ki, black mailer akasar midia me pai jate hai.
Raj
October 28, 2010 at 8:25 pm
Naam chhap kr bada hi nek kaam kia hai aapne.
Waise bhi dono ka hi yahi itihas raha hai chahe wo Akram ali hon ya fir Irfan.
Akram ali ka itihas janne ke liye kisi bhi varisht NDTV karmi se pata kr len ki unhe kis aarop me NDTV se nikal bahar kia gaya tha. Yahi haal Irfan ka hai Aaj se thik 1.5 saal pehle blackmailing ke hi aarop me unhe nikal bahar kia gaya tha baad me pura staff change karte wqt pairon pr girkr naukri wapas li thi.
Bhai Prakash jha boya babul to ful kahan se paoge.
Pehle hi kaha tha humne ki Gadha kitna hi mehga kyun na ho Ghodo ki race me ni daudaya jata.
Suna hai aapke mukesh bhaiya bhi TV 9 ke chakkar laga rahe hain.
Jai ho…………
srp
October 31, 2010 at 2:13 pm
keya baat hai bhai aisa hin hua hai muzaffarpur ke sakra prkhand ke dholi ke ek doctor ke sath jaha se muzaffarpur ka streenger chandraprakash ne 50.000 ka cheque or 5000 cash yah kah kar le liya ki khabar aap ke khilaf kisi jagah nahi chalegi es baat ki jaankari aaj pepar sahara tv or p7news ko lag gai in logo ne khabar chalaya jis karan bechare maurya tv ke muzaffarpur ke sunil pandey ke dalal chandraprakash ko cheque lawtana pada or 5000 hazar se santosh karna par jis me 2000 hazar sandeep ne bhi le liya yah hal hai maurya tv ka.riten by s……..