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भास्‍कर में छपी रिपोर्ट को झूठा बताते हुए थानेदार ने की प्रेसवार्ता

: अपने पक्ष में दस्‍तावेजी प्रमाण भी प्रस्‍तुत किए : हिंदी अख़बार दैनिक भास्कर ने हजारीबाग के एक थाने के ऊपर छींटाकशी करते हुए तथा कुछ उदाहरण देते हुए उसे भ्रष्‍टाचार का अड्डा बताया. 11 अक्टूबर को इसी बात को लेकर हजारीबाग थाने में प्रभारी विनोद कुमार तथा निरीक्षक अनिल कुमार पत्रकार सभा बुलाकर प्रेस वालों के सामने दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत करते हुए दैनिक भास्कर के रिपोर्ट को गलत बताया.

: अपने पक्ष में दस्‍तावेजी प्रमाण भी प्रस्‍तुत किए : हिंदी अख़बार दैनिक भास्कर ने हजारीबाग के एक थाने के ऊपर छींटाकशी करते हुए तथा कुछ उदाहरण देते हुए उसे भ्रष्‍टाचार का अड्डा बताया. 11 अक्टूबर को इसी बात को लेकर हजारीबाग थाने में प्रभारी विनोद कुमार तथा निरीक्षक अनिल कुमार पत्रकार सभा बुलाकर प्रेस वालों के सामने दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत करते हुए दैनिक भास्कर के रिपोर्ट को गलत बताया.

यह भी बताया कि ये पत्रकार ब्लैकमेलिंग करते हैं और बात नहीं मानने पर तथ्य से परे रिपोर्ट छापकर जनता को भ्रमित कर रहे हैं. उन्होंने जितने भी रिपोर्ट छापे हैं उनका उसमे अपना हित जुड़ा हुआ है. इसीलिए वे गलत रिपोर्ट छाप रहें हैं. इस प्रेसवार्ता में दैनिक भास्कर का कोई भी पत्रकार शामिल नहीं हुआ क्योंकि सामने पोल खुलने की बारी थी. उसी समय मिथलेश कुमार उर्फ़ मंटी सिंह थाने में पहुंचे और उन्होंने दैनिक भास्कर के उमेश राणा तथा सुबोध मिश्र दोनों को ब्लैकमेलर बताया. मंटी सिंह ने इस बाबत एक वकालतन नोटिस भी अख़बार को भेजा है. मंटी सिंह ने आगे कहा कि यही दोनों पत्रकार हजारीबाग में स्टार नाइट के नाम पर लाखों की ठगी भी की. इस स्टार नाइट में मुंबई से आये कलाकारों की लुटिया डुबो दी. समाजसेवियों ने इन्हें वापस जाने का पैसा दिया. इस बात को दैनिक भास्कर क्यों नहीं छापता? नक्सलियों से इनके संबंधों की चर्चा पूरे पुलिस विभाग के लोग करते हैं, कॉल डिटेल्स में इस बात का खुलासा हो चुका है.

आगे श्री सिंह ने बताया कि उनको भी उन्होंने ब्लैकमेलिंग करने की कोशिश की और पचास हज़ार रुपये भी मांगे और नहीं देने पर उनके विरुद्ध भी दो रपटें छापी. इस बात को लेकर मंटी  सिंह ने हजारीबाग के पुलिस कप्तान को लिखित आवेदन भी दिया है. उमेश राणा और सुबोध मिश्र दोनों नक्सली क्षेत्र से आते हैं इसीलिए इनकी नक्सलियों के साथ अच्छे सम्बन्ध हैं. दोनों ने जमीन माफियाओं कैश और काइंड के रूप में काफी मदद पाई है. इन्होंने ज़रीना विला नामक एक ज़मीन के बारे में पंद्रह रिपोर्ट छपी हैं क्योंकि वहां उन्हें जमीन देने का प्रलोभन मिला है. सेंट्रल जेल में हो रहे भ्रष्‍टाचार इन्हें दिखाई नहीं देते जबकि महीने में ये सेंट्रल जेल की बारह-पंद्रह दलाली वालीं ख़बरें छापते हैं.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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