हिंदुस्तान, आगरा के न्यूज एडिटर मनोज पमार के मुद्दे पर अब हिंदुस्तान प्रबंधन को घेरने के लिए आगरा के पत्रकारों के बीच मुहिम शुरू हो गई है। जिस तरह से हिंदुस्तान प्रबंधन ने हिंदुस्तान की महिला पत्रकार अनुराधा श्रीवास्तव के आरोपों की अनदेखी कर और सतही जांच कर मनोज को क्लीन चिट दे दी उससे सिर्फ हिंदुस्तान के ही नहीं अन्य संस्थानों के पत्रकार भी उद्वेलित हैं।
इस संबंध में एक पांच प्रश्नों का एक पत्र आगरा के पत्रकारों के बीच बांटा जा रहा है। इसमें सीधे तौर पर हिंदुस्तान प्रबंधन की काबिलियत और नीयत पर सवाल उठाए गए हैं। जिस तरह से हिंदुस्तान ने एक वरिष्ठ पत्रकार के माध्यम से मनोज के चहेतों के बयान अपने मनमाफिक लिखवाकर उसे पाक-साफ करार दे दिया उससे भी कई सवाल पैदा हो रहे हैं। अब दो अन्य महिला पत्रकारों की संस्थान में एकदम से ऊपर चढ़ने और फिर सीधे फर्श पर गिरने की कहानी भी सामने आ रही है।
इस पत्र में मनोज पमार की नीयत पर सवाल उठाते हुए पूछा गया है कि आखिर कैसे इन तीनों पत्रकारों की खबरें इतनी प्रमुखता से छपीं और फिर ऐसा क्या हुआ कि या तो यह खुद संस्थान छोड़ गई या इन्हें अलविदा कर दिया गया। यह पत्र गाहे-बगाहे सभी मौकों पर बंट रहा है। एक बार तो खुद हिंदुस्तान के कार्यक्रम में यह पर्चा बांटा गया। इसके अलावा ताज प्रेस क्लब के सदस्यों, अमर उजाला, दैनिक जागरण, डीएलए, कल्पतरू एक्सप्रेस सहित सभी प्रमुख प्रेसों के पत्रकारों को कोरियर या पोस्ट के द्वारा मिल रहा है। इसमें अनुराधा प्रकरण पर हिंदुस्तान की नेकनीयती पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। खुद प्रधान संपादक शशि शेखर की सीधी नजरें होने के बावजूद हिंदुस्तान में हुए इस शोषण पर प्रश्न चिन्ह लग रहे हैं।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.












shrikrishna prasad,munger,bihar
May 7, 2011 at 3:33 pm
It is not unusual in Dainik Hindustan newspaper.In 2001,one young photo journalist of Munger in Bihar,Seema Kumari,committed suicide at her home soon after her removal from service.Why she was removed from Hindustan,it is a matter of police investigation.Humiliation of women journalists in Dainik Hindustan is a common feature.It is also shocking that the newspaper didn’t publish her death report in the newspaper.