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मुश्किलों के बावजूद जीवनभर लोगों को हंसाते रहे अश्‍क

: जन्‍मशती संदर्भ श्रृंखला में याद किए गए उपेंद्रनाथ :  महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय, वर्धा द्वारा ‘बीसवीं सदी का अर्थ : जन्‍मशती का सन्‍दर्भ’ श्रृंखला के त‍हत ‘उपेन्‍द्रनाथ अश्‍क की जन्‍मशती’ पर विश्‍वविद्यालय के इलाहाबाद क्षेत्रीय विस्‍तार केंद्र में ‘अश्‍क साहित्‍य में अभिव्‍यक्‍त समय और समाज’ विषय पर संगोष्‍ठी आयोजित की गई।

: जन्‍मशती संदर्भ श्रृंखला में याद किए गए उपेंद्रनाथ :  महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय, वर्धा द्वारा ‘बीसवीं सदी का अर्थ : जन्‍मशती का सन्‍दर्भ’ श्रृंखला के त‍हत ‘उपेन्‍द्रनाथ अश्‍क की जन्‍मशती’ पर विश्‍वविद्यालय के इलाहाबाद क्षेत्रीय विस्‍तार केंद्र में ‘अश्‍क साहित्‍य में अभिव्‍यक्‍त समय और समाज’ विषय पर संगोष्‍ठी आयोजित की गई।

अध्‍यक्षीय वक्‍तव्‍य में कुलपति विभूति नारायण राय ने कहा कि अश्‍क व फिराक ने छोटे व नए रचनाकारों को मंच दिया। अश्‍क जी का साहित्‍य युवा रचनाकारों के लिए हमेशा से ही प्रेरणादायी रहा है। उनके बाद से यह जगह कुछ खाली है और फिर से वही माहौल बनाने की कवायद होनी चाहिए। उन्‍होंने कहा कि उनकी जन्‍मशती समारोह में हमें उनके काम को आगे बढ़ाने का संकल्‍प लेना होगा।

अश्‍क जी के बारे में उनके मित्र से.रा.यात्री ने अश्‍क को प्रेमचंद स्‍कूल का साहित्‍यकार बताते हुए कहा कि संघर्ष और तकलीफ के दौर में उन्‍होंने अपना रचनाधर्म नहीं छोड़ा और उनकी रचनाएं आज के दौर में भी जीवंत है। वे अभिव्‍यक्ति और शिल्‍प में अनूठे रचनाकार थे। उपनाम अश्‍क से इतर वह जीवन भर सभी को हंसाते रहे। साहित्‍यकार भारत भारद्वाज ने कहा कि लेखकों के लिए समकालीन रहना चुनौती है और अश्‍क जी इस फन के माहिर थे।

अश्‍कजी के जीवन सफ़र पर रोशनी डालते हुए प्रो.एए फातमी ने कहा कि अश्‍क पहले ऐसे लेखक थे जो उर्दू से हिंदी लेखन में आए थे। उन्‍होंने अश्‍क के व्‍यक्तिव्‍य की चर्चा करते हुए कहा कि वह एक आजाद ख्‍यालात के लेखक थे और उनकी यही फितरत कई संघर्षों के बाद उन्‍हें इलाहाबाद ले आयी और यहीं के होकर रह गए। उनकी रचनाएं जीवंत होती थी।

अश्‍क‍ जी के बेटे नीलाभ ने उनकी यादों की पर्तें हटाते हुए कहा कि अब हिंदी पाठकों के लिए फिर से प्रकाशकों और लेखकों को एक-दूसरे के साथ जुड़ना होगा। नया ज्ञानोदय के संपादक रवीन्‍द्र कालिया ने अश्‍क जी के साथ बिताए हुए संघर्ष के पलों को याद करते हुए कहा कि अश्‍क जी लेखक की लड़ाई लड़ने वाले थे। उन्‍होंने कहा कि अश्‍क‍ ने अपनी रचनाओं से साहित्‍य जगत को नई राह दिखाने का काम किया। सुप्रसिद्ध लेखिका ममता कालिया ने कहा कि अश्‍क जी ऐसे लेखक थे जो हर पीढ़ी के साथ जुड़े हुए लगते हैं। जन्‍मशती श्रृंखला समारोह के संयोजक प्रो.संतोष भदौरिया ने मंच का संचालन किया।

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0 Comments

  1. Indian citizen

    April 17, 2011 at 6:22 pm

    अश्क के लेखन पर बहुतों को रश्क होता होगा…

  2. mithilesh mishra Ranikhet uk

    September 23, 2011 at 6:44 am

    Bahut hi sarahniya aur umda jankari.

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