चुनाव के मौसम में मीडिया वालों की चांदी ही चांदी रहती है. सर्वे के नाम पर, प्रचार करने के नाम पर, चुनाव जिताने के नाम पर, ज्यादा कवरेज देने के नाम पर नेताओं से जमकर पैसे लेने के दिन होते हैं ये. इसी कारण जिन राज्यों में चुनाव होने होते हैं वहां चुनाव से ठीक पहले कई अखबार और कई चैनल शुरू हो जाते हैं. ये मौसमी अखबार और चैनल चुनाव में काम भर पैसा कमाकर चुनाव बाद नौ-दो ग्यारह हो जाते हैं.
यूपी में भी जल्द ही विधानसभा चुनाव होने हैं. देश का सबसे बड़ा राज्य. सो, नेताओं की संख्या भी भारी-भरकम है यहां. इस कारण यहां से ज्यादा बिजनेस धंधा आने को देखते हुए कई सारे मीडिया हाउसों ने यूपी सेंट्रिक चैनल शुरू करने की तैयारी प्रारंभ कर दी है. महुआ ग्रुप बहुत पहले से यूपी में चैनल लाने की बात करता रहा है पर अभी तक बात बनी नहीं. अब चर्चा है कि बाबा पीके तिवारी यूपी चुनाव को देखते हुए महीने भर में यूपी चैनल लांच करने वाले हैं. कुछ लोग कह रहे थे कि बाबा बड़े परेशान हैं. इनकम टैक्स के छापे के बाद उनके कई सौ करोड़ रुपये वाले दो एकाउंट सीज कर दिए गए हैं. इन सीज एकाउंट से पैसे के लेन-देन न होने के कारण बाबा के हाथ बंध गए, सो उन पर आर्थिक विपत्ति आन पड़ी. इसी कारण वे खर्चे घटाने की तमाम कवायद में लग गए. स्ट्रिंगरों का पेमेंट रोक दिया गया. प्रज्ञा समेत कई चैनलों में छंटनी का काम शुरू कर दिया गया. महुआ बांग्ला के इंटरटेनमेंट और न्यूज चैनलों का कारोबार कोलकाता से समेटकर नोएडा शिफ्ट कर दिया गया है.
बांग्ला चैनलों के मामले में तो बाबा को बड़ा झटका लगा है. करोड़ों रुपये फूंकने का नतीजा शून्य मिला है. कभी बिपासा बशु को ब्रांड एंबेसडर बनाया था. सौरव गांगुली से कौन बनेगा करोड़पति खिलवाया था. भारी भरकम खर्च लांचिंग के दौरान किया गया. बड़े पैमाने पर स्टाफ की नियुक्तियां की गई. लाखों रुपये पाने वालों को कंपनी में ज्वाइन कराया गया पर बाबा की किस्मत ने पश्चिम बंगाल में रंग नहीं दिखाया. इनकम टैक्स की रेड, एकाउंट्स का फ्रीज होना, करोड़ों रुपये फूंकने के बावजूद बांग्ला चैनलों का न चल पाना… ये सब ऐसे झटके हैं कि जिससे महुआ प्रबंधन को केवल नुकसान ही उठाना पड़ा. गैर-पेशेवहर व्यवहार के लिए कुख्यात महुआ प्रबंधन की उम्मीद अब यूपी के चुनाव पर लगी है. अभी सिर्फ बिहार में महुआ अच्छा काम कर रहा है पर बिहार-झारखंड जोड़कर टीआरपी देखने पर महुआ को निराशा हाथ लगती है क्योंकि इन दोनों प्रदेशों को मिलाकर टीआरपी देखने के मामले में मौर्य टीवी बाजी मार जाता है.
महुआ का झारखंड में कामधाम और टीआरपी जीरो के बराबर है. जानकारों का कहना है कि यूपी चुनाव को देखते हुए महुआ प्रबंधन इसी महीने चैनल शुरू करने को लेकर गंभीर है. अगर अगले दो महीने में यूपी के लिए चैनल शुरू नहीं होता है तो समझिए की बाबा वाकई मुश्किल में है. इनकम टैक्स वालों ने एकाउंट जो फ्रीज किया है, उसके कारण उनके हाथ-पांव बंध गए हैं. चर्चा ये भी है कि अक्टूबर तक महुआ के मालिक पीके तिवारी अपने नोएडा स्थित महुआ चैनल के वरिष्ठों के कामकाज में भी बदलाव कर सकते हैं. भुप्पी और राणा की जो टीम आई है, उसके कामकाज से महुआ प्रबंधन बहुत खुश नहीं है. इन लोगों ने जिस तरह से पुराने लोगों का सूपड़ा साफ किया, चैनल में कोई बड़ा निवेश लाने में असफल रहे, नए प्रोजेक्टस को गति देने में नाकाम रहे…. उस कारण महुआ प्रबंधन खुश नहीं है. बताते हैं कि भुप्पी और राणा के लिए अक्टूबर का महीना क्रिटिकल होगा. अगर ये दोनों अक्टूबर तक बच गए तो यूपी चुनाव तक बने रहेंगे.
महुआ के अलावा भी कई न्यूज चैनल यूपी के लिए शुरू होने जा रहे हैं. कई छोटे और न दिखने वाले चैनलों ने भी यूपी चुनाव को देखते हुए यूपी के नाम पर ढिंढोरा पीटना शुरू कर दिया है और लखनऊ में ब्यूरो की भर्ती का काम शुरू कर दिया है. कई अखबारों ने अपने एडिशन लखनऊ से निकालने की घोषणा कर दी है. तो यूपी का अगला चुनाव इस मामले में भी जोरदार होगा कि मीडिया वाले भारी संख्या में नेताओं के आगे पैसे व पैकेज के लिए लार टपकाते देखे जाएंगे और नेताओं को सबको मनाते-पटाते पसीने छूट जाएंगे.












sushil Gangwar
October 3, 2011 at 2:26 pm
Bhai baat bilkul theek hai . chunav aaya or maal kamaoo . Esa lagta hai hame bhi time pass tv channel khol lena chahiye . Magar paisa kamane ki tameej to seekhne ke liye pachh saal lag jayege fir hum pahle seekhege fir 5 saal bad kamayege .
Sushil Gangwar
http://www.writerindia.com
http://www.sakshatkar.com
http://www.politicianindia.com
anu raj bharti
October 3, 2011 at 4:49 pm
are bhai rupyo k pichhe to duniya bhag rahi hai, phir to ye media wale(malik) hai.
ye jab apne ma-baap k na huye to kisi or k kya honge.
sona singh
November 10, 2011 at 10:49 pm
Media Maliko ko Maa Bahen ki gali dena bade maje ka kaam hai,
par kabhi sochiyega ki kya sirf unki hi iksha hoti hai , unko samjha kar , khwab dikha kar , bebkuf bana kar lane wale ham bhokal wale patrkar bhai hi to hote hai.
varna un bechare baniya logo ( media ka vyapar karne wale baniya ) ko kya pata unka munsi unhe bebkuf bana kar maa bahan ki gali sunwa rahe hai.
Dhanywad
Sona Singh