: समाचार संकलन के दौरान पत्रकार का वाहन जब्त : बिहार में पंचायत चुनाव मतगणना में गड़बड़ी को लेकर प्रत्याशी के समर्थकों ने धरना प्रदर्शन किया था. पूरे दिन पुलिस और समर्थकों में आन्दोलन चलता रहा. पुलिस द्वारा बर्बरता पूर्वक लाठीचार्ज की गई और गोली भी चलाई गयी. इसी मामले पर अपने अखबार के लिये समाचार संकलन करने के लिये वहाँ के स्थानीय पत्रकार भी गए हुए थे.
पुलिस और पब्लिक की भिड़ंत में कई बेगुनाहों, बूढ़े, बच्चे, महिलाओं तक पर बेरहमी से पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किया गया था. जब पुलिस प्रत्याशी के समर्थकों पर भारी पड़ने लगी तो आखिर में धरना पर बैठे समर्थकों को वहाँ से उठ कर भागना पड़ा, लेकिन वहाँ पर जो भी लोग तमाशा दख रहे थे उनको पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और उनके वाहन को जब्त कर लिया. जिसमे वहाँ के स्थानीय पत्रकार का भी वाहन पुलिस ने जब्त कर लिया.
पत्रकार जब थानेदार पास पहुंचे और वाहन के बारे में बताया तो थानेदार बात को टालमटोल करने लगा, जिससे साफ जाहिर हो रहा था कि थानेदार वाहन को छोड़ने के लिये तैयार नहीं था. थानेदार ने कहा कि अब वाहन कोर्ट के आदेश पर ही छूटेगी. एक महीने तक पत्रकार थाने के चक्कर लगाते रहे लेकिन थानेदार नहीं माना. एसपी और डीएसपी के कहने पर भी थानेदार अपनी बात पर अड़ा रहा. अब तक वो गाड़ी छोड़ने को तैयार नहीं है. उसका कहना है कि जो करना हो कर लो गाड़ी तो थाने से नहीं छूटेगी.












श्रीकांत सौरभ
June 27, 2011 at 5:06 pm
लगता है बिहार के पत्रकारों के जिम्मे पुलिस व नेताओँ से लात-घूसे खाना,गालियां सुनना और प्रताड़ित होना ही शेष रह गया है. यह सही है कि सुशासन सरकार में पलिस व अफसर कुछ ज्यादा ही बेलगाम हो गए हो गए है.लेकिन क्या पत्रकार इस बुरे दौर के लिए खुद ही जिम्मेवार नही हैं.आखिर छोटी-छोटी पैरवी के लिए अफसरों की चिरौरी करने व नेताओँ के तलवे चाटने से प्रतिष्ठा मिले भी तो कैसे.निजी स्वाथॅवश आपसी संगठन का न होना व पत्रकारों में बिखराव होना भी इसकी बड़ी वजह है.हालांकि बड़े शहरों व महानगरों के पत्रकार अपने उपर हुए किसी अन्याय के खिलाफ जब संगठित होकर आवाज उठाते हैं,तो उनकी सुन भी ली जाती है.लेिकन ग्रामीण व कस्बाई पत्रकारों की हालत और भी सोचनीय है. और बिहार ही क्यों यूपी,दिल्ली,राजस्थान,म.प्र. समेत तमाम हिन्दी पट्टी इलाके के कस्बाई पत्रकारों की स्थिती कमोवेश ऐसी ही है….Srikant Saurav Mob.:9473361087