रंजन कुमार ने सिलीगुड़ी जागरण को बाय-बाय कर दिया है। उन्होंने अपनी नयी पारी दैनिक भास्कर के साथ धनबाद में शुरू की है। रंजन सिलीगुड़ी में लंबे समय से बतौर फोरमैन काम कर रहे थे। सूत्र बताते हैं कि सिलीगुड़ी से लगातार लोग दैनिक जागरण को छोड़ रहे हैं। अब संपादकीय विभाग में सिर्फ पांच से छह लोग बचे हैं, जहां उनकी संख्या बीस से बाइस हुआ करती थी। लोगों के जाने के कारण, जिन लोगों को साप्ताहिक अवकाश मिलता था, उसे भी बंद कर दिया गया है। काम का दबाव है, सो अलग।
सूत्र बताते हैं कि जो लोग थोड़े काम के जानकार हैं या थे, उन्हें साप्ताहिक अवकाश कभी भी नहीं दिया जाता है और न ही इस अवकाश में काम करने के एवज में कर्मचारियों को अतिरिक्त वेतन दिया जाता है। इतना ही नहीं, उनकी छुट्टियां भी एक माह के बाद समायोजित नहीं की जाती हैं। आज तक अधिकांश लोगों को परिचय पत्र तक मुहैया नहीं कराया गया। संवाद सूत्रों की हालत सबसे खस्ता है। बताया जाता है कि प्रबंधन के संपादकीय विभाग पर हावी होने के कारण वहां के संपादकीय प्रभारी भी कुछ नहीं कर पाते हैं। छुट्टी के मामले में संपादकीय प्रभारी को मौखिक बता दिया जाता है कि उनके सहयोगियों की छुट्टियां समायोजित की जाती हैं, लेकिन हकीकत में ऐसा होता नहीं है।
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.











