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रतन टाटा और अनिल अंबानी के बीच ठन गई

आलोक तोमरनीरा राडिया के अब तक मुहावरा बन गए टेपों से सबसे ज्यादा घबराया हुआ कौन है? यह नाम किसी दलाल या पत्रकार या अधिकारी का नहीं हैं बल्कि देश का एक सबसे बड़ा उद्योगपति रतन टाटा है। रतन टाटा ने तो मीडिया मैनेज करने का खुला इल्जाम अनिल अंबानी पर लगा दिया है। रतन टाटा ने अपने अधिकारियों से उन सभी  टीवी चैनलों, अखबारों तथा पत्रिकाओं के विज्ञापन बंद कर देने के लिए कहा है जो नीरा राडिया प्रसंग में रतन टाटा और नीरा के बीच हुई अंतरंग बातचीतों को सार्वजनिक रूप से और रतन टाटा की राय में बढ़ा चढ़ा कर प्रसारित और प्रकाशित कर रहे हैं।

आलोक तोमरनीरा राडिया के अब तक मुहावरा बन गए टेपों से सबसे ज्यादा घबराया हुआ कौन है? यह नाम किसी दलाल या पत्रकार या अधिकारी का नहीं हैं बल्कि देश का एक सबसे बड़ा उद्योगपति रतन टाटा है। रतन टाटा ने तो मीडिया मैनेज करने का खुला इल्जाम अनिल अंबानी पर लगा दिया है। रतन टाटा ने अपने अधिकारियों से उन सभी  टीवी चैनलों, अखबारों तथा पत्रिकाओं के विज्ञापन बंद कर देने के लिए कहा है जो नीरा राडिया प्रसंग में रतन टाटा और नीरा के बीच हुई अंतरंग बातचीतों को सार्वजनिक रूप से और रतन टाटा की राय में बढ़ा चढ़ा कर प्रसारित और प्रकाशित कर रहे हैं।

इसी आदेश से पता चला कि टाटा समूह की सभी अस्सी कंपनियों के विज्ञापन खातों की देख रेख और नियंत्रण अब नीरा राडिया की वैष्णवी कम्युनिकेशंस और अन्य कंपनियों के पास नहीं रह गया। टाटा के अधिकारी अब फिर से इसे संभालने लगे है। टाटा समूह के कॉरपोरेट कम्युनिकेशन  के मुखिया क्रिस्टाबेल नरोन्हा  ने इस संबंध में पूछने  पर कहा कि ऐसे प्रतिबंध के बारे में कोई नीति या नियम नहीं बनाया गया है। लेकिन कंपनी के हितों की परवाह करना हमारा कर्तव्य है। फिलहाल टाटा समूह ने प्रायोजित खबरों का जो अनुबंध इकॉनामिक टाइम्स, हेडलाइंस टुडे और आउटलुक से किया था उसे तोड़ दिया। आर पी जी समूह की पत्रिका ओपन ने सबसे पहले ये टेप उजागर किए थे और उसको दिए जाने वाले विज्ञापन तत्काल प्रभाव से बंद कर दिए है। कमाल तो यह था कि पत्रिका के जिन अंकों में रतन टाटा और नीरा की अंतरंग वार्ताएं विस्तार से छपी थी उनमें भी दो पन्ने विज्ञापन टाटा समूह के थे।

अब तो हालत यह हो गई है कि रतन टाटा आम तौर पर जो बाते खुद नहीं कहते थे उन्हें भी बोलने लग गए हैं। एक टीवी चैनल को इंटरव्यू में रतन टाटा ने खुलासा किया है कि सीएनएन आईबीएन और आईबीएन सेवेन चलाने वाले समूह में अनिल अंबानी ने 136 करोड़ रुपए का निवेश कर रखा है। इसके अलावा व्यापारिक चैनल सीएनबीसी चलाने वाले सहयोगी संस्था नेटवर्क 18 में भी अनिल अंबानी ने 162 करोड़ रुपए लगाए हैं। रतन टाटा यह कहने से भी नहीं चूके कि आज तक और हेडलाइंस टुडे चैनल चलाने  वाले टीवी टुडे नेटवर्क में  अनिल अंबानी के 101 करोड़ रुपए लगे हुए हैं। टाटा ने यह भी कहा कि आउटलुक रहेजा समूह की पत्रिका है और ओपन मैग्जीन आर पी जी समूह की है और इन दोनो के व्यापारिक हितो में शायद टाटा के अस्तित्व से कोई दिक्कत हो रही होगी। रतन टाटा और नीरा राडिया के बीच रिश्ते उतने व्यापारिक नहीं थे जितने  वे निजी थे। जो टेप सामने  आए हैं उनमें भी यह अंतरंगता जाहिर हो रही है। इतना ही नहीं, इस बात की भी काफी संभावना हैं कि जांच एजेंसियों के पास टेप रिकॉर्डिंग से ज्यादा तस्वीरे या कुछ दस्तावेज या वीडियो टेप भी हो सकते हैं। रतन टाटा की बेचैनी तो कुल मिला कर यही कह रही है।

टाटा उद्योग समूह इस समय काफी बड़े संकटों से गुजर रहा है। एक तो इसके सपनों वाली कार नैनों का बाजार बिगड़ गया है और इसके अलावा गुजरात में नैनों बनती हैं और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी इसी राडिया प्रसंग के कारण रतन टाटा से काफी नाराज चल रहे हैं। हाल ही में रतन टाटा ने प्रवासी भारतीय दिवस के संदर्भ में कहा था कि जहां टाटा जाते हैं वहां व्यापारिक रंगीनी अपने आप आ जाती है। उधर गुजरात के औद्योगिक विकास के बारे में नरेंद्र मोदी का कहना है कि मोदी सपने देखता नहीं, सपने बोता है। जहां शासक इतनी बड़ी बात कह रहा हो वहां चाहे जितना बड़ा सेठ हो, उसकी दुर्गति होनी स्वाभाविक है।

लेखक आलोक तोमर देश के जाने-माने पत्रकार हैं. सीएनईबी न्यूज चैनल के सलाहकार हैं. डेटलाइन इंडिया के संपादक हैं.

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0 Comments

  1. madan kumar tiwary

    January 15, 2011 at 1:04 pm

    आलोक भाई आपकी बात कुछ हद तक हीं सहि है , ये व्यवसायिक घराने हैं अपना हित साधने के लिये एक मिनट में दोस्त बन जाते हैं । इनके बीच मध्यस्था कराने वाले भी बैठे रहते हैं । ये सब मिलकर देश को चुना लगा रहे हैं । आपने आज पढा होगा , अनिल और उसकी कंपनी पर शेयर बाजार के सेकेंडरी मार्केट में निवेश पर सेबी ने रोक लगा दी है परंतु एक रास्ता भी दे दिया है । मुचुअल फ़ंड के माध्यम से निवेश की छुट देकर । अब आप समझ हीं गये होंगे देश की नियामक संस्थायें कैसे इनकी मदद करती हैं । खैर आप जैसे लोगो के कारण पब्लिक को भी कुछ हद तक सच्चाई का पता चल जाता है । आपसे मिलने की ईच्छा है देखता हूं कब दिल्ली जाने का मौका मिलता है ।

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