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दुख-दर्द

रिपोर्टर नरेश कुमार सहगल पर हमले के मामले में कोई कार्यवाही नहीं!

फरीदकोट (पंजाब) के प्रेस रिपोर्टर नरेश कुमार सहगल का कहना है कि दिनांक 26/12/10 को 3:30-4:00 बजे दिन में गर्ल्स होस्टल के निकट, कोटकापुरा, फरीदकोट में उन पर शारीरिक हमला किया गया था. उसमे दो आदमी शामिल थे, जिनमे एक रोमी कपूर पुत्र सरदारी लाल कपूर को वे पहचानते थे. उन्हें इस हमले के बाद सिविल अस्पताल, कोटकापुरा में भर्ती कराया गया. डाक्टरों ने सिटी थाना, कोटकापुरा को इसकी तत्काल जानकारी दी.

फरीदकोट (पंजाब) के प्रेस रिपोर्टर नरेश कुमार सहगल का कहना है कि दिनांक 26/12/10 को 3:30-4:00 बजे दिन में गर्ल्स होस्टल के निकट, कोटकापुरा, फरीदकोट में उन पर शारीरिक हमला किया गया था. उसमे दो आदमी शामिल थे, जिनमे एक रोमी कपूर पुत्र सरदारी लाल कपूर को वे पहचानते थे. उन्हें इस हमले के बाद सिविल अस्पताल, कोटकापुरा में भर्ती कराया गया. डाक्टरों ने सिटी थाना, कोटकापुरा को इसकी तत्काल जानकारी दी.

साथ ही उनका मेडिकल भी हुआ जो क्रम संख्या एमएसटी/ 125/2010 पर अंकित किया गया. डाक्टरों ने इस मामले में शार्प इंजुरी बताया था पर फिर भी पुलिस वालों ने उस में जानबूझ कर कोई कार्यवाही नहीं की थी. नरेश सहगल का यह भी कहना है कि पुनः उसी रात  26/12/2010 को करीब आठ बजे उन पर पुनः सिविल अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में घुस कर हमला हुआ. उस समय तीन लोग थे, जिनके पास हथियार भी थे.  उन लोगों ने नरेश सहगल को अपहृत करने का भी प्रयास किया. जब अस्पताल के कर्मचारी, पेशेंट और दूसरे लोग वाहन इकठ्ठा हो गए तब जा कर ये तीनों लोग भागे. उनमे से एक व्यक्ति सुरिंदर कपूर पुत्र सरदारी लाल कपूर था.

डाक्टरों ने एक बार फिर पत्रकार नरेश सहगल का मेडिकल किया और दूसरा मेडिकल रिपोर्ट एमएसटी संख्या 130/2010 दिनांक 26/12/10 पुलिस स्टेशन कोटकापुरा सिटी प्रेषित किया जिसमे फिर से शार्प इंजुरी दर्ज किया इसके बाद 27/12/10  को करीब 11:00 बजे पुलिस के लोग आये और उनका बयान भी दर्ज किया. उसमे एसएचओ गुरजीत सिंह रूमाना तथा उपनिरीक्षक बचित्तर सिंह शामिल थे. लेकिन इन लोगों ने नरेश सहगल के खून लगे कपडे तथा अन्य तमाम जरूरी सबूतों को इकठ्ठा नहीं किया और वहाँ से चल दिए.

सहगल के अनुसार उस दिन से अब तक पुलिस ने इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं की है. ना तो उनका केस दर्ज हुआ है, ना तो कोई अन्य कार्यवाही ही हुई. नरेश सह्गल का आरोप है कि उनके शहर के गुंडा किस्म के कुछ लोग उनकी ह्त्या कर देना चाहते हैं और पुलिस मूक दर्शक बनी हुई है. अब उन्होंने अपनी समस्या के बारे में भारत की राष्ट्रपति से ले कर सभी उच्च्पदस्थ लोगों को पत्र और ईमेल के माध्यम से अवगत कराया है, और अपने प्राणों की रक्षा की गुहार लगाईं है. साथ ही हमारे जैसी तमाम मानवाधिकार पर कार्य कर रही संस्थाओं को भी अपनी बात बताई है.

मैं समझती हूँ कि यदि उनके द्वारा बताए गए सभी आरोप सत्य हैं तब तो यह वास्तव में बहुत ही गंभीर घटना है और इसमें तत्काल त्वरित कार्यवाही किये जाने की जरूरत है. फिर जिस तरह से नरेश सहगल अपने पक्ष में तमाम पक्के सबूत, डाक्टरी रिपोर्ट आदि प्रस्तुत कर रहे हैं उससे तो उनकी बात सही ही जान पड़ती है. अब देखना यह है कि इस मामले में कब तक न्यायोचित कार्यवाही होती है.

डॉ नूतन ठाकुर
सचिव
आईआरडीएस, लखनऊ

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