अमिताभ का लग गया काम, बाकी नूतन बताएंगी हाल-ए-धाम

: एक कमरे में चार आईपीएस अफसरों की तैनाती : बिना किसी इंट्रो और भूमिका के, केवल एक बात सूचनार्थ बताना चाहूंगा, उनको जिन्हें नहीं पता है कि ये अमिताभ कौन हैं. अमिताभ एक आईपीएस हैं. यूपी कैडर के हैं. पहले उनका नाम अमिताभ ठाकुर हुआ करता था. लेकिन उन्होंने अपने किसी आदर्शवादी जिद के कारण जाति-उप-नाम को निजी और सरकारी तौर पर त्याग दिया.

एसपी मंजिल सैनी की बर्बरता की तस्वीरें : जबरा मारे और रोवे भी न दे

एक कहावत है. भोजपुरी इलाकों में कही जाती है. जबरा मारे और रोवे भी न दे. यही हाल कुछ अभिनव के साथ घटित हो रहा है. एसपी ने उन्हें पीटा. जमकर पिटवाया. जब अभिनव ने पिटाई के खिलाफ शिकायत की तो उन्हें अब फिर से धमकाया जा रहा है और बुरी तरह फंसा देने की धमकियां दी जा रही हैं. माजरा यूपी का ही है. जिला है फिरोजाबाद. पर अभिनव ने लड़ने की ठानी है.

राजदीप सरदेसाई की करतूत जगजाहिर करने वाली तहलका टीम को बधाई

नूतन ठाकुर: आशीष खेतान को सच लिखने और सिद्धार्थ गौतम को सच बोलने के लिए विशेष तौर पर बधाई : तहलका ने सचमुच देश की पत्रकारिता की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाया. एक से बढ़कर एक बड़ी खबरें ब्रेक की. कैमरे के सामने नोटों की गड्डियां लहराते भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण का चेहरा सभी को याद होगा.

अपनी पुलिस से ‘डरे’ यूपी के स्पेशल डीजी बृजलाल हाईकोर्ट में मुंह के बल गिरे

वे बृजलाल उत्तर प्रदेश के सर्वाधिक ताकतवर पुलिस अधिकारी माने जाते हैं. मौजूदा सरकार के नाक-कान के बाल माने जाते हैं. संभावित प्रदेश पुलिस महानिदेशक माने जाते हैं. लेकिन इन्ही बृजलाल को अपने खिलाफ मुक़दमा नहीं दर्ज होने देने तथा संभवत इसके बाद अपनी गिरफ़्तारी रुकवाने के लिए हाईकोर्ट जाना पड़ता है और हाईकोर्ट में उनकी याचिका खारिज हो जाती है.

भटनी के चौदह गांवों के किसानों को भी है मीडिया का इंतज़ार

सिंगूर, नंदीग्राम, दादरी या फिर भट्टा-परसौल… ये सारे नाम कुछ ऐसे गांवों के हैं जहां के निवासियों किसानों की जमीनें सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण कानून के बल पर लेकर बड़े-बड़े उद्योगपतियों या फिर आवासीय  कालोनी बनाने वाले बड़े बिल्डरों को विकास के नाम पर दे दिया गया. ऐसे मामलों में हमारी सरकारों का मानना होता है कि व्यापक लोकहित के लिए ऐसे कदम उठाना अत्यावश्यक है. पर सही मायनों में इस तरह के अधिग्रहणों से लोकहित होता किसका है…

नीरज की हिम्मत और अखबारों की कायरता

नूतन ठाकुरनिजी विद्यालयों द्वारा कभी स्कूल फ़ीस के नाम पर तो कभी सालाना फ़ीस और किताब-कापियों को उनके ही विद्यालय से खरीदने सम्बन्धी आदेश दिए जाने से हर कोई पीड़ित है. स्कूल बच्चों के मां-पिता के लिए मार्च महीना ब्लड प्रेशर बढ़ाने वाला होता है. निजी विद्यालयों की उगाही को हम सभी बर्दाश्त कर रहे हैं. नीरज जैसे चंद लोग जो मनमानी के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत जुटाते हैं तो हम सब उनका साथ देने की बजाय चुप्पी साध लेते हैं.

औरत जवान और खूबसूरत हो तो फिर बात ही क्या…

: मुझे बताया गया था- ”साहित्य और संगीत से लड़कियों को दूर रहना चाहिए क्योंकि इन विषयों के ज्यादातर शिक्षकों का चरित्र अच्छा नहीं होता” : अभी भड़ास पर सोम ठाकुर जी का साक्षात्कार पढ़ा. यह साक्षात्कार महाराज सिंह परिहार द्वारा लिया गया था. इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि कवि-सम्मेलनों में काव्य पाठ करना एक विजुअल आर्ट है, जैसा कि सोम जी ने भी कहा है.

क्या ये वही अमेरिकन हैं जिनसे मैं मिली थी

[caption id="attachment_20320" align="alignleft" width="122"]ओसामा बिन लादेनओसामा बिन लादेन[/caption]अभी कुछ दिनों पहले अमेरिका से लौटी हूँ और वहाँ के लोगों की कई सारी बातों से बहुत अधिक प्रभावित भी हुई हूँ. उन लोगों की कर्तव्यनिष्ठा, कार्य के प्रति लगन, अनुशासन के प्रति लगाव, नियमों का पालन करने की प्रवृत्ति, आम तौर पर दूसरे लोगों के साथ व्यवहार- यह सब देख कर सचमुच बहुत अच्छा लगा था.

हाईकोर्ट ने लोकपाल बिल ड्राफ्टिंग कमिटी मामले में एटार्नी जनरल को तलब किया

अधिवक्ता अशोक पांडे और सामाजिक कार्यकर्त्री डॉ नूतन ठाकुर के लोकपाल बिल के ड्राफ्टिंग कमिटी से सम्बंधित एक रिट याचिका पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के लखनऊ खंडपीठ ने आज भारत के एटार्नी जनरल को आदेशित किया है कि वे कोर्ट में उपस्थित होकर इस सम्बन्ध में स्थिति स्पष्ट करें. साथ ही कोर्ट ने प्रधान मंत्री कार्यालय, कैंबिनेट सेक्रेटरी तथा विधि व न्याय मंत्रालय को भी नोटिस जारी कर अपना जवाब देने को कहा है.

अमेरिका में ज्यादातर लोग अगंभीर सूचनाएं मांगते हैं!

नूतन ठाकुरआज मुझे अमेरिका आये सात दिन हो गए हैं. यहाँ परिवार से दूर हूँ, इस लिहाज से बहुत मन तो नहीं लग रहा है पर यह भी है कि जिस प्रकार का मौका मिला है, उसका पूरा और वाजिब उपयोग जरूर करना चाहती हूँ. अभी तक हमारा समूह कई प्रकार के लोगों और संगठनों से मिल चुका है और इसके जरिये हम लोगों ने कई तरह की नयी बातें सीखी और जानी हैं. हम अमेरिका के बारे में जान रहे हैं और अमेरिका के वे सम्बंधित लोग हम लोगों को जान-समझ रहे हैं.

अमेरिका पहुंचते ही नूतन ठाकुर कई मुश्किलों से घिरीं

जब मैं भारतीय समय के अनुसार एक अप्रैल की रात्रि के करीब दस बजे नयी दिल्ली हवाई अड्डे से अमेरिका के लिए चली थी तो मन में एक साथ कई तरह की भावनाएं घुमड़ रही थीं. मैंने जीवन में कभी नहीं सोचा था कि मैं अकेले अमेरिका जाउंगी. बल्कि सच कहा जाए तो मैं हिंदुस्तान में भी बहुत कम जगहों पर अपने पति अमिताभ जी और बच्चों के बगैर गयी होउंगी.

मेरी अमेरिकी यात्रा और पत्रकारों से मिलने की खुशी

डा. नूतन ठाकुरअपने साथियों के सहयोग से मुझे अमेरिका जाने का सौभाग्य मिल रहा है, वह भी पूरे राजकीय खर्चे पर. मैं इस यात्रा के लिए विशेष रूप से हमलोगों के बहुत पुराने साथी और मेरे भाई की तरह उत्कर्ष सिन्हा जी और पूर्व में इंडियन एक्सप्रेस में पत्रकार रहीं और वर्तमान में विमेन इश्यू पर काम कर रही अलका पाण्डेय जी की शुक्रगुजार हूँ, जिनके कारण मैं इस कार्यक्रम का हिस्सा बन सकी.

चिरनिद्रा में आलोक और सुप्रिया की सिसकियां

मुझे मेरे पति अमिताभ जी ने करीब बारह बजे बताया कि यशवंत जी का फोन आया था, आलोक तोमर जी नहीं रहे. मैं यह सुन कर एकदम से अचंभित रह गयी. मैंने आलोक जी से कभी मुलाकात नहीं की थी पर भड़ास पर उन्हें नियमित पढ़ा करती थी, बल्कि सच तो यह है कि मुझे पूरे भड़ास में सबसे अच्छे लेख उन्ही के लगते थे.

यूपी पुलिस की बहादुरी के कुछ फुटकर सबूत

आज मैंने भड़ास पर एक खबर पढ़ी “आईपीएस अफसर डीके ठाकुर का घिनौना चेहरा“. इसके बाद मुझे कुछ माध्यमों से एक छोटी सी विडियो क्लिपिंग मिली जिसमे इसी घटना के सम्बंधित फुटेज दिया गया है. मैं इस पर अपनी ओर से कोई टिप्पणी नहीं करते हुए पाठकों से ही निवेदन करुँगी कि वे इसे देख कर इस बारे में अपनी स्वयं की राय बनाएं. पुलिस विभाग की जनता में बदनामी के लिए शायद इसी प्रकार की घटनाएं जिम्मेदार होती हैं.

जय हो, अमिताभ ठाकुर जीते

: अंततः मिली पोस्टिंग : ईओडब्लू मेरठ के एसपी बने : अमिताभ ठाकुर मेरे लिए भी एक टेस्ट केस की तरह रहे. इस दौर में जब बौनों का बोलबाला है, क्रिमिनल गवरनेंस का दौर है, पैसे की ताकत व माया है तब कोई अधिकारी निहत्था होकर अपने पर हो रहे अन्याय का मुकाबला करे और जीत जाए, यह तथ्य न सिर्फ चौंकाता है बल्कि कइयों को प्रेरणा भी देता है. अमिताभ ठाकुर को अब तक जिसने भी पढ़ा है, वो मेरी तरह यही मानता होगा कि यह शख्स अपनी कुछ कथित बुराइयों के बावजूद जनपक्षधर और लोकतांत्रिक लोगों के लिए उम्मीद की किरण की तरह है.

रिपोर्टर नरेश कुमार सहगल पर हमले के मामले में कोई कार्यवाही नहीं!

फरीदकोट (पंजाब) के प्रेस रिपोर्टर नरेश कुमार सहगल का कहना है कि दिनांक 26/12/10 को 3:30-4:00 बजे दिन में गर्ल्स होस्टल के निकट, कोटकापुरा, फरीदकोट में उन पर शारीरिक हमला किया गया था. उसमे दो आदमी शामिल थे, जिनमे एक रोमी कपूर पुत्र सरदारी लाल कपूर को वे पहचानते थे. उन्हें इस हमले के बाद सिविल अस्पताल, कोटकापुरा में भर्ती कराया गया. डाक्टरों ने सिटी थाना, कोटकापुरा को इसकी तत्काल जानकारी दी.

मुख्यमंत्री मायावती के झूठ को उनकी सीबीसीआईडी ने पकड़ा!

नूतन ठाकुर: बबलू और आब्दी की गिरफ्तारी के पीछे का सच : वैसे तो जिंदगी में कोई बात शायद बेमतलब नहीं होती पर उत्तर प्रदेश में तो निश्चित तौर पर हर बात के पीछे कोई ना कोई कारण जरूर होता है. और अक्सर जो दिखता है, सच वैसा नहीं होता. अब जीतेन्द्र सिंह बबलू और इन्तेज़ार आब्दी की गिरफ्तारी का मामला ही ले लीजिए.

कैट परीक्षा हिंदी एवं क्षेत्रीय भाषाओं में कराने के लिए याचिका दायर, सुनवाई आज

: अमिताभ ठाकुर एवं डा. नूतन ठाकुर ने उठाया मामला : इलाहाबाद उच्च न्यायालय के लखनऊ खंडपीठ में आईपीएस अधिकारी और आईआईएम लखनऊ के फेलो अमिताभ ठाकुर तथा सामाजिक कार्यकर्त्री डॉ. नूतन ठाकुर द्वारा आईआईएम के लिए ली जाने वाली कैट परीक्षा अंग्रेजी के अलावा हिंदी तथा अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी कराये जाने हेतु एक रिट याचिका दायर की गयी. याची के अधिवक्ता अशोक पाण्डेय हैं. इस केस की सुनवाई शुक्रवार यानी आज होनी है.

पब्लिक को नौकर मानने का पुलिसिया माइंडसेट : डॉ. मंजूर अहमद

: इंटरव्यू : डॉ मंज़ूर अहमद (पुलिस अधिकारी, शिक्षाविद और राजनेता) : वर्ष 73 में जो पुलिस रिवोल्ट हुआ उसमे गलतियां अफसरों की थी : जब मांग नहीं सुनी जाती है तो पुलिस एसोशिएशन के लिए आवाज़ उठती है, जो जायज है : हमारे एक डीजी थे, बहुत ईमानदार, वो रिटायर होने के बाद वो थाने जाने से बहुत डरते थे :

पीएम की पीसी में बड़े संपादकों के छोटे सवाल

नूतन ठाकुरआज मैंने कई सारे बहुत बड़े पत्रकारों / संपादकों को प्रधानमन्त्री के प्रेस कांफ्रेंस के बाद बाहर निकल कर वहां उपस्थित मीडियाकर्मियों के सामने अपनी बात कहते सुना. डॉ प्रणव रॉय, राजदीप सरदेसाई और अर्नब गोस्वामी जैसे वे नाम हैं जो आज भारतीय मीडियाजगत के चोटी के लोगों में माने जाते हैं. इसीलिए जब ये लोग कोई बात कहते हैं तो ना सिर्फ मीडिया जगत के लोग बल्कि बाकी लोग भी बड़े ध्यान से इनकी बात सुनते हैं और उन पर विश्वास करते हैं.

सिपाही बिजेंद्र यादव को यूपी पुलिस ने गिरफ्तार किया और कोर्ट ने रिहा

तो बिजेंद्र यादव गिरफ्तार हो ही गए. कल यह मालूम हुआ था कि इलाहाबाद पुलिस द्वारा बिजेंद्र यादव को कैन्ट थाने में पकड़ लाया गया था, जब वह अपने एक मामले की सुनवाई के लिये इलाहाबाद हाईकोर्ट गए थे. आज सुबह मालूम हुआ कि पुलिस ने आखिरकार सिविल लाइन थाने में उनके खिलाफ मुक़दमा लिख ही दिया और अब उन्हें गिरफ्तार कर उनको कोर्ट के सामने पेश किया गया. उन्हें धारा 353 आईपीसी तथा पुलिस फोर्सेस (इन्साईटमेंट टू ओफ्फेंस) एक्ट की धारा चार के तहत गिरफ्तार किया गया.

ब्रिजेन्द्र यादव बनाम पदम सिंह : यूपी पुलिस के दो चेहरे

मैं दो पुलिसवालों को देखती हूं और उनके बीच तुलना करने लगती हूं. एक हैं कांस्टेबल ब्रिजेन्द्र सिंह यादव जो अभी कुछ दिनों पहले सस्पेंड हुए थे और उससे पहले बर्खास्त. शायद जेल भी जा चुके हैं, कई मुकदमे हैं उन पर. मेरी जानकारी के मुताबिक साधारण आर्थिक हैसियत है उनकी. इसके विपरीत मैं देखती हूं पदम सिंह को. कांस्टेबल थे शायद पर आज डिप्टी एसपी हैं. चूंकि साठ साल पूरे हो गए हैं, इसीलिए सरकारी रूप से रिटायर हो गए हैं पर अभी भी नौकरी बढ़ा कर मुख्यमंत्री की सुरक्षा के इंचार्ज बनाए गए हैं.

आईआरडीएस पुरस्‍कारों के लिए सूचनाएं भेजें

गैर सरकारी संगठन इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च एण्ड डाक्युमेंटेशन इन सोशल साइन्सेंस (आईआरडीएस), लखनऊ द्वारा वर्ष 2011 के लिये पांच क्षेत्रों में युवा हस्ताक्षरों को आईआरडीएस अवार्ड प्रदान किये जायेंगे. ये क्षेत्र हैं- मानव अधिकार, विधि एवं न्याय, पत्रकारिता, प्रबंधन तथा शासकीय सेवा. इन क्षेत्रों में दिये जाने वाले पुरस्कार हैं- सफदर हाशमी पुरस्कार, वीएन शुक्ला पुरस्कार, सुरेन्द्र प्रताप सिंह पुरस्कार, मंजुनाथ शंमुगम पुरस्कार तथा सत्येन्द्र दुबे पुरस्कार. इन पुरस्कारों के साथ किसी प्रकार की धनराशि संबद्ध नहीं होगी. इन पुरस्कारों हेतु अधिकतम आयु 45 साल निर्धारित की गयी है.

‘स्वतंत्र चेतना’ अखबार की गुलाम चेतना

नूतन ठाकुर बेशक एक आईपीएस की पत्नी हैं, लेकिन वे स्वतंत्र व्यक्तित्व व सोच-समझ की स्वामिनी हैं, इसी कारण वे ज्यादा सक्रिय और संघर्षशील दिखाई पड़ती हैं. ऐसे में कई बार लोगों को भ्रम होता है कि उनकी सक्रियता के पीछे उनके आईपीएस पति हैं पर जिन लोगों ने उन्हें नजदीक से नहीं देखा उन्हें नहीं पता होगा कि नूतन ठाकुर बाकी आईपीएस पत्नियों की तरह सोने, गहने, कपड़े-लत्ते, गाड़ी, बंगले, नौकर-चाकरों के सलाम ठोंकने वाली सड़ियल दुनिया में जीने-मरने की बजाय समाज और सिस्टम के सुखों-दुखों के साथ जीना, संघर्ष करना, सुधार की संभावना तलाशना, न्याय और अधिकारों के लिए लड़ते रहना ज्यादा पसंद करती हैं.

अमिताभ ने फेसबुक और आई हेट गांधी ग्रुप के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया

थाना गोमती नगर, लखनऊ में फेसबुक नामक सोशल नेटवोर्किंग साईट पर “आई हेट गाँधी” नाम से चल रहे एक ग्रुप के आपराधिक कृत्य के सम्बन्ध में फेसबुक कंपनी तथा अन्य के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट मु०अ०सं० 72/2011 अंतर्गत धारा 153, 153 A(1)(a),  153 A(1)(b), 153 A(1)(c), 153-B, 290, 504, 505 (1), 505 (2),506 आईपीसी तथा धारा 66 A इन्फोर्मेशन टेक्नोलोजी एक्ट 2000 दर्ज कराई गयी है. यह मुक़दमा आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर द्वारा पंजीकृत कराया गया है.

बुरे फंसते जा रहे हैं करमवीर और बृजलाल

: हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने इनके खिलाफ याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट को सौंपा : इलाहाबाद हाईकोर्ट में पहले से ही है इनके खिलाफ एक याचिका : अब दोनों याचिकाओं की एक साथ शुरू होगी सुनवाई : आईआरडीएस की तरफ से शीलू-दिव्या प्रकरणों में हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में दायर रिट याचिका पर आज याची के वकील अशोक पांडे ने तर्क पेश किये.

बृजलाल! न गलत कहो, न गलत करो

: मीडिया के अधिकारों का हनन करने की चेष्टा सही नहीं : बृजलाल के बयानों और उनकी सोच की मैं निंदा करती हूं : उत्तर प्रदेश के विशेष पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) बृजलाल का एक बयान उनके गले की फांस बनने जा रहा है. जानकारी के मुताबिक एक वेबसाईट पर यह खबर आई है कि पुलिस विभाग, उत्तर प्रदेश में कुछ लोगों द्वारा एक एशोशिएशन बनाया गया है.

तब डीजीपी और एसपी ने कहा था- ये सिपाही विद्रोह करवा देगा, इसको अरेस्ट करवा दिया जाए

[caption id="attachment_18969" align="alignleft" width="85"]ब्रिजेंद्र सिंह यादवब्रिजेंद्र सिंह यादव[/caption]: भ्रष्ट और पैसाखोर आईपीएस अफसरों को सबक सिखाने के लिए लड़ने वाले जांबाज सिपाही ब्रिजेंद्र सिंह यादव से नूतन ठाकुर की बातचीत : अपनी मौज-मस्ती और कल्याण के लिए गरीब व निरीह सिपाहियों से रकम उगाहते हैं आईपीएस अधिकारी : मुलायम सिंह यादव, श्रीराम अरुण, आरपी सिंह समेत कई नेताओं-अफसरों ने ब्रिजेंद्र को धमकाया-ललचाया पर यह शख्स न तो झुका और न डरा : ब्रिजेंद्र सिंह कहते हैं- हमको इन साहब लोगों ने प्यार से रोटी नहीं खाने दी… कोई ना कोई पंगा लगाते रहे… सस्पेंड किया… फिर ट्रांसफर… फिर सस्पेंड… फिर ट्रांसफर… और यह क्रम चलता ही रहा…. अभी हमारी संस्था का जो अध्यक्ष है फतेहपुर का, उसे देर से आने के आरोप में सस्पेंड कर दिया… ये लोग किसी न किसी प्रकार से हम लोगों को शोषण करते रहना चाहते हैं…. :

43 साल के विजय जाधव का यूं चले जाना

आज अचानक एक खबर देखी. नेशनल फिल्म आर्काइव ऑफ इंडिया के निदेशक विजय जाधव की ह्रदय गति रुकने से मृत्यु. 43 वर्षीय जाधव भारतीय सूचना सेवा के अधिकारी थे और नेशनल फिल्म आर्काइव ऑफ इंडिया के साथ-साथ प्रेस इन्फोर्मेशन ब्यूरो, पुणे के भी प्रभारी थे. मूल रूप से इंजिनीयरिंग स्नातक जाधव 1994 बैच के भारतीय सूचना सेवा के अधिकारी थे. दूरदर्शन, आकाशवाणी तथा प्रेस इन्फोर्मेशन ब्यूरो में अपने काम की बदौलत अपने लिए एक अच्छा स्थान बना चुके थे.

बरखा दत्त और वीर संघवी प्रकरण में सीबीआई क्यों नहीं दे रही सवालों के साफ-साफ जवाब?

बरखा दत्त - वीर संघवीराजा प्रकरण ने कई सफेदपोशों की पोल खोल दी है. मनमोहन भी लपेटे में हैं. सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी व सीएजी की रिपोर्ट से स्पष्ट है कि भ्रष्टाचार के बारे में सब कुछ जानकर चुप रहने वाला भी भ्रष्ट है. ईमानदार बनने की कोशिश में रतन टाटा बोल गए कि उनसे घूस मांगी गयी थी लेकिन किसने मांगी थी, ये बताने में वे भी मनमोहन हो गए. इतने बड़े लोग जब भ्रष्टाचार को होते देखकर, खुद इसे झेल-सहकर चुप हैं तो छोटे आदमियों की क्या बिसात.

‘इस दाल में कुछ काला है’

नूतन इन दिनों लखनऊ में एक मामला काफी चर्चा में है. ऊपर से तो मामला छोटा सा ही नज़र आता है- चोरी का, पर अंदरखाने बात कुछ ज्यादा ही गंभीर दिख रही है. ये हम सभी जानते हैं कि पुलिस वाले ज्यादातर चोरी के मुक़दमे लिखते ही नहीं और बड़ी मुश्किल से यदि लिख भी दें, तो उनमें चीज़ों और रुपये की बरामदगी लगभग नहीं के बराबर होती है. ऐसे भी वे लोग चोरी के मामलों को बहुत ही हल्‍की निगाह से देखते हैं. इसमें उन्हें कुछ खास सनसनी फैलने वाली बात नहीं नज़र आती.

हार गए पत्रकार, जीत गई माया सरकार

नूतन ठाकुर: इसलिए लड़ाई जारी रहे : पिछले दिनों उत्तर प्रदेश में पुलिस अफसरों के बड़े भारी संख्या में तबादले हुए. सत्तर के आस-पास. इनमे हर रैंक के अफसर थे- एसपी भी, डीआईजी भी, आईजी और एडीजी तक. इनमे कुछ तबादले खास तौर पर गौर करने लायक थे- एक पूरब में गाजीपुर का, एक उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का और एक उत्तर प्रदेश के पुराने औद्योगिक नगर कानपुर का. इन तीनों को मैं एक अलग नज़र से इसीलिए देख रही हूँ क्योंकि इन तीनों ही जगह पर पिछले एक-डेढ़ महीने के अंदर पत्रकारों से जुड़े बड़े-बड़े कांड हुए थे.

आईपीएस दोयम दर्जे की नौकरी

[caption id="attachment_18497" align="alignleft" width="74"]के. विक्रम रावके. विक्रम राव[/caption]: इसीलिए सेलेक्शन के बावजूद इस नौकरी को करना मैंने उचित नहीं समझा-  के. विक्रम राव : इंटरव्यू : के. विक्रम राव आज पत्रकारिता क्षेत्र में एक स्तम्भ बन गए हैं. ख़ास कर पत्रकारों के हक़ की लड़ाई को लेकर. प्रख्यात पत्रकार और नेशनल हेराल्ड के पूर्व सम्पादक के रामाराव के लड़के विक्रम राव स्वयं भी एक लब्धप्रतिष्ठ पत्रकार रहे हैं. पर अब मूल रूप से स्वतंत्र पत्रकारिता के साथ ही इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किग जर्नलिस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में पूरे देश के पत्रकारों के विभिन्न हितों के लिए संघर्षरत हैं.

पत्रकार रितुराज शुक्ला का दुर्घटना में निधन

बस्ती जिले के लोकप्रिय स्थानीय चैनल “कपिल गंगा” के संस्थापक और मैनेजिंग एडिटर रितुराज शुक्ला नहीं रहे. कल अचानक करीब दो-ढाई बजे उस समय एक भीषण एक्सीडेंट हो गया जब वे अपने बस्ती आवास से कानपुर जा रहे थे. अपनी गाड़ी वे स्वयं चला रहे थे और उन्नाव जिले में अचलगढ़ इलाके में सामने से आते एक ट्रक से उनकी सीधी टक्कर हो गयी. दुर्घटना में उन्हें काफी चोटें आयी. उनकी कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गयी.

म से मुलायम, म से मायावती, क से किताब

”मुलायम और मायावती, दो ऐसे राजनेता हैं जिनके इर्द-गिर्द ही पिछले दो दशकों में उत्तर प्रदेश की राजनीती घूमती रही है. इन दोनों में म अक्षर से थोड़े पुराने किस्म के नाम, ग्रामीण परिवेश के बहुत साधारण घर, राजनीती से पूर्व शिक्षण कार्य जैसी समानता के अलावा यह भी सामान है कि दोनों पिछडों और दलितों की राजनीती से जुड़े रहे हैं, दोनों अपनी-अपनी पार्टी के सुप्रीमो हैं जिनकी पार्टी उनके नाम से चलती है और दोनों सामान्यतया एंटी कांग्रेस माने जाते हैं.” ये बातें एक परिचर्चा में कही गईं.

एक आईपीएस भी है अन्याय का शिकार

: पत्नी लिखेंगी अपने पुलिस अधिकारी पति के संघर्ष की कहानी : पूरी कहानी किताब के रूप में दो महीने में हाजिर होगी : नाम होगा- “अमिताभ ठाकुर स्टडी लीव केस” : बात बहुत छोटी सी थी. और आज भी उतनी बड़ी नहीं. मसला मात्र छुट्टी का था. लेकिन कहते हैं ना कि बात निकले तो बहुत दूर तलक जायेगी. इसी तरह यह बात भी जब शुरू हुई तो बस बढती ही चली गयी. और अब तो इस मामले में छह-छह केस हो चुके हैं.

मां, पत्रकार और अखबार

: जैसे मां के लिए यशवंत लड़ रहे, उसी तरह पत्रकार को पीटने वाले बुखारी को सजा दिलाने और हिंदुस्तान अखबार पर अत्याचार करने वालों के खिलाफ उठ खड़े होने की जरूरत :  खिलाफ खड़े होने इन दिनों भड़ास एक बहुत ही महत्वपूर्ण आन्दोलन को लेकर आगे बढ़ा हुआ है- ”जस्टिस फॉर मां”. मैं और आईआरडीएस तथा नेशनल आरटीआई फोरम संस्थाएं, जिनसे मैं जुडी हुई हूँ, की पूरी टीम इस मामले के यशवंत जी के साथ अपने पूरे दमख़म से है. जिस तरह से यशवंत जी इस मामले को आगे बढ़ाएंगे, हम लोग उसके अनुसार साथ रहेंगे.

यशवंत की मां नहीं, मेरी-तेरी-सबकी मां

नूतन ठाकुर: हम सबकी मां-बेटियों की लड़ाई है यह : साधन संपन्न घरों की महिलाओं को नहीं पकड़ती पुलिस : औरत होना और आर्थिक रूप से कमजोर होना अपराध तो नहीं : संविधान, कोर्ट, कानून सबमें है महिलाओं के सम्मान की रक्षा की व्यवस्था लेकिन पुलिस नहीं मानती और परिजन रह जाते हैं चुप : यशवंत जी ने एक लड़ाई शुरू की है, अपनी माँ को गाजीपुर जिले के नंदगंज थाने में बंधक बनाए जाने, घर से अवैध तरीके से थाने लाए जाने के खिलाफ. यशवंत जी ने घटना के बारे में लगभग सारी बातें बता दी हैं, इसीलिए उस पर कोई टिप्पणी नहीं करुँगी लेकिन जैसा कि मैंने कल भी उनसे कहा था, मैं यह चाहूंगी और मैं यह मानूंगी कि यह लड़ाई अपने अंजाम तक पहुंचे. इसीलिए ही नहीं कि ये हम लोगों के अज़ीज़ यशवंत जी की लड़ाई है बल्कि इसीलिए भी क्योंकि वे एक ऐसे मामले को लेकर आगे बढे हैं जो हमारे पुलिसिया व्यवस्था की एक बहुत बड़ी समस्या है. और इस रूप में यह यशवंत जी की समस्या से आगे बढ़ कर मेरी, आपकी सबकी समस्या बन गयी है. समस्या के मूल में हमारी कानूनी व्यवस्था और उसका व्यवहारिक जीवन में अनुपालन है. नियम कहता है महिला को बिना गिरफ्तार किये थाने नहीं ले जा सकते, महिला से पूछताछ के लिए उसके घर पर ही जाना पड़ेगा, महिला को थाने में भी अलग रखा जाए, सभी अभियुक्तों और गिरफ्तारशुदा लोगों के मानवाधिकारों की पूरी रक्षा हो.

बहादुर बृजलाल के हाथ-पांव क्यों बंध गए?

: शाह बुखारी, पत्रकार और लखनऊ पुलिस : शाह अहमद बुखारी दिल्ली के जामा मस्जिद के इमाम हैं और इस रूप में अपने आप में बहुत प्रभावी व्यक्ति हैं. इस देश के शायद बाकी बहुत सारे ताकतवर लोगों की तरह शाह बुखारी को भी लगता है कि इस देश के नियम और कानून औरों के लिए हैं, साधारण लोगों के लिए हैं, गरीबों और कमजोरों  के लिए हैं.

इन फोटोजर्नलिस्ट साथियों को सेल्यूट करती हूं

नूतन ठाकुर“अरे भाई, आप लोग तैयार हैं? थोडा जल्दी कर देते, हमें कुछ और भी कार्यक्रम कवर करने हैं…” ये शब्द थे एक बड़े हिंदी अखबार राष्ट्रीय सहारा, लखनऊ के एक फोटोग्राफर साथी के. वे हम लोगों का एक छोटा सा पर सांकेतिक रूप से महत्वपूर्ण कार्यक्रम कवर करने आये थे. जगह था लखनऊ का शहीद स्मारक. दिन बारह अक्टूबर. समय लगभग सवा छह बजे शाम. मौका था आरटीआई एक्ट के पांच साल हो जाने के अवसर पर इन वर्षों के दौरान मार दिए गए आरटीआई शाहीद्दों को श्रद्धांजलि का. अँधेरा हो गया था और उस जगह पर मात्र हम लोगों द्वारा जलाई गयी मोमबत्तियां ही कुछ प्रकाश दे रही थीं. हम लोगों की संख्या दस-बारह की रही होगी. नेशनल आरटीआई फोरम की ओर से मैं और अमिताभ जी थे. यूथ इनिशिएटिव के अखिलेश जी थे. हिमांशु, अभिषेक और आलोक थे. विधि के प्रवक्ता देवदत्त शर्मा थे और दूसरे कुछ साथी थे. श्रद्धांजलि और स्मरण का कार्यक्रम हो गया था. हिंदुस्तान टाइम्स अखबार से फोटोग्राफर अशोक दत्त जी फोटो ले कर जा चुके थे.

यूपी में नहीं पूछ सकेंगे भ्रष्टाचारी का नाम

डा. नूतन ठाकुर: शासनादेश के जरिए पारदर्शिता पर प्रहार : अन्य लोगों के साथ-साथ पत्रकारों के लिए भी उत्तर प्रदेश से एक बुरी खबर है. सतर्कता विभाग तथा उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान को जन सूचना अधिनियम 2005 के प्रावधानों के बाहर कर दिया गया है. ऐसा जन सूचना अधिनियम 2005 की धारा 24 की उपधारा 4 के अधीन दी गयी शक्तियों के तहत उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किया गया है. इस बारे में प्रमुख सचिव, सतर्कता, उत्तर प्रदेश ने शासनादेश जारी कर दिया है.

शराबी-कबाबी प्रत्याशी और हरिवंश राय बच्चन

क्या उत्तर प्रदेश में इन दिनों हो रहे पंचायतों के चुनावों में तमाम शराबी-कबाबी प्रत्याशी और अमरकृति “मधुशाला” के रचयिता हरिवंश राय बच्चन में कोई कामन प्लेटफ़ॉर्म भी है?  कल बहराइच (यूपी)  के एक फ्रीलांस जर्नलिस्ट व सोशल एक्टिविस्ट हरिशंकर शाही का जो मेल मिला उससे तो कुछ ऐसा ही जान पड़ता है. उन्होंने अपने मेल में लिखा कि “समाचार पत्र हिंदुस्तान के लखनऊ से प्रकाशित बहराइच संस्करण में डा. हरिबंश राय बच्चन कि रचना मधुशाला की पंक्तियों का बहुत अभद्र प्रयोग हुआ है.”  उनका यह अनुरोध था कि- “कृपया मदद करें साहित्य का मजाक ना बनने दें.”

फोटो जर्नलिस्ट राजेश ने ललित भनोट पर लगाया धोखाधड़ी का आरोप

कॉमनवेल्‍थ: मुकदमा दर्ज करने के लिए थाने में दी तहरीर : उत्‍तर मध्‍य सांस्‍कृतिक केन्‍द्र, इलाहाबाद के निदेशक के खिलाफ भी शिकायत : पहले से ही विवादित रहे कॉमनवेल्‍थ आर्गेनाइजिंग कमेटी पर एक और आरोप लगा है. यह आरोप लगाया है इलाहाबाद के फोटो जर्नलिस्‍ट राजेश कुमार सिंह ने. राजेश ने इलाहाबाद के सिविल लाइंस में दिए गए तहरीर में आरोप लगाया कि उनके साथ धोखाधड़ी की गई है.

जितनी बड़ी पूंजी, उतना बड़ा स्वार्थ : शीतला सिंह

[caption id="attachment_18138" align="alignleft" width="122"]शीतला सिंहशीतला सिंह[/caption]इंटरव्यू : शीतला सिंह (वरिष्ठ पत्रकार और ‘जनमोर्चा’ के संपादक) : ‘जनमोर्चा’ के पहले संपादक हरगोविंदजी कहते थे- जिसमें जन हित हो उसी को पत्रकारिता का अंतिम सत्य मानो : पत्रकार को हर प्रकार के विचारों को समान रूप से देखना चाहिए : लालकृष्ण आडवाणी ने पत्रकारिता में भारी मात्रा में दक्षिणपंथी विचारधारा के लोगों को घुसाया : पूंजीवादी अखबारों ने पब्लिक सेक्टर को बर्बाद करा दिया :

शिवशंकर गोस्वामी की कथित पिटाई के झूठे सच

डा. नूतन ठाकुर: लखनऊ के कई पत्रकार कह रहे कि शिवशंकर पीटे गए, खुद गोस्वामी कह रहे कि नहीं हुई पिटाई : 22  सितम्बर को यहीं भड़ास पर एक जानकारी मिली कि “दैनिक जागरण, लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार शिवशंकर गोस्वामी के बारे में सूचना है कि कल उनकी पिटाई निर्वाचन आयोग के कार्यालय के सामने हो गई.” सूचना यह थी कि उन्हें निर्वाचन आयोग आफिस के सामने तैनात सुरक्षा गार्डों ने पीट दिया. जानकारी यह थी विवाद की वजह आफिस के सामने स्कूटर खड़ा करना था.

नेशनल आरटीआई फोरम के साथ चलें, साथ दें

उद्देश्य : सूचना अधिकार क्षेत्र में कार्य कर रही संस्था है नेशनल आरटीआई फोरम. इसका मुख्य उद्देश्य सूचना का अधिकार के क्षेत्र में कार्य कर रहे समस्त साथियों के लिए साझा  मंच का निर्माण करना है. इस मंच के जरिए वे सभी इस क्षेत्र में हो रही सारी प्रगतियों, समस्यायों, बुनियादी सवालों और मानदंडों के विषय में विस्तार-पूर्वक बहस व विचार-विमर्श कर सकें.

‘हां, डीजीपी तो मेरा पुराना साथी है’

नूतन ठाकुर “ओहो, तो आप अमिताभ की वाईफ हैं. हाँ, परसों मिला था विक्रम भाई के ऑफिस के सामने.” ये वे शब्द हैं जो आम-तौर पर मुझे तब सुनने को मिले जब मैं लखनऊ में किसी पत्रकार से मिली और मेरा परिचय कराया गया. यहाँ अमिताभ हुए मेरे पति अमिताभ ठाकुर, जो उत्तर प्रदेश में एक आईपीएस अधिकारी हैं और विक्रम भाई हुए विक्रम सिंह या कोई भी वह आदमी जो उस समय उत्तर प्रदेश पुलिस में डीजीपी हों.

माया की मार से त्रस्त एक डिप्टी एसपी

: सीबीआई में रहते माया से पूछताछ की थी : साजिश-फ्राड के जरिए प्रताड़ित किए गए : कोर्ट ने सरकार को फटकारा, जुर्माना ठोंका : मैं आप तक एक ऐसे मामले को पहुंचा रही हूं जिससे अंदाजा लगा सकते हैं कि ईमानदार-कर्तव्यनिष्ठ व्यक्ति बगैर गलती किस हद तक प्रताड़ित किया जा सकता है।