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रिश्तों में जहर घोलने वाले बिचौलियों से दुखी हूं

अमर सिंह ने अपने ब्लाग पर अपने मन की हालत को फिर बयान किया है. उनके लिखे को पढ़कर लगता है कि कोई उनके व उनके करीब रहे और अब भूतपूर्व करीब हो चुके लोगों के बीच बचे-खुचे रिश्तों में जहर घोल रहा है, उसी तरह जैसे (अमर के लिखे अनुसार) दो बड़े उद्यमी भाइयों (संभवतः अंबानी बंधु) में विवाद के बीच कुछ खुदरा लोग अपनी दुकानदारी लगाकर बैठ गए थे और भाइयों के एक होते ही इनकी दुकानें बंद हो गईं थीं.

अमर सिंह ने अपने ब्लाग पर अपने मन की हालत को फिर बयान किया है. उनके लिखे को पढ़कर लगता है कि कोई उनके व उनके करीब रहे और अब भूतपूर्व करीब हो चुके लोगों के बीच बचे-खुचे रिश्तों में जहर घोल रहा है, उसी तरह जैसे (अमर के लिखे अनुसार) दो बड़े उद्यमी भाइयों (संभवतः अंबानी बंधु) में विवाद के बीच कुछ खुदरा लोग अपनी दुकानदारी लगाकर बैठ गए थे और भाइयों के एक होते ही इनकी दुकानें बंद हो गईं थीं.

महाराणा प्रताप और शक्ति सिंह का उदाहरण देते हुए अमर सिंह लिखते- ”मतभेद जितना हो वक्त पर शक्ति सिंह अकबर के खिलाफ महाराणा प्रताप के साथ मिल गया था. ऐसे तमाम चेहरे भविष्य की किसी ऐसी घटना से बेनकाब हो कर नंगे हो जाएंगे.” किससे मतभेद की बात कह रहे हैं अमर सिंह, यह आप भी समझते हैं और हम भी. अमर के ब्लाग पर प्रकाशित ताजी पोस्ट पढ़ते हैं. -एडिटर, भड़ास4मीडिया


जहां गहरे संबंध होते हैं, वहां घाव भी बहुत गहरे होते हैं

-अमर सिंह-

खुद्दारी, अहंकार, स्वाभिमान, मान, अपमान सब आपस में भाई-बहन है; कोई छोटा बड़ा नहीं. जहां बहुत ही गहरे सम्बन्ध होते है वहाँ घाव भी बहुत गहरे होते हैं. दो बड़े लोगों के मामूली विवाद का लाभ बहुत छोटे-छोटे खुदरा लोग अपनी दुकानदारी के लिए लगा कर बड़बोले बन जाते है. बड़ों की संवादहीनता उन्हें झूठी सच्ची खबरों का पुल बना देती है़. हाल ही में दो बड़े उद्यमी भाई एकाएक ऐसे एक हुए कि बिचौलिए ध्वस्त हो गए. मेरे जीवन में भी एक ऐसे बड़े आदमी हैं, जिनके सामने मैंने मुह तक नहीं खोला और जिनके अहसास को समझ कर मैंने जो कुछ किया उसके लिए उन्हें मुह खोलने की जरूरत नहीं पड़ी.

घर चलाना हो या दुकान, आपको धोबी, जमादार, रसोइयां, बेबी सिटर, सेक्रेट्री, टाईपिस्ट, मुनीम, दरबान, ड्राइवर की जरूरत पड़ेगी और जब दो बड़े किन्ही कारणों से स्नेहसिक्त बंधनों के बावजूद संवादहीन हो जाते हैं तो बिचौलिए घर के उपरोक्त तन्तुओं को पकड़ कर अफवाहों और गप्पों के बाजार को शुरू कर देतें हैं. कई लोग जो आप दोनों की दोस्ती नहीं चाहते या आपमें से किसी एक को नापसंद करतें हैं, मौके का फायदा उठा कर अपनी बंदूकें आपके कन्धों पर लादने चले आते हैं क्यूंकि आप बड़े हैं और आपकी गप्पें भी बाजार में बिकाऊ हैं. खरीदारों की, जलने वालों की, प्रतिस्पर्धा करने वालों की कहीं कोई कमी नहीं.

भले ही आज मैं अपनों द्वारा अकेला छोड़ दिया गया हूं, लेकिन अपने अपने हैं. वे मुझे मारें-काटें, चलेगा लेकिन कोई और उनकी ओर या हमारे घर की जीनतों की ओर गंदी नजर डालेगा या सोचेगा कि मुझे अपने जाती इन्तकाम की खाद बनाकर इस्तेमाल कर ले तो मैं मुस्तैदी से बताता हूँ कि यह नामुमकिन है. मेरे मिजाज में अक्खड़पन है, लचीलापन नहीं, बेगैरती तो बिल्कुल ही नहीं. अफसोस इस खाई का लाभ बिचौलियों को बेवजह मिल रहा है और वे मजा ले रहे हैं पर उन्हें याद दिलाऊँ, मतभेद जितना हो, वक्त पर शक्ति सिंह अकबर के खिलाफ महाराणा प्रताप के साथ मिल गया था. ऐसे तमाम चेहरे भविष्य की किसी ऐसी घटना से बेनकाब हो कर नंगे हो जाएंगे. फिलहाल कोई मुझसे मिले-जुले बात करे मै दृढता से खामोश और अनुपस्थित हूँ और इससे ज्यादा कुछ भी नहीं.

“बुरा लगता है अपना लान भी जब याद आता है,
कि हम चौखट में एक टूटा किवाड़ा छोड़ आए है.

(अमर सिंह के ब्लाग से साभार)

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0 Comments

  1. .xyz.

    October 27, 2010 at 6:57 pm

    Amar Singh kee baaton ka koi matlab nahi hota ! Na hi koi unhe gambhirata se leta hai . Media ko kuch nahi milta to Laloo yadav aur Amar singh jaise logon ka bayan chaap ya prasaarit kar deta hai ! Ab to Amar singh ko ehsaas ho chala hoga ki Zameenee rajneeti karne ki bajay Hawa-Hawai waali baat karne waala , Kisi ka varadhast hat te hi kitna laachaar ho jaata hai ? Mulayam Singh ne Amar Singh ke upar se apna varadhast hata liya to Amar Singh aaj raaste pe aa gaye , Warna hawa mein udate rahna hi Amar Singh ki fitrat thi . Zameen par aate hi Emotions AUR Filmi Dialog Baazi par utar aaye hain ! Khair ! Public unhe gambhirata se bilkul nahi leti ! Ha ! ye zaroor hai ki TV channels waale manoranjan ki khaatir Amar Singh Ya Laloo yadav jaise logon ki byte laga kar TRP mein kuch izaafa kar le .

  2. m faisal khan

    October 27, 2010 at 7:42 pm

    amar singh jaise neta desh ke daman par dagh hain jinka is dunya se chala jana hi behtar hai ye insaan aik dalaal hai filmi sitaron ko udyogpatiyon ko filmi heroine suply karta hai aur unko blackmail karta hai is jaisa kameena insaan hindustan ki zameen par nahi milega.sala mulayam singh ka ahsaan bhi bhool gaya is insaan ko mulayam singh ne asman par baithaya magar naali ka keeda apni auqat dikha gaya .zaleel aur khudgarz insaan ki baat chale to sabse upar amar singh ka naam hoga , ab ise apni auqat nazar aa gayi hogi mulayam singh se door huva to congress ne bhi ghas nahi dala dhobi ka kutta ghar ka na ghaat ka vo haal huva amar singh ka aur iski saza bhi yahi thi zameen se utha kar asman par baitha diya mulayam ne ise magar sila kiya diya ab apni auqat mai aa gaya hai.m faisal khan ,

  3. Rishi Dixit

    October 27, 2010 at 8:31 pm

    पिछले डेढ़ दशक से देश की राजनीति में श्री अमरसिंह की जो भूमिका रही है, उसके निहितार्थ कोई कुछ भी निकाले, लेकिन यह सच है कि यदि किसी को राजनीति का ककहरा सीखना है तो उसे अमरसिंह की पाठशाला में आना ही पड़ेगा। बिना किसी पृष्ठभूमि के अमरसिंह ने राजनीति में जो मुकाम हासिल किया है वह हर कोई नहीं कर सकता। यह सही है कि श्री अमरसिंह का अभी वक्त और परिस्थितियां बदली हुई हैं इसलिए कोई कुछ भी टिप्पणी कर सकता है, लेकिन मेरी नजर में वे सदी के राजनीतिज्ञ हैं। एक कुशल राजनीतिज्ञ के साथ-साथ अच्छे लेखक और विचारवान व्यक्ति हैं।

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