: शशि शेखर के पीए अमित भी हटाए गए : ज्ञान स्वामी, मधुकर व उमा पहुंचे आज समाज, गुड़गांव : हिंदुस्तान अखबार में एक और पुराने हिंदुस्तानी पर गाज गिर गई है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सौरभ अब हिंदुस्तान ग्रुप के हिस्से नहीं रहे. उन्होंने इस्तीफा दे दिया है. इन दिनों वे नोटिस पर चल रहे हैं. जानकारी के मुताबिक शशि शेखर एंड कंपनी जिस तरह पुराने लोगों को एक एक कर निपटा रही है उससे दिल्ली-एनसीआर के पुराने हिंदुस्तानियों का दिल काम करने में कम लग रहा है. उनकी ज्यादा ऊर्जा यह सोचने में जाया हो रही है कि न जाने अब किसकी बारी है, न जाने अब किस पर गाज गिरेगी.
प्रदीप सौरभ दिल्ली के चर्चित व बेहतरीन पत्रकारों में शुमार किए जाते हैं. हाल में प्रकाशित उनका उपन्यास मुन्नी मोबाइल काफी चर्चित रहा. इलाहाबाद के रहने वाले प्रदीप सौरभ करीब 28 वर्षों से हिंदुस्तान अखबार के साथ थे. इन दिनों वे नेशनल ब्यूरो में कार्यरत थे और पोलिटिकल पार्टीज समेत कई बीटों को कवर कर रहे थे. सूत्रों का कहना है कि नोटिस पीरियड कंप्लीट हो जाने के बाद प्रदीप सौरभ कुछ नए प्रोजेक्ट्स शुरू करने की घोषणा कर सकते हैं.
प्रदीप सौरभ के जाने से ठीक पहले शशि शेखर के निजी सहायक उर्फ पीए अमित शर्मा पर गाज हिंदुस्तान प्रबंधन ने गिराई. अमित की नियुक्ति हिंदुस्तान प्रबंधन की तरफ से की गई थी. लेकिन अमित का सहायक रवैया प्रधान संपादक शशि शेखर को रास नहीं आया. चर्चा है कि अमर उजाला में शशि शेखर के जो निजी सहायक हुआ करते थे, वे हिंदुस्तान जाकर शशि शेखर के साथ काम शुरू कर सकते हैं लेकिन इन चर्चाओं की अभी औपचारिक रूप से पुष्टि नहीं हुई है.
गुड़गांव से खबर है कि आज समाज के साथ कई लोग जुड़ गए हैं. लखनऊ में कई अखबारों में फोटोग्राफी कर चुके ज्ञान स्वामी आज समाज, गुड़गांव आ गए हैं. कुमार मधुकर और उमा सिंह ने भी ज्वाइन कर लिया है. मधुकर अमर उजाला, चंडीगढ़ में थे. कुछ और लोग जल्द ज्वाइन करने वाले हैं. उल्लेखनीय है कि गुड़गांव में आज समाज अपना संस्करण काफी समय से लांच करने की तैयारी में है और इस प्रक्रिया में कई लोग आ और जा चुके हैं. अब संजय त्यागी को जिम्मा दिया गया है. देखना है कि यहां अखबार कब तक लांच हो पाता है.












khetoolal
October 22, 2010 at 6:28 pm
ई तो साला होना ही था….
आगे आगे देखिए होता है क्या, प्रदीप सौरभ हिन्दुस्तान से एक अरसे से जुड़े थे. मस्त मौला और फक्कड़पन उनकी सबसे बड़ी खासियत है. जबकि शशिशेखर को तलुवे चाटने वाले लटक चाहिए. ऐसे लटक उन्हें मिल भी गए हैं. तो सौरभ आखिर कितने दिन चल पाते. पत्ता तो साफ होना ही था और वो हो गया अमर उजाला नोएडा में एक खेप इन्हीं वाकयों के इंतजार में बैठी है कि कब पुराने हिन्दुस्तानी चलता हों और उन्हें दरबारी बनने का सुख नसीब हो. एक बात और प्रदीप सौरभ इलाहाबाद के नहीं बेसिकली कानपुर के रहने वाले हैं. तो मृणाल जी के जमाने के हिन्दुस्तानी भाइयों अपनी गरदन सेफ मत मानों शशि या सुधांशु की तलवार कब चल जाए कुछ कहा नहीं जा सकता. हां, शशि या उनके उनके चेलों जैसे सुधांशु, प्रताप सोमवंशी , अशोक पांडेय, केके उपाध्याय आदि की चरणबंदगी करके प्रसाद पा लिया हो तो बात और है.
sahid
October 22, 2010 at 6:32 pm
pradip ji apke sath bahut bura hua.
kabir
October 22, 2010 at 6:34 pm
jinhe apne dilli ke behtarin patrakaro me shumar kiya hai, unki ek do khabre bhi yadi yaha de dete to pata chalta ki kitne behtarin hai. akhbar me to unki aisi koi behtarin khabar aj tak dekhne ko nahi mili. ho sakta hai bhadas par likhi ho.
mukul tripathi
October 23, 2010 at 12:55 am
swami mubarak ho
banarasi pandit
October 23, 2010 at 2:12 am
pradeep saurabh kitana kaam karte thee yeh unke muuni mobile lo padhane ke baad pata chla sakata hea. jo adamai akhabar mea kaam kar raha hea usko ajjkal kitani firsat hoti hogi ki woh novel likehe. shashi shekhar ke prati apani khuunas kam karo beta yeswant
RAJESH VAJPAYEE JANSANDESH UNNAO
October 23, 2010 at 2:13 am
swami da ki jai ho
lot of congrats
aj samaj may cha jayo dada .up k baad ab ap k a hunar deykhengay gudgaon waley
bahut bahut badhai
jai ho
rajesh vajpayee unnao
anmol
October 23, 2010 at 6:05 pm
Shashishekher ji ne ye bahut acha kaam kiya hai. wo aadmi ko pehchante hain. pradeep saurabh ek bahut bada piyakad aur racketbaaj patrakaar hai. iskalawe unki khabron mei siwaye ulafa ki farji khabrein aur bjp k kuch netaon ki chatukaroota k kuch nahi hota. pradeep saurabh patrakarita se chook chuke hain. unhe ab sanyaas le lena chahiye.
sunita
October 24, 2010 at 4:20 pm
बात प्रदीप सौरभ या किसी ौर को निकालने की नहीं है, बल्कि शशिशेखर हिंदुस्तान को गर्त के जिस मुकाम तक गिराने में लगे हैं, वह हिंदी पत्रकारिता के लिए खतरनाक है। सुधांशु, प्रताप, अशोक पांडेय व केके जैसे लोगों के क्रेडिट में क्या है। सुधांशु एचएमवी (अपने बास के इशारों को समझने वाला कुत्ता), प्रताप सोमवंशी रंगे सियार, अशोक पांडेय भांड़ और केके उपाध्याय पैसा जुगाड़ू हैं। सुधांशु के बनारस में तमाम किस्से है, अशोक के तो हर जगह किस्से हैं, वे अपना कुनबा साथ लेके चलते हैं और केके उपाध्याय सागर से भगाए गए थे। जहां गए जिस अखबार में गए वहां कालिमा के चार चांद टांक दिए। अब सब हिदुस्तान को बरबाद करने में लगे हैं। हिंदुस्तान की साख और प्रतिष्ठा को बम-बम टाइम्सों के स्तर तक गिराए बिना इनको मजा नहीं आएगा क्योकिं शशिशेखर एंड झुंड को सहजता घटिया माहौल में ही महसूस होती है। देखते कब तक राजीव वर्मा शशिशेकर से अपने तलुए चटवाने के आनंद में मस्त रहते हैं। कहीं ऐसा न हो, वे आनंदित होकर एचएमवीएल का बाजा ही बजवा दें।
somveer sharma aaj samaj bhiwani
October 26, 2010 at 12:38 am
aaj samaj join karne wali puri team ko shubkamnay
jagdish yadav
October 26, 2010 at 3:06 am
pradeep saurabh jaise varisth log akhbar ke pillar hote hain.dar hai ki pillaron ko girate girat sansthan na dhwasth ho jaye.