नाराज हिजड़ों ने राजा के लिंग को चाकू से उड़ा दिया!

प्रदीप सौरभ सदाबहार पत्रकार हैं. यायावर पत्रकार हैं. खुले दिल-दिमाग उर्फ बिंदास पत्रकार हैं. बहुमुखी प्रतिभा के धनी पत्रकार हैं. और, अब तो अच्छे-खासे साहित्यकार भी हैं. उनका लिखा उपन्यास ‘मुन्नी मोबाइल’ जबरदस्त चर्चा में रहा. चर्चा ऐसी हुई कि मुन्नी मोबाइल होने के बाद बदनाम भी हो गई, बालीवुड वालों की कृपा से. प्रदीप सौरभ का लिखा एक और उपन्यास कुछ ही घंटों में हम सबके सामने आने वाला है. नया उपन्यास आज लोकार्पित होने वाला है. शाम साढ़े पांच बजे. दिल्ली के साहित्य अकादमी सभागार, मंडी हाउस में. इस नए उपन्यास का नाम है तीसरी ताली. यह हिजड़ों पर केंद्रित है. हिंजड़ों पर हिंदी में लिखा गया संभवतः यह पहला उपन्यास है. इसे कोई अगर पढ़ना शुरू करे तो एक सांस में पढ़ जाएगा. हिजड़ों के दुख-सुख को पूरी ईमानदारी से बयान किया गया है. उन दुर्भाग्यशाली क्षणों को भी लाइव किया है प्रदीप सौरभ ने जिसमें एक अच्छे-खासे पुरुष के लिंग को काटकर उसे हिजड़ा बना दिया जाता है. लोकार्पण के कुछ घंटे पहले इस उपन्यास के एक छोटे हिस्से को भड़ास4मीडिया के पाठकों के सम्मुख रखा जा रहा है. -एडिटर, भड़ास4मीडिया

वरिष्ठ हिंदुस्तानी प्रदीप सौरभ पर गिरी गाज

: शशि शेखर के पीए अमित भी हटाए गए : ज्ञान स्वामी, मधुकर व उमा पहुंचे आज समाज, गुड़गांव : हिंदुस्तान अखबार में एक और पुराने हिंदुस्तानी पर गाज गिर गई है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सौरभ अब हिंदुस्तान ग्रुप के हिस्से नहीं रहे. उन्होंने इस्तीफा दे दिया है. इन दिनों वे नोटिस पर चल रहे हैं. जानकारी के मुताबिक शशि शेखर एंड कंपनी जिस तरह पुराने लोगों को एक एक कर निपटा रही है उससे दिल्ली-एनसीआर के पुराने हिंदुस्तानियों का दिल काम करने में कम लग रहा है. उनकी ज्यादा ऊर्जा यह सोचने में जाया हो रही है कि न जाने अब किसकी बारी है, न जाने अब किस पर गाज गिरेगी. 

‘देश का मीडिया बाजार की रखैल बन गया’

प्रदीप सौरभ‘मुन्नी मोबाइल’ में पत्रकारिता का भी कच्चा चिट्ठा है : बहुत दिनों बाद हिन्दी वालों के पास एक अलग टेस्ट का हिन्दी उपन्यास आ रहा है। नाम है ‘मुन्नी मोबाइल’। लेखक हैं वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सौरभ। इस उपन्यास में लंदन-शिकागो से लेकर बिहार-यूपी, दिल्ली-एनसीआर, पत्रकारिता-राजनीति, समाज-दंगा, नक्सलवाद-आंदोलन, कालगर्ल-कालसेंटर सब कुछ है। जिन लोगों ने इस उपन्यास के कच्चे रूप (प्रिंट होने से पहले) को पढ़ा है, उनका मानना है कि इस उपन्यास में ‘हिंदी बेस्ट सेलर’ बनने की संभावना है। उपन्यास तो इस महीने के आखिर में छपकर बाजार में आएगा लेकिन भड़ास4मीडिया उपन्यास के प्रकाशक वाणी प्रकाशन के सौजन्य से एक हिस्सा, खासकर वो हिस्सा जो पत्रकारिता से संबंधित है, यहां प्रकाशित कर रहा है। उपन्यास के इस हिस्से में गुजरात दंगों के दौरान मीडिया के रोल और मीडिया की आंतरिक बुनावट पर काफी कुछ कहा-लिखा गया है। तो आइए, ‘मुन्नी मोबाइल’ के एक अंश को पढ़ें-