: हल्की धाराएं लगाकर पुलिस ने की कोरमपूर्ति : छत्तीसगढ़ में प्रेस और मीडिया के लोगों पर हमले जारी हैं. पुलिस और प्रशासन सिर्फ मुंह पर चुपड़ी बातें करती है और जब कार्रवाई की बात आती है तो अपने हित देखने लगाती है. 12 मार्च की रात रायगढ़ के शान्ति लॉज के सामने अपने फर्म में बैठे रायगढ़ प्रेस क्लब के अध्यक्ष वासुदेव मोदी पर रायगढ़ के ही माफिया संरक्षित गुंडों ने हमला कर दिया था. यह हमला श्री मोदी के भाई पुरुषोत्तम मोदी को बाइक से टक्कर मारने के मामूली विवाद से शुरू हुआ था.
मामला वहां ख़त्म हो गया था, पर बाद लगभग एक दर्जन लोग आये और प्रेस क्लब अध्यक्ष सहित वहां बैठे अन्य लोगों पर हमला बोल दिया. फ़ोन किये जाने के बाद रायगढ़ एसपी राहुल शर्मा मोदी जी के पास पहुँच गए पर आरोपियों की हिम्मत दिखाते हुए खुद ही वासुदेव मोदी के खिलाफ रिपोर्ट लिखवाने पहुंच गए. सामान्य मामले में पुलिस रिपोर्ट लिखने में ही कई घंटे लगा देती है, आनाकानी करती है, पर चूंकि ये मामला गुंडा-माफिया संरक्षित था, लिहाजा एफआईआर लिखने की पूरी तैयारी कर ली गई थी.
बाद में जब एसपी को सूचना मिली तो उनके निर्देश पर आरोपियों को थाने में ही बैठा लिया गया था. पर जब कार्रवाई की बात आई तो पुलिस ने गंड़ों-माफियों से अपनी दोस्ती का ख्याल रखते हुए बलवा और मारपीट जैसी हल्की धाराओं में मामला निपटा दिया. प्रेस के लोगों के चिल्ल-पों का कोई असर पुलिस पर नहीं पड़ा. सभी आरोपी दूसरे दिन अपना कॉलर उठाकर पूरे शहर को घूमकर दिखाने लगे.
छत्तीसगढ़ पुलिस सिर्फ बातें करती है, कार्रवाई नहीं करती, इसका सबूत है बिलासपुर के पत्रकार सुशील पाठक की हत्या. असली हत्यारे अब तक खुला घूम रहे हैं. छूरा के पत्रकार उमेश राजपूत की हत्या. असली हत्यारों तक अभी तक नहीं पहुंच पाई है पुलिस. रायगढ़ में दो पत्रकारों पर भ्रष्ट अधिकारियों द्वारा मामले दर्ज करा दिए गए. धर्मजयगढ़ में भास्कर के इशारे पर घटना कवर करने गए पत्रकारों पर मुकदमा दर्ज कर दिया गया. राज्य में सरकार और प्रशासन उन्हीं लोगों को सहयोग कर रही है, जिसमें उन्हें आर्थिक लाभ है. पत्रकारों को तो पूरी तरह निशाना बनाया जा रहा है.
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.











