भ्रष्टाचार के विरुद्ध अन्ना हजारे का अनशन रंग लाया और सरकार झुक गई। एक व्यवस्थित ढंग से चलाए गए अभियान के सामने सरकार को घुटने टेकने पड़े। लेकिन हर आंदोलन सफलता के अंजाम तक नहीं पहुंचा करता। कई बार व्यवस्था इतनी ढीठ होती है कि अनशन पर बैठे व्यक्ति के प्राण हर कर ही बाज आती है। दिल्ली में रोहिणी के सेक्टर 15 स्थित सेंट एंजेल्स स्कूल के बाहर भी एक ऐसा ही अनशन चल रहा है।
गत 7 अप्रैल से स्कूल की संस्कृत शिक्षिका श्रीमति आशा रानी पाठ्यक्रम से संस्कृत हटाने के विरोध में अनशन पर बैठी हैं। दरअसल स्कूल ने कक्षा पांच से कक्षा नौ तक संस्कृत का सूपड़ा साफ करके जर्मन और फ्रेंच भाषा को लगाने का फैसला किया है। इस फैसले से न केवल संस्कृत टीचर नाराज हैं बल्कि स्कूल के स्टूडेंट्स और पैरेंट्स भी परेशान हैं। आशा रानी की मांग है कि कम से कम बच्चों को विषय चुनने का मौका तो दिया जाना चाहिए। लेकिन स्कूल प्रबंधन एक सुनने को तैयार नहीं है। पिछले चार दिन से आशा रानी आमरण अनशन पर बैठी हैं।
जड़ में भ्रष्टाचार : दरअसल स्कूल की इस मनमानी की जड़ में भी भ्रष्टाचार ही है। स्कूल प्रबंधन अपने स्टाफ को कम सैलरी देकर कागजों में ज्यादा पर दस्तखत करवाता है। इस भ्रष्ट चलन का आशा रानी कई बार विरोध कर चुकी थीं। यहां तक कि स्कूल प्रबंधन की उनके साथ खासी तनातनी भी हो चुकी थी। अब स्कूल प्रबंधन आशा रानी से निजात पाना चाहता है। इसके लिए प्रबंधन ने फैसला किया कि स्कूल से संस्कृत विषय ही हटा दिया जाए। न रहेगी संस्कृत और न रहेगी उसको पढ़ाने वाली आशा रानी। लेकिन भारतीय संस्कृति की पहचान संस्कृत भाषा को हटाने का निर्णय न तो बच्चों को रास आ रहा है और न अभिभावकों को। इसलिए इसके विरोध में आशा रानी स्कूल के गेट पर अनशन पर बैठ गई हैं।

कोई सुनवाई नहीं : आशा रानी के इस अभियान से स्कूल प्रबंधन पर कोई खास असर पड़ता नहीं दिख रहा है। दरअसल मीडिया ने भी इस मामले अभी उस तरह नहीं दिखाया है, बल्कि ये कहें कि मीडिया में अभी ये मामला आया ही नहीं है। आशा रानी ने बस अपने दम पर बिना किसी सोची-समझी रणनीति के अभियान छेड़ दिया है। लेकिन रोहिणी सेक्टर 15 के निवासियों के बीच आशा रानी की ये मांग और विरोध प्रदर्शन लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। वैसे इससे ज्यादा दुर्भाग्य की बात कोई क्या होगी कि अपनी सांस्कृतिक धरोहर और देव वाणी संस्कृत को जर्मन और फ्रेंच की भेंट चढ़ाया जा रहा है। उम्मीद है कि आशा रानी का ये अनशन जरूर रंग लाएगा।
सचिन राठौड़ की रिपोर्ट.












भारतीय नागरिक
April 10, 2011 at 6:47 pm
उर्दू की होती तो अब तक बहुत कुछ हो गया होता, संस्कृत तो मृतप्राय है..
bhootkaal
April 11, 2011 at 6:43 am
Jis desh me Sanskrit ko khatma karwane ke liye jimmedar angrejo ke piththu Raja Ram Mohan Roy ko ‘Samaj Sudharak’ kah kar samman diya jata ho, waha ye ghatana swabhavik he. Media houses ke prabhandhan ko market ki bhasha samajh me aati he, or patrakaaron ke liye bhi ye mudde gise pite ho chuke hain. isliye in shikshika ko chahiye kahi doosari job dekh le.
Bhu Tyagi Bhartiya
April 11, 2011 at 1:56 pm
संस्कृत भाषा को भारत से मिटाकर अंग्रेज बहुत खुश है लेकिन भारतीयों को बहुत ही पश्च्याताप करना पडेगा क्योकि भविष्य के विज्ञान की भाषा संस्कृत ही है। विश्व के सभी वैज्ञानिक संस्कृत सीखने को लालायित है। 8000 से अधिक वैज्ञानिक संस्कृत सीख रहे है। और हम आक्रांताओं की भाषा में मस्त है। – भू त्यागी भारतीय, 09999466822
Bhu Tyagi Bhartiya
April 11, 2011 at 2:04 pm
संस्कृत भाषा को भारत से मिटाकर अंग्रेज बहुत खुश है लेकिन भारतीयों को बहुत ही पश्च्याताप करना पडेगा क्योकि भविष्य के विज्ञान की भाषा संस्कृत ही है। विश्व के सभी वैज्ञानिक संस्कृत सीखने को लालायित है। 8000 से अधिक वैज्ञानिक संस्कृत सीख रहे है। और हम आक्रांताओं की भाषा में मस्त है। – भू त्यागी भारतीय, 09999466822
VK SHARMA
April 12, 2011 at 4:18 am
CORRUPTION ——– JUST HAVE A LOOK ABOUT THIS NEWS/ COMMENTS OF KAPIL SIBBAL WHICH WAS ONLY SHOOT BY ME AT PASCHIM VIHAR AND THEN DISTRIBUTED AMONG ALL THE NEWS CHANNELS….. HERE IS LINK http://www.youtube.com/watch?v=2D87rhyKNxA VK SHARMA (JOURNALIST) 9891196126
Anal Kumar (अनल कुमार)
July 8, 2011 at 9:58 am
संस्कृत भाषा को हटाने की साजिश
अनल कुमार Anal Kumar TGT Sanskrit, Kendriya Vidyalaya No.1, Patiala
देश से संस्कृत को योजनाबद्ध तरीके से खत्म करने की साजिश रची जा रही है जिससे देश की संस्कृति खतरे में पड़ गयी है । यदि यह साजिश सफल हो जाती है तो इसका अभिप्राय होगा कि एक दिन देश पर विदेशी संस्कृति का आधिपत्य स्थापित हो जाएगा।
हाल में केन्द्रीय विद्यालय संगठन की ओर से संस्कृत विरोधी निर्णय लिया गया है जिससे संस्कृत का भविष्य सिमटता जा रहा है। अब केन्द्रीय विद्यालय की ओर से नया फैसला किया गया है जिसके अन्तर्गत संस्कृत एवं जर्मन भाषा में विकल्प कर दिया गया है अर्थात् छ्ठी से आठवीं तक छात्रों को यह छूट दी गई है कि वे संस्कृत एवं जर्मन में किसी एक भाषा को चुन लें। इतना ही नहीं यदि पंजाब में छात्र पंजाबी भी ले सकता जिसके परिणाम स्वरूप केन्द्रीय विद्यालय क्रमांक 1, पटियाला में संस्कृत पढ़ने वाले छात्रों की गिनती लगभग आधी रह गयी है |
जिस पंजाब में कभी दशमेश पिता गुरु गोबिन्द सिंह जी ने पाँच सिखों को काशी में संस्कृत पढ़ने भेजा था। पंजाबी विश्वविद्यालय के डा. इन्द्रमोहन का कहना है – “पंजाबी भाषा का विकास करना है तो पहले संस्कृत का प्रचार किया जाए क्योंकि गुरु नानक देव जी की वाणी मूलरूप से संस्कृत में है”। जर्मन के बीस विद्यालयों में संस्कृत पढ़ाई जाती है । कम्प्यूटर विज्ञानियों ने तो निष्कर्ष निकाल लिया है कि कम्प्यूटर के लिए सर्वाधिक उपयोगी भाषा संस्कृत ही है ।संस्कृत को देश की प्रशासनिक भाषा बनाने हेतु भारतीय संविधान के निर्माता भीमराव अम्बेदकर ने प्रस्ताव रखा था जिसके विषय में प्रश्न किएजाने पर पी. टी. आई. संवाददाता से कहा- What is wrong with Sanskrit ( संस्कृत में क्या दोष है ?) सर्वोच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा है कि बिना संस्कृत के बिना भारतीय संस्कृति को समझा नहीं जा सकता इसलिए संस्कृत की रक्षा के लिए पग उठाए जाने की माँग है । भारत को विश्व में अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए संस्कृत भाषा के साथ किए जा रहे खिलवाड़ को बंद करना पड़ेगा अन्यथा भारत की प्राचीन सभ्यता, संस्कृति एवं वेदों का ज्ञान प्राप्त करने के लिए कोई नहीं मिलेगा | इसलिए जरुरी है कि देश के हित में उक्त फैसले पर एक बार पुनः नज़र दौड़ाई जाए ।
Anal Kumar (अनल कुमार)
July 8, 2011 at 10:49 am
संस्कृत भाषा को हटाने की साजिश
अनल कुमार Anal Kumar TGT Sanskrit , Kendriya Vidyalaya No.1, Patiala
देश से संस्कृत को योजनाबद्ध तरीके से खत्म करने की साजिश रची जा रही है जिससे देश की संस्कृति खतरे में पड़ गयी है । यदि यह साजिश सफल हो जाती है तो इसका अभिप्राय होगा कि एक दिन देश पर विदेशी संस्कृति का आधिपत्य स्थापित हो जाएगा।
हाल में केन्द्रीय विद्यालय संगठन की ओर से संस्कृत विरोधी निर्णय लिया गया है जिससे संस्कृत का भविष्य सिमटता जा रहा है। अब केन्द्रीय विद्यालय की ओर से नया फैसला किया गया है जिसके अन्तर्गत संस्कृत एवं जर्मन भाषा में विकल्प कर दिया गया है अर्थात् छ्ठी से आठवीं तक छात्रों को यह छूट दी गई है कि वे संस्कृत एवं जर्मन में किसी एक भाषा को चुन लें। इतना ही नहीं यदि पंजाब में छात्र पंजाबी भी ले सकता जिसके परिणाम स्वरूप केन्द्रीय विद्यालय क्रमांक 1, पटियाला में संस्कृत पढ़ने वाले छात्रों की गिनती लगभग आधी रह गयी है |
जिस पंजाब में कभी दशमेश पिता गुरु गोबिन्द सिंह जी ने पाँच सिखों को काशी में संस्कृत पढ़ने भेजा था। पंजाबी विश्वविद्यालय के डा. इन्द्रमोहन का कहना है – “पंजाबी भाषा का विकास करना है तो पहले संस्कृत का प्रचार किया जाए क्योंकि गुरु नानक देव जी की वाणी मूलरूप से संस्कृत में है”। जर्मन के बीस विद्यालयों में संस्कृत पढ़ाई जाती है । कम्प्यूटर विज्ञानियों ने तो निष्कर्ष निकाल लिया है कि कम्प्यूटर के लिए सर्वाधिक उपयोगी भाषा संस्कृत ही है ।संस्कृत को देश की प्रशासनिक भाषा बनाने हेतु भारतीय संविधान के निर्माता भीमराव अम्बेदकर ने प्रस्ताव रखा था जिसके विषय में प्रश्न किएजाने पर पी. टी. आई. संवाददाता से कहा- What is wrong with Sanskrit ( संस्कृत में क्या दोष है ?) सर्वोच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा है कि बिना संस्कृत के बिना भारतीय संस्कृति को समझा नहीं जा सकता इसलिए संस्कृत की रक्षा के लिए पग उठाए जाने की माँग है । भारत को विश्व में अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए संस्कृत भाषा के साथ किए जा रहे खिलवाड़ को बंद करना पड़ेगा अन्यथा भारत की प्राचीन सभ्यता, संस्कृति एवं वेदों का ज्ञान प्राप्त करने के लिए कोई नहीं मिलेगा | इसलिए जरुरी है कि देश के हित में उक्त फैसले पर एक बार पुनः नज़र दौड़ाई जाए ।