मध्यप्रदेश का जनसम्पर्क विभाग इन दिनों लूट का सबसे बड़ा केन्द्र बना हुआ है। रिश्वतखोरी और लेनदेन के बगैर यहां कोई काम नहीं हो सकता। यदि आपको भी इस लूट में शामिल होना है तो तुरंत समाज की एक पत्रिका निकाल लीजिए। इन्दौर के एक पत्रकार, जो संवादनगर घोटाले का आरोपी भी हैं, ने एक समाज की पत्रिका निकाल कर जनसम्पर्क विभाग से हजारों रुपए के विज्ञापन प्रतिमाह कमाने का जुगाड़ कर रखा है।
समाज की पत्रिका के नाम पर हर माह विज्ञापन आ जाता है और इसमें से कमीशन की राशि विभाग के पास चली जाती है। पत्रिका की सौ पचास कॉपी छपती है और बाकी पैसा जेब में रखकर ये पत्रकार ऐश करता है। वास्तविकता यह है कि जिस समाज की यह व्यक्तिगत पत्रिका निकल रही है, उस समाज की प्रतिनिधि पत्रिका को भोपाल से एक धेला भी नहीं मिलता। बेचारे किसी तरह सदस्यों के चंदे से काम चला रहे हैं। अब अपनी आपबीती भी किसको बताएं। औदूम्बर उद्घोष नामक इस मासिक पत्रिका को विज्ञापन किस नियम के तहत जनसम्पर्क विभाग दे रहा है यह भी पता किया जाना चाहिए।
मध्यप्रदेश सरकार का जनसम्पर्क विभाग दुकानदारों की दुकानें चलाने के लिए सब करता है, लेकिन जो ईमानदार हैं और रिश्वत नहीं दे सकते उनके लिए यहां कोई जगह नहीं है। कायदे से तो विभिन्न समाज की पत्रिकाओं को विज्ञापन देने के लिए नियम होने चाहिए और पारदर्शिता रखते हुए उन नियमों का प्रकाशन कर जो पत्रिकाएं उसमें शामिल होने लायक हैं उन्हें विज्ञापन मिलना चाहिए, लेकिन ऐसा करने में बेइमानों की जेब कैसे भरे? यही कारण है कि सारा मामला बगैर नियमों के चल रहा है। गणित सीधा सा है एक पत्रिका निकालिए भोपाल के जनसम्पर्क विभाग में जुगाड़ बिठाइए, कमीशन दीजिए और कमाइए हजारों रुपए प्रतिमाह।
इंदौर से अर्जुन राठौर की रिपोर्ट.












ajay
August 26, 2011 at 7:27 pm
lagta hai… arjun ji k haat kuch nahi lag rah ahia…
bare bhai…aise har state me ho raha hai,,
u.s,awasthy
September 19, 2011 at 4:37 pm
सही नजरिया है आपका मध्यप्रदेश सरकार का जनसम्पर्क विभाग के विषय में संपूर्ण ब्राह्मण मंच हर साल परिचय सम्मेलन और ‘उपनयन संस्कार का आयोजन जबलपुर शहर में करता आ रहा है 12वां सम्मेलन पर एक नेताजी के कहने पर समाज ने प्रकाशित पत्रिका पर विज्ञापन लगा दिया पर भुगतान नहीं किया