: खबर बनाने से नाराज खनन माफियाओं का कारनामा : उत्तराखंड के रामनगर में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला हुआ है। इलेक्ट्रानिक मीडिया के पत्रकार को खनन माफियाओं ने समाचार संकलन करने से रोक दिया। रोकने की वजह पूछने से गुस्साए माफियाओं ने बेखौफ होकर सड़क पर ही उनसे गाली-गलौच कर जान से मारने की धमकी तक दे डाली।
घटना से गुस्साए पत्रकारों ने कोतवाली में माफियाओं की हरकत के खिलाफ कोतवाल के समक्ष गुस्से का इजहार किया। घटना की देर रात माफियाओं के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पत्रकारों का गुस्सा शांत हुआ।
जानकारी के अनुसार साधना न्यूज चैनल के पत्रकार खुशाल रावत लंबे समय से चैनल में अवैध खनन के खिलाफ खबरें चला रहे हैं। खबरें चलने के बाद माफिया खुशाल से व्यक्तिगत दुश्मनी रखते है। 30 अक्टूबर को सुबह 11 बजे वन विभाग द्वारा अवैध खनन के वाहन पकड़े जाने की सूचना इस पत्रकार को मिली। जिसके बाद पत्रकार खबर बनाने के मकसद से घटनास्थल पर पहुंच गया। जहां पर खनन माफियाओं ने वन विभाग के डीएफओ को वाहन पकड़ने पर घेरा हुआ था।
खुशाल को देखते ही माफियाओं को पारा चढ़ गया। जैसे ही खुशाल ने खबर बनाने के लिए कैमरा निकाला। माफिया खुशाल से भिड़ गए। उन्होंने पत्रकार से कैमरा बंद न करने पर जान से मारने की धमकी तक दे डाली। यह सब नजारा राह चलती सड़क पर हुआ मगर किसी ने भी बीच बचाव करने की हिम्मत नहीं की। इन लोगों ने करीब एक घंटे तक पत्रकार को घेरे रखा। माफियाओं के चंगुल से छूटने के बाद खुशाल ने घटना की सूचना स्थानीय पत्रकारों को दी।
जिसके बाद सारे पत्रकार कोतवाली आ धमके। पत्रकारों के कोतवाली में होने की सूचना पर माफिया भी वहां आ धमके। उन्होंने पुलिस के समक्ष ही पत्रकारों से निपटने की धमकी दे डाली। मगर पुलिस मूकदर्शक बन यह सब देखती रही। इन लोगों ने खुशाल रावत के खिलाफ भी 15 लोगों से रंगदारी मांगने की तहरीर दी। पत्रकारों ने कोतवाल आरके फर्स्वाण के समक्ष माफियाओं की चोरी व फिर सीनाजोरी हरकत पर गुस्सा व्यक्त किया। बाद में उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप के चलते चार खनन माफियाओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो सका।
इससे पूर्व भी दैनिक हिंदुस्तान के पत्रकार चंदन बंगारी भी माफियाओं का शिकार हो चुके हैं। अवैध खनन की फोटो खींचने कोसी नदी पर गए चंदन के पीछे माफिया पड़ गए थे। उन्होंने किसी तरह अपनी जान बचाई थी। पत्रकारों ने पुलिस से अवैध खनन पर रोक लगाने व अपराधी किस्म के माफियाओं पर नकेल कसने की मांग की।












dinbandhu bairagi
November 7, 2010 at 10:24 am
this is a hitalarshahi
aaushi
November 7, 2010 at 10:36 am
ye to aabhi ek ke hi sath hua hai.agar abhi ekjut na hue to aaghe sabki bari aayegi.ramnagar ke patrakaron ki ekjutata se baki log bhi sikh le to behtar hoga.
aaushi
dehradun
uttrakahand
dilip singh
November 7, 2010 at 3:15 pm
good….we should be together….aur han….patrakaro par har koi haavi tabhi tak hai jab tak hum ekjut nahi hain….this is the time we should fight for justice…..always with patrakar…dilip singh rathod
prashant tripathi varanasi
November 9, 2010 at 9:02 am
kushal bhai mai eak ser ke madhyam se apni bat kahna chahta hu …………..julm sahne se katilo ko madad milti hai……..is daur me jeena hai to kahram macha do….rashtriya sahara prashant tripathi varanasi
XYZ
November 11, 2010 at 3:51 pm
YAH KOI PAHLI GHATNA NAHI HAI MAI BHADASH 4 MEDIA SE CHARANBADH NIWEDAN KARNA CHAHUNGA KI ISE BHI PRATHMIKTA SE MIDEA KARMION KE BICH LAAY
MUZAFFARPUR KE SADHNA NEWS KE CAIMRA MAN SUNIL KUMAR KO BHI YAHN KE EK BAHUBALI KE GURGON NE ITNA MAR PITAI KIYA KI USKA DONO HATH TUT GAYA BECHARA SUIL KISI TARAH JAAN BACHAYA AGAR WAHAN EK PATRAKAR KA PHONE NAHI JATA TO SAAYAD USKI ZAAN BHI LELI JATI
TEEN MAH BED REST KARNE KE BAAD SASARAM APNE GHAR SE WAPAS JAB DUTY PAR AAYA TO HAD TO TAB HO GAI KI YAHAN KE RAJEEV RANJAN NE USSE ISHTIFA LIKHWA LIYA.
KEYA YAHI MEDIA HOUSE KA INSAF HAI
RAJEEV RANJAN KEYA HAIN YAH LOGO SE CHHUPA NAHI HAI PAR EK GARIB KO TO JAAN PAR KHELNA HIN PARA OR SATH HIN NAWKRI SE BHI HATH DHONA PARA.
THU THU HAI AISE HOUSE SE
Ek subhchintak sunil ka
pata kar lo